नीतीश सरकार ने JDU विधायक से जुड़ी कंपनी से छीन लिया विधायकों के बंगला निर्माण का काम, कशीश डेवलपर्स को मिला था टेंडर

पटनाः नीतीश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट को उनकी ही पार्टी के एक विधायक से जुड़ी कंपनी पलीता लगाने में जुटी थी।यूं कहें कि नीतीश कुमार के सपनो को विफल करने का काम जेडीयू विधायक की कंपनी ही कर रही थी।आखिरकार जेडीयू विधायक से जुड़ी कंपनी से विधायक आवास निर्माण का काम छीन लिया गया है।

कशीश डेवलपर्स को मिला था काम

दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के विधायकों –विधान पार्षदों को हाईटेक आवास मुहैया कराने की एक बड़ी पहल की थी।इसके लिए 2017 में माननीयों को आवास बनाने का निर्णय लिया गया था। विधायकों और विधान पार्षदों के लिए अलग-अलग प्रोजेक्ट  तैयार बना और उसे कैबिनेट की मंजूरी मिली।नीतीश कैबिनेट की मंजूरी के बाद माननीयों के बंगला निर्माण के लिए टेंडर हुआ। करीब 350 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाली इस ड्रीम प्रोजेक्ट का काम वित्तीय वर्ष 2017-18 में सत्ताधारी जेडीयू विधायक से जुड़ी कंपनी कशीश डेवलपर्स लिमिटेड को दी गई। उसके बाद विधायक आवासन योजना का काम शुरू हुआ। 

विधायक आवास निर्माण में भारी गड़बड़ी की शिकायत

लेकिन समय बीतने के बाद भी विधायक आवास योजना का काम पूरा नहीं हुआ।इतना ही नहीं निर्माण कंपनी कशीश डेवलपर्स ने निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरती।भवन निर्माण विभाग की तरफ से कई बार कंपनी को चेतावनी भी दी गई लेकिन कार्य में कोई सुधार नहीं हुआ।कंपनी के द्वारा निर्माण कार्य को अधूरा छोड़ दिया गया. इसके बाद भवन निर्माण विभाग के संरचना प्रमंडल संख्या-2 ने 2 जुलाई 2020 को कंपनी का एकरारनामा रद्द कर दिया।आदेश में कहा गया कि बार बार नोटिस देने के बाद भी कंपनी ने काम शुरू नहीं किया।निर्माण कार्य समाप्त करने की तारीख 1 मई 2019 ही था जिसे बढ़ाकर 1 सितबंर 2020 किया गया था लेकिन कंपनी काम में दिलचस्पी नहीं दिखा रही थी।

सरकार ने कंपनी से छीन लिया काम

भवन निर्माण विभाग ने एकरारनामा रद्द किए जाने के बाद निर्माण कंपनी को 13 जुलाई को विधायक आवास योजना में निर्माण कार्य की अंतिम नापी के लिए नोटिस कर कार्यस्थल पर मौजूद रहने को कहा ।फिर 16जुलाई,  31 जुलाई और 6 अगस्त को मापी को लेकर उपस्थित रहने को कहा।लेकिन कंपनी का कोई भी अधिकारी कार्यस्थल पर मौजूद नहीं रहा।अब एक बार फिर से संरचना प्रमंडल-2 के कार्यपालक अभियंता ने नोटिस जारी कर कहा है कि अगर 30 अगस्त तक कार्य स्थल पर स्वयं या किसी प्रतिनिधि को उपस्थित नहीं करेंगे तो विभाग स्वयं मापी करा लेगा।इसके लिए कंपनी खुद जिम्मेदार होगी और कोई दावा मान्य नहीं होगा।बता दें कि कशीस डेवलपर्स जेडीयू विधायक सुनील चौधरी से जुड़ी हुई है। इस कंपनी में डायरेक्टर उनके भतीजे हैं. 

पुराने विधायक प्लैट को तोड़कर बन रहा शानदार बंगला

बता दें कि नीतीश सरकार ने पुराने एमएलए फ्लैट को तोड़ कर यहां आधुनिक ढंग से शानदार बंगला बनाकर विधायकों को आवंटित करने वाली है, लेकिन इसमें काफी देरी हो गई। विधायकों के लिए 247 डुप्लेक्स बंग्ला और विधानपार्षदों के लिए 75 डुप्लेक्स बंगलों का निर्माण कराया जा रहा है. अप्रैल 2018 में ही इसे पूरा कर लिया जाना था लेकिन अभी तक यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया है. कुछ महीने पहले 55 विधानपार्षदों को नया आवास आवंटित किया गया था। आवास आवंटन के पहले चरण में विधानपार्षदों को आवास सौंपे गए। दूसरे चरण में विधायकों यानि एमएलए को आवास दिए जाने की योजना थी। विधायक व विधान पार्षदों के सरकारी बंगला निर्माण पर लगभग 350 करोड़ की लागत आने वाली है।

