घर में ही घिरे भीष्म पितामह ! राधामोहन सिंह-पवन जायसवाल फिर हुए आमने-सामने...दोनों की पॉलिटिकल लड़ाई दो दशक पुरानी

घर में ही घिरे भीष्म पितामह ! राधामोहन सिंह-पवन जायसवाल फिर हुए आमने-सामने...दोनों की पॉलिटिकल लड़ाई दो दशक पुरानी

PATNA: बिहार में नगर निगम चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। इसी के साथ बीजेपी के अंदर भी सिरफुटौव्वल शुरू हो गया है। दल के नेता खुल्लम खुल्ला एक-दूसरे का विरोध कर रहे। बीजेपी के एक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व दल के एक विधायक की ऐसी लड़ाई हुई कि प्रदेश नेतृत्व को संज्ञान लेना पड़ा। हम बात कर रहे हैं मोतिहारी से सांसद व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधामोहन सिंह व ढाका से बीजेपी के कद्दावर विधायक पवन जायसवाल की। इन दोनों की अदावत सबके सामने है। दोनों नेता एक-दूसरे को पटखनी देने का एक भी मौका हाथ से निकलने नहीं देते। इस बार बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सांसद राधामोहन सिंह बैकफुट पर चले गये हैं. बीजेपी विधायक की गुगली से राधामोहन सिंह क्लीन बोल्ड हो गये. 

घर में ही घिरे भीष्म पितामह

मोतिहारी जिले की बीजेपी की राजनीति में दो बड़े नेता आमने-सामने हैं. एक तरफ राधामोहन सिंह तो दूसरी तरफ पवन जायसवाल। वैसे यह लड़ाई कोई नई नहीं है। दोनों के बीच यह लड़ाई दो दशक से जारी है. तब पवन जायसवाल बीजेपी में नहीं थे। मोतिहारी के राजनीति जानने वाले जानकार बताते हैं कि दोनों के बीच राजनीतिक लड़ाई वर्ष 2002 से चली आ रही है। तब मोतिहारी नगर परिषद् के सभापति ,उप सभापति का चुनाव था। भाजपा नेता राधामोहन सिंह जी ने बीजेपी के सबसे पुराने नेता स्व० लक्ष्मण प्रसाद की धर्म पत्नी वीणा देवी का विरोध कर कुमुद श्रीवास्तव को सभापति का प्रत्याशी घोषित किया था। रमा देवी मोतिहारी से राजद विधायक के साथ बिहार सरकार की मंत्री थी. पवन जायसवाल पहली बार ढाका से ज़िला पार्षद निर्वाचित होकर ज़िले की राजनीति में उभर रहे थे।रमा देवी ने नगर परिषद् मोतिहारी के चुनाव में बीजेपी नेता लक्ष्णण प्रसाद की पत्नी वीणा देवी को समर्थन देते हुए चुनावी कमान पवन जायसवाल को सौंपी थी. तब इन्होंने अपनी बेहतर रणनीति के साथ वीणा देवी को नगर परिषद् मोतिहारी की कुर्सी पर काबिज करा दिया था। राधामोहन सिंह के कैंडिडेट की हार हुई थी। साथ ही भाजपा के वरीय नेता स्व० लक्ष्मण प्रसाद की पत्नी को विजयश्री मिली थी। 

अब एक बार फिर से नगर निगम का चुनाव है। 20 वर्षों बाद फिर वही स्थिति आ गई है। अब पवन जायसवाल भी बीजेपी से विधायक हैं और राधामोहन सिंह सांसद।  लड़ाई एक बार फिर से मोतिहारी नगर निगम के मेयर-डिप्टी मेयर को लेकर है। आमने-सामने राधामोहन सिंह और पवन जायसवाल हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधामोहन सिंह ने मोतिहारी नगर निगम के मेयर-डिप्टी मेयर पद के लिए बीजेपी कैंडिडेट की घोषणा कर फंस गये। जैसे ही उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर दो नामों की घोषणा की, विधायक पवन जायसवाल विरोध में उठ खड़े हुए और तुरंत नेतृत्व से शिकायत कर दी। साथ ही सोशल मीडिया पर राधामोहन सिंह के निर्णय पर सवाल खड़े कर दिये। विवाद इतना बढ़ गया कि अंदर ही अंदर नेतृत्व को आगे आना पड़ा। बीजेपी के अंदर के लोग बताते हैं कि नेतृत्व के तल्ख तेवर के बाद राधामोहन सिंह को पीछे हटना पड़ा। जो राधामोहन सिंह 9 सितंबर को नगर निगम के मेयर पद को लेकर अपने फेसबुक-ट्वीटर पर भाजपा कैंडिडेट के नाम का ऐलान किया था,उसमें 11 सिंतबर को सुधार करना पड़ा. राधामोहन सिंह को अपना ट्वीट डिलीट करना पड़ा, वहीं फेसबुक पोस्ट में सुधार किया।इस तरह से नगर निगम की पहली लड़ाई ही उनके लिए उल्टा पड़ गया.

राधामोहन सिंह ने 9 सितंबर को घोषित किया था प्रत्याशी 

राधामोहन सिंह ने अपने फेसबुक-ट्वीटर पर लिखा था कि मोतिहारी नगर निगम चुनावों में महापौर पद के लिए भाजपा प्रत्याशी प्रकाश अस्थाना एवं उपमहापौर पद के लिए भाजपा प्रत्याशी डॉ लालबाबू प्रसाद को अपना समर्थन देकर विजयी बनाएं. जब भाजपा  विधायक पवन जायसवाल ने विरोध किया तो इस लाइन को मिटा लिया है। वहीं  ट्वीटर पर चूंकि सुधार का ऑप्शऩ नहीं है,लिहाजा राधामोहन सिंह ने उस ट्वीट को डिलीट मार दिया है। 

जिप अध्यक्ष-विप चुनाव में शह-मात का हो चुका है खेल  

बता दें, इसके पहले राधामोहन सिंह ने जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव व विधान परिषद चुुनाव में अंदर ही अंदर पवन जायसवाल के कैंडिडेट का विरोध किया था। नतीजा यह हुआ कि पवन जायसवाल की पत्नी से जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी छीन गई। वहीं विप चुनाव में भी बीजेपी कैंडिडेट की हार हो गई थी और निर्दलीय प्रत्याशी की जीत दर्ज हुई थी। तब राधामोहन सिंह को पूर्वी चंपारण जिले का भीष्म पितामह की संज्ञा दी गई थी।शहर में जगह-जगह पोस्टर लगे थे. जानकार बताते हैं कि दोनों चुनाव में राधामोहन सिंह गुट ने खुलकर विरोध किया था। 

 




Find Us on Facebook

Trending News