बड़ा बदलाव : इस बड़ी स्टील कंपनी के एचआर ने किन्नरों को सड़क पर भीख मांगते देखा, फिर समुदाय के लिए लिया बड़ा फैसला, कंपनी में थर्ड जेंडरों को मिली इंट्री

बड़ा बदलाव : इस बड़ी स्टील कंपनी के एचआर ने किन्नरों को सड़क पर भीख मांगते देखा, फिर समुदाय के लिए लिया बड़ा फैसला, कंपनी में थर्ड जेंडरों को मिली इंट्री

DESK : कई बार सड़क पर गुजरने के दौरान कुछ ऐसा होता है, जो बड़े बदलाव का कारण बन जाता है। अक्सर थर्ड जेंडरों को सड़क पर लोगों से भीख मांगते हुए देखा जा सकता है। लेकिन इन किन्नरों को देखकर दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी माने टाटा स्टील को बड़ा फैसला लेने के मजबूर होना पड़ा। किन्नरों की दशा में सुधार के लिए टाटा स्टील में थर्ड जेंडरों के लिए नौकरी की व्यवस्था की गई और यहां छह किन्नरों को स्थायी नौकरी दी गई है।

सड़क पर उनकी हालत को देखने के बाद एचआर ने लिया फैसला

दरअसल, टाटा स्टील कंपनी के एचआर सुधीर सिंह शहर के ट्रैफिक सिग्नल से गुजर रहे थे. उस दौरान श्री सिंह ने सिग्नल पर पैसे मांगते कुछ किन्नरों को देखा. तभी उनके मन में किन्नर समुदाय के लिए कुछ करने का विचार आया. उत्थान जेएसआर संस्था का प्रमुख होने के नाते उन्होंने संपर्क किया और किन्नर समुदाय की समस्याओं के बारे में जानने का प्रयास किया. बाद में जॉब से संबंधित विभिन्न तरह की लीगल प्रक्रिया से गुजरने के बाद टाटा स्टील ने ऑफर लेटर जारी किया।


इन किन्नरों को मिली नौकरी

टाटा स्टील में जिन किन्नरों को नौकरी मिली है, उनमें जमशेदपुर से अमरजीत सिंह एवं आनंदी सिंह समेत चाईबासा के फ्रांसेस सुंडी, अमित तथा रांची से निशु व आशीष शामिल हैं. इन सभी को MEMM ऑपरेटर के पद पर स्थायी नियुक्ति दी गयी है। सभी किन्नरों को एक दिसंबर, 2021 को वेस्ट बोकारो डिवीजन में ज्वाइन करना है. सभी किन्नरों को बतौर ट्रेनी एक साल तक काम करना होगा. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद सभी स्थायी रूप से काम पर लग जायेंगे. ट्रेनी रहने के दौरान उन्हें 20 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जायेगा.

अब बेहतर जीवन को लेकर समुदाय में जगी उम्मीद

टाटा स्टील में  6 किन्नरों को जॉब मिलने से समाज से इस वर्ग में आस जगी है. अब उन्हें भी लगने लगा है कि जल्द ही अन्य कंपनियां भी जॉब का ऑफर देगी. इससे इनका रुझान शिक्षा के प्रति बढ़ेगा। किन्नर अमरजीत सिंह ने कहा कि झारखंड में किन्नरों की आबादी कम नहीं है. लेकिन, उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर ना तो राज्य सरकार कुछ सोच रही है और ना ही बड़ी कंपनियां. लेकिन, टाटा स्टील हमारे समुदाय के बारे में कितना सोच रही है, इस बात की अनुभूति मुझे अब हो रही है।


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