मरने से पहले पिता ने कहा - श्राद्ध भोज और कर्मकांड पर लाखों रुपए खर्च नहीं कर उसी पैसे से एक पुल बनवा देना, बेटे ने पूरी की इच्छा

मरने से पहले पिता ने कहा - श्राद्ध भोज और कर्मकांड पर लाखों रुपए खर्च नहीं कर उसी पैसे से एक पुल बनवा देना, बेटे ने पूरी की इच्छा

MADHUBANI : आज के सामाजिक परिवेश में बेटे अपने जीवित पिता का सम्मान नहीं करते हैं, वहीं मधुबनी में एक बेटे ने अपने पिता के मरने के बाद उनकी आखिरी इच्छा को पूरा करने का काम किया है। यहां एक पिता ने मरने से पहले अपने बेटे के सामने आखिरी इच्छा जाहिर की थी कि मेरे मरने के बाद श्राद्ध भोज और कर्मकांड पर लाखों रुपए खर्च नहीं कर उसी पैसे से एक पुल निर्माण करवा कर ग्रामीणों को समर्पित कर देना। अब गांव में आरसीसी पुल बनवा भी दिया। 

पिता के लिए समर्पित बेट की यह कहानी कलुआही प्रखंड की नरार पंचायत से जुड़ी है। जहां वार्ड दो में रहनेवाले पूर्व उपसरपंच विजय प्रकाश झा उर्फ सुधीर झा से उनके पिता महादेव झा ने अंतिम इच्छा जाहिर की थी कि गांव में आरसीसी पुल बने। उन्होंने बेटे और परिजनों से इसकी इच्छा जताई थी। ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

कीचड़ में गिरने के कारण हुई थी मौत

पिता की इच्छा को पूरी करनेवाले बेटे विजय प्रकाश ने बताया कि 2019 में बरसात के बाद पिता बगीचा और खेत देखने जा रहे थे। सड़क पर पुल नहीं होने के कारण वह कीचड़ भरे पानी में फिसल कर गिर पड़े। उन्हें काफी चोट लगी। इसी के बाद पिता महादेव झा ने बेटे को बुला कर बेटे से संकल्प लिया।

भोज की जगह पुल बनाने की जताई इच्छा

अपने संकल्प में उन्होंने बेटे से कहा कि उनकी मृत्यु के बाद समाज में भोज नहीं करना। उस भोज के पैसे से पुल बना देना। इससे लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी। 16 जून 2020 को महादेव झा का निधन हो गया। वह अरुणाचल प्रदेश में शिक्षक थे। वर्ष 2000 में रिटायरमेंट के बाद से गांव में ही रह रहे थे।

पांच लाख की लागत से बनवाया पुल

उनके बेटे ने पिता की इच्छा के अनुसार श्राद्ध भोज के बदले आरसीसी पुल बनवाया है। पुल बनवाने पर पांच लाख रुपए खर्च हुए हैं। विजय प्रकाश ने बताया कि कोरोना के कारण निर्माण में विलंब हुआ। पुल अब पूरी तरह कंप्लीट हो चुका है। सिर्फ किनारे से मिट्टी भरनी है। हालांकि, लोगों का आवागमन शुरू हो चुका है। उन्होंने पिता महादेव झा के नाम का बोर्ड लगा पुल समाज को समर्पित कर दिया है।

दो हजार की आबादी के लिए बना रास्ता

बताया गया किपुल नहीं होने के कारण करीब दो हजार की स्थानीय आबादी और आसपास के लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब पुल बन जाने से नरार गांव से नरार चौक तक आने या जाने में मात्र 10 मिनट लगते हैं।


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