देश को पहला 'डिस्को' सांग देनेवाले 'बप्पी लहरी' ने छोड़ी दुनिया, मुंबई में हुआ निधन

देश को पहला 'डिस्को' सांग देनेवाले 'बप्पी लहरी' ने छोड़ी दुनिया, मुंबई में हुआ निधन

DESK : फरवरी माह देश के संगीत प्रेमियों के लिए बेहद दुखदाई हो रहा है बीते 6 फरवरी को स्वर कोकिला लता मंगेशकर का निधन हुआ था अब संगीत की दुनिया से एक कार दुखद खबर सामने आई है डिस्को डिस्को सॉन्ग से परिचित कराने वाले मशहूर संगीतकार बप्पी लहरी ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया है। बीती रात मुंबई के एक प्राइवेट अस्पताल में उनका निधन हो गया। वह 69 साल के थे

बता दें कि मंगलवार रात बप्पी लाह‍िड़ी की तबीयत अचानक काफी ब‍िगड़ गई. उन्हें अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टर्स ने उन्हें बचाने की काफी कोश‍िश की पर नाकामयाब रहे. बप्पी लाह‍िड़ी पिछले कुछ समय से बीमार थे। अंतिम बार सार्वजनिक रूप से सलमान खान के साथ बिग बॉस में नजर आए थे। जहां वह अपने पोते के गाने को प्रमोट करने पहुंचे थे। उस समय भी बप्पी लहरी की आवाज सही तरीके से नहीं निकल पा रही थी। साथ ही वह चल भी नहीं पा रहे थे।

1973 में फिल्म इंडस्ट्री में किया डेब्यू

बप्पी दा का असली नाम आलोकेश लाह‍िड़ी है। लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद उन्होंने अपना नाम बप्पी लाहिड़ी कर लिया। बप्पी दा को 1973 में पहला ब्रेक मिला, जब 1973 में आई फिल्म 'नन्हा श‍िकारी' फिल्म में अपने म्यूज‍िक दिया।  उन्हें बॉलीवुड में असली पहचान 1975 की फिल्म “जख्मी” से मिली. इस फिल्म में उन्होंने मोहम्मद रफी और किशोर कुमार जैसे महान गायकों के साथ गाना गाया।  हालांक‍ि बीते साल उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि किशोर कुमार की फिल्म बढ़ती का नाम दाढ़ी से उन्होंने अपना बॉलीवुड डेब्यू किया था। इसके बाद उनके खाते में बाजार बंद करो, चलते चलते, आप की खात‍िर, लहम के दो रंग, वारदात, नमक हलाल, शराबी, हिम्मतवाला, सत्यमेव जयते, आज का अर्जुन, थानेदार सहित कई फिल्मों के गाने आए. 2020 में बागी 3 का गाना बंकास बॉलीवुड में आख‍िरी गाना था।


मिथुन चक्रवर्ती के साथ डिस्को डांसर ने जमाया रंगv

बप्पी दा ने सैंकड़ों फिल्मों में संगीत दिया। लेकिन मिथुन चक्रवर्ती के साथ फिल्म डिस्को डांसर के गानों ने ऐसा रंग जमाया कि आज भी जब इस फिल्म का गाना बजता है तो बरबस बप्पी लाहिड़ी का चेहरा सामने आ जाता है। बप्पी दा के लिए आई एम ए डिस्को डांसर और जिम्मी-जिम्मी गाना पहचान बन गया। देश में शायद ही कोई शादी समारोह ऐसा रहा हो, जिसमें बारातियों ने बप्पी दा के गानों पर डांस नहीं किया हो। वो बप्पी दा ही थे जिनकी आवाज ने इस गाने को घर-घर पॉपुलर किया था. 

अलग प्रकार का पहनावा

बप्पी लाहिड़ी जितना अपने संगीत और गाने के लिए जाने जाते थे, लगभग उतना ही अलग उनका पहनावा था। खास तौर पर वह हमेशा सोने के गहने पहने हुए नजर आते थे। गले में सोने की मोटी चेन और भारी-भारी अंगूठियां पहले बप्पी लाहिड़ी को देखने वाले सोने की दुकान तक कहते हैं. लेकिन सच तो यह है कि बप्पी लाहिड़ी को सोने से बेहद लगाव है और वह सोने को अपने लिए लकी मानते हैं। बप्पी लाहिड़ी हमेशा रॉकस्टार की लुक में नजर आते थे. बातचीत के ढंग से भी वह एक ऐसा मिश्रण लगते हैं जिसमें भारतीय रंग रूप के साथ अधिक मात्रा में विदेशी फैशन हो. उनके पहनावे में अधिकतर ट्रैकसूट या कुर्ता पायजामा होता था. इसके साथ ही बप्पी लाहिड़ी अपने धूप के चश्मों को गर्मी हो या सर्दी कभी नहीं छोड़ते।

सिर्फ तीन साल की उम्र से सीख रहे थे संगीत

27 नवंबर, 1952 को बप्पी लाहिड़ी का जन्म कोलकाता में हुआ था. वह एक धनाढ्य़ संगीत घराने से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता अपरेश लाहिड़ी एक प्रसिद्ध बंगाली गायक थे. उनकी माता बांसरी लाहिड़ी (Bansari Lahiri) भी बांग्ला संगीतकार थीं. बप्पी दा अपने माता पिता की अकेली संतान हैं । बचपन से ही उन्होंने विश्वप्रसिद्ध होने के सपने देखना शुरू कर दिया था. तीन साल की उम्र में तबला सीखने के साथ उन्होंने संगीत की शिक्षा लेनी शुरू की


 


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