एक डुप्लेक्स की लागत है 82.50 लाख रुपये

विधान पार्षदों के लिए बने नवनिर्मित आवासीय परिसर में एक डुप्लेक्स की लागत 82.50 लाख है। यह कुल 3050 वर्गफीट में बना है और निर्माण 3681 वर्गफीट का है। ग्राउंड फ्लोर के अतिरिक्त, फस्र्ट और सेकेंड फ्लोर पर विधान पार्षद के लिए रहने की व्यवस्था है। पूरा परिसर 18.56 एकड़ में विकसित किया गया है।लेकिन विधान पार्षदों के निर्माण में भारी गड़बड़ी की बात सामने आई है।इसी बरसात में विधान पार्षदों के आवास से पानी रिस रहा था।कई माननीयों ने तो इसकी शिकायत भी की थी।   

कांग्रेस एमएलसी ने आलीशान बंगले की खोल दी थी पोल


बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट विधायक-विधान पार्षदों के नवनिर्मित आवास के निर्माण में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई।कांग्रेस के एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्रा ने जून महीने में पत्र लिखखर विप के आवास निर्माण में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा सनसनी फैला दी थी.

विधान पार्षद प्रेमचंद्र मिश्रा ने भवन निर्माण विभाग के प्रधान सचिव चंचल कुमार को लिखे पत्र में कहा था कि आपको स्मरण कराना है कि गत वर्ष ही विधान परिषद के सत्र में मैने अपने ध्यानाकर्षण प्रश्न के द्वारा सरकार द्वारा विधान परिषद सदस्यों के लिए नव निर्मित आवास में व्याप्त विभिन्न प्रकार की गम्भीर त्रुटियों के संबंध में ध्यान आकृष्ट कराया था तथा विभागीय मंत्री के द्वारा लिखित जवाब भी सकारात्मक आया था लेकिन लगभग 11 महीने गुजरने के बावजूद ना तो ग्रील लगाया गया और ना हीं अन्य त्रुटियों यथा भवन में आई अनेकों क्रैक्स को ठीक करने की कोशिश की गई।इस बार की वर्षा ने कमजोर निर्माण की पोल खोल कर रख दी है.न सिर्फ मेरे लिए आवंटित आवास बल्कि अधिकांश सदस्यों के आवास में वर्षा के पानी के कारण बड़े पैमाने पर आये डैम्प के कारण शीलन तथा जहां तहां नव निर्मित मकान से पानी का रिसाव हो रहा है.यह स्थिति ना सिर्फ चिंताजनक है बल्कि निर्माण कार्य के दौरान विभाग की अनदेखी और लापरवाही बरतने का पर्याप्त प्रमाण है। पूरे निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर गुणवत्ता से समझौता किया गया है और ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य में सीमेंट की जगह सिर्फ बालू का ही प्रयोग हुआ है.जिस तरह से बाथ रूम, बेड रूम,ड्रॉइंग रूम तथा सभी जगहों से पानी के रिसाव और डैम्प तथा सौ से अधिक स्थानों पर दरार नज़र आने लगा है वह कमजोर निर्माण की पुष्टि करता है।

प्रेमचंद्र मिश्रा ने अपने पत्र में आगे लिखा था कि मैने कई बार यहां उपस्थित निर्माण कंपनी के स्टाफ आदि को इन त्रुटियों तथा वर्तमान रिसाव आदि के संबंध में बताया भी लेकिन इस संबंध में किसी भी प्रकार की पहल या समस्या के समाधान हेतु कोई कदम नही उठाए जाने के बाद एक बार फिर से पत्र लिख रहा हूं। आप खुद इन आवासों को आकर देखें तथा आवश्यक कदम उठाएं।कांग्रेस एमएलसी ने कहा कि इतनी बड़ी लागत से निर्मित आवास में ऐसी समस्याओं का दो-चार महीने के अंदर सामने आना कई प्रकार के सवालों को खड़ा करता है। सरकार, विभाग और निर्माण कंपनी की जिम्मेदारी बनती है कि वह गुणवत्तापूर्ण, मजबूत आवासीय निर्माण को सुनिश्चित करे लेकिन मुझे यह बताने में कोई झिझक नही की विधान पार्षदों के आवास निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार हुआ है।

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