अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी से मांगी माफी, अब नहीं लड़ेंगे कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव

अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी से मांगी माफी, अब नहीं लड़ेंगे कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव

DESK. राजस्थान कांग्रेस में सियासी उठापटक के बीच आज अशोक गहलोत की सोनिया गांधी से मुलाकात हुई है। यह मुलाकात काफी लंबे समय तक चली। मुलाकात के बाद अशोक गहलोत ने साफ तौर पर कहा कि मैं कांग्रेस का सच्चा सिपाही हूं। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से 2 दिन पहले घटनाएं हुई है उससे मैं आहत हूं। उन्होंने कहा कि मैंने सोनिया गांधी को पूरी बात बताई है। पार्टी ने मुझे कई सारी जिम्मेदारियां दी है। पार्टी ने ही मुझे तीन बार मुख्यमंत्री बनाया है। जो कुछ भी हुआ है उसके लिए मैं खेद जता रहा हूं। जो कुछ भी हुआ उसके लिए मैंने माफी भी मांगी है। इंदिरा गांधी, राजीव गांधी से लेकर आज तक मुझ पर भरोसा रखा गया। कांग्रेस महासचिव से लेकर तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने तक का सफर हाईकमान के आशीर्वाद से ही रहा है।'

अशोक गहलोत ने कहा कि रविवार को जो घटना हुई थी, उसने मुझे हिलाकर रख दिया है। इससे यह संदेश गया कि जैसे मुख्यमंत्री बना रहना चाहता हूं। इसे लेकर मैंने सोनिया गांधी जी से माफी मांगी है।अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर अशोक गहलोत ने कहा कि जो हुआ है, उस हालात में मैने तय किया है कि अब कांग्रेस अध्यक्ष का इलेक्शन नहीं लड़ूंगा।

इसके साथ ही राजस्थान के मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि मेरा दुख कोई नहीं जान सकता है। यह संदेश गया कि मैं सीएम रहना चाहता हूं। लेकिन मैं कांग्रेस का वफादार सिपाही हूं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लडूंगा। अशोक गहलोत ने कहा कि मैंने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से बातचीत की। दो दिन पहले जो कुछ भी हुआ उसने हमें झकझोर कर रख दिया। इसने संदेश दिया कि यह सब हुआ क्योंकि मैं सीएम बनना चाहता था। मैंने उनसे माफी मांगी। अशोक गहलोत से यह भी सवाल पूछा गया कि क्या वे मुख्यमंत्री बने रहेंगे? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह फैसला सोनिया गांधी और कांग्रेस का नया अध्यक्ष करेगा। 

गहलोत ने कहा कि कोच्चि में राहुल गांधी से मिले और उनसे (कांग्रेस अध्यक्ष के लिए) चुनाव लड़ने का अनुरोध किया। जब उन्होंने स्वीकार नहीं किया, तो मैंने कहा कि मैं चुनाव लड़ूंगा लेकिन अब मैंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि एक पंक्ति का संकल्प हमारी परंपरा है। दुर्भाग्य से, ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई कि प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। यह मेरी नैतिक जिम्मेदारी थी, लेकिन सीएम होने के बावजूद मैं प्रस्ताव पारित नहीं करा सका।


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