हो जाइये सावधान- भीषण जल संकट की ओर बढ़ रहा बिहार, गंगा नदी के सीमाई इलाकों में सूख गए 35 प्रतिशत जलाशय

हो जाइये सावधान- भीषण जल संकट की ओर बढ़ रहा बिहार, गंगा नदी के सीमाई इलाकों में सूख गए 35 प्रतिशत जलाशय

पटना.  भीषण गर्मी और जल संकट की मार झेल रहे बिहार में जलाशयों को लेकर बुरी खबर है. राज्य में शुष्क और बंजर क्षेत्र ही नहीं गंगा के मैदानी इलाकों में भी जलाशयों के सूखने का रिकॉर्ड बन गया है. भूजलस्तर भी उसी तेजी से नीचे जा रहा है. क्वालिटी काउंसिल आफ इंडिया एवं राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की ओर से गंगा के सीमाई क्षेत्रों में जलाशयों पर किए गए एक शोध में कहा गया है कि बिहार में गंगा नदी के किनारे करीब 35 फीसदी जलाशय सूख गए हैं. सर्वेक्षण के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 41 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल के 17 प्रतिशत, उत्तराखंड के 84 प्रतिशत , बिहार के 35 प्रतिशत और झारखंड के 16 प्रतिशत जलाशय सूख गए हैं .

इस प्रकार, गंगा नदी घाटी के इन पांच राज्यों में औसतन करीब 38 प्रतिशत जलाशय सूख गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार काफी संख्या में सूखे जलाशयों में गंदगी सहित ठोस कचरा पाया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, गंगा बेसिन के पांच राज्यों के 2569 गांव में 41 पर्यवेक्षकों के दल ने सर्वेक्षण किया और 1100 जलाशय को देखा. इस कार्य में 23,100 डाटाप्रिंट तथा 1,49,346 चित्र लिये गए तथा ड्रोन तकनीक का भी उपयोग किया गया.

रिपोर्ट के अनुसार बिहार में सर्वेक्षण में गंगा नदी घाटी के 67 गांवों में 113 जलाशय पाए गए. इनमें से 32 प्रतिशत जलाशय अच्छी हालत में पाए गए जबकि 21 प्रतिशत में शैवाल सहित जलीय पौधे पाए गए.  गंगा नहीं घाटी के पांच राज्यों में सबसे ज्यादा खराब हालत उत्तराखंड का रहा. उत्तराखंड में 84 प्रतिशत जलाशय सूख गए हैं. 

गौरतलब है कि देश में पानी की समस्या एवं भूजल स्तर के लगातार नीचे गिरने की स्थिति को देखते हुए जल शक्ति मंत्रालय ने हर जिला मुख्यालय में ‘वर्षा केंद्र ’स्थापित करने पर जोर दिया है.  इन वर्षा केंद्रों को “जल शक्ति केंद्रों” के रूप में विकसित किया जा रहा है. ये वर्षा केंद्र जल संबंधी मामलों जैसे वर्ष जल संचयन प्रणाली (आरडब्ल्यूएचएस) की स्थापना, जल निकायों से गाद की सफाई, भू-जल संचयन, कृषि, उद्योग और पेयजल में पानी को बचाने के तरीकों इत्यादि के बारे में ज्ञान केंद्रों के रूप में काम कर रहे हैं.

इसके अलावा, मंत्रालय ‘कैच दी रेन’ अभियान भी चला रहा है. इसके तहत वर्षा जल को एकत्रित करने वाले गड्ढे, चेक डैम आदि बनाने, जलाशयों की संग्रहण क्षमता बढ़ाने के लिए उनमें अतिक्रमण दूर करने, बारिश के पानी को जलाशयों तक लाने वाले मार्गों को साफ करने जैसे अभियान चलाये जा रहे हैं.


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