बिहार विधानससभा चुनाव 2020: चुनाव प्रचार का शोर थमा, कल होगा अंतिम इम्तिहान, ईवीएम में कैद होगी 1204 प्रत्याशियों की किस्मत

बिहार विधानससभा चुनाव 2020: चुनाव प्रचार का शोर थमा, कल होगा अंतिम इम्तिहान, ईवीएम में कैद होगी 1204 प्रत्याशियों की किस्मत

पटना... बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के तीसरे और अंतिम चरण के तहत 15 जिलों के जिन 78 विधानसभा क्षेत्रों में 7 नवंबर को मतदान होना है, उनके लिए चुनाव प्रचार बुधवार की शाम छह बजे थम गया। सभी राजनीतिक दलों ने अपनी प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी। अब कल मतदान होने के बाद 10 नवंबर को परिणाम आएगा। इससे पहले रैलियों में सभी दलों के स्टार प्रचारकों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए वादों और घोषाणाओं की झड़ी लगा दी। मंच से पक्ष-विपक्ष ने खूब आरोपों की झड़ी लगी। अब कल के इम्तिहान के बाद 10 को ये साफ हो जाएगा कि कौन चुनावी रण में जीता और कौन हारा। 

राहुल गांधी ने यहां दिखाया दम

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस चरण में मधेपुरा और अररिया में चुनावी सभाओं को संबोधित किया। साथ ही ईवीएम को एमवीएम बताया। इस पर भाजपा ने दावा किया कि विपक्ष के नेता ने अपनी आसन्न हार के मद्देनजर ऐसे आरोप लगा रहे हैं। इस चरण में भी प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की रैलियां में बेतुकी घटनाएं जारी रहीं। मधुबनी में एक चुनावी रैली में नीतीश की ओर पत्थर और प्याज फेंके जाने पर उन्होंने ऐसा करने वालों से कहा, फेंको और फेंको। जबकि भाजपा ने विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए अपने कई दिग्गजों को मैदान में उतारा, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन लोगों में से थे जिन्होंने बार-बार राज्य के मतदाताओं से राजग का समर्थन करने का आग्रह किया।

विपक्ष ने भी भरी हुंकार

विपक्षी महागठबंधन मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तथा राजद नेता तेजस्वी यादव भी लगातार अपने प्रचार अभियान में लगे रहे और इस चरण में भी कई रैलियों को संबोधित किया। राजग में शामिल जदयू से नाता तोड़कर अपने बलबूते चुनाव लड़ रही लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी इस चरण में कई रैलियां और रोड शो किए। लोजपा को इस चुनाव के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार्य नहीं हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण के अंतर्गत राज्य के मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र के कई विधानसभा क्षेत्र आते हैं। एआईएमआईएम जो रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और मायावती की बीएसपी सहित कुल छह दलों का गठबंधन बनाकर यह चुनाव लड़ रही है, के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा और मोदी को बढ़ावा मिलने के लिए कांग्रेस-राजद गठबंधन को जिम्मेदार ठहराते हुए अल्पसंख्यकों से आग्रह किया कि वे इन दोनों दलों को इस चुनाव में किनारे लगा दें।

78 विधानसभा सीटों पर होना है मतदान

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि तृतीय चरण के कुल 78 विधानसभा क्षेत्रों में सात नवम्बर को मतदान होना है और उनके लिए बुधवार की शाम छह बजे प्रचार समाप्त हो गया। ये 78 विधान सभा क्षेत्र राज्य के जिन जिलों में पड़ते हैं, वे पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, वैशाली तथा समस्तीपुर हैं। इस चरण में कुल 1204 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं, जिनमें 110 महिला शामिल हैं। जबकि तृतीय चरण में सबसे अधिक प्रत्याशी (31) गायघाट में और सबसे कम प्रत्याशी (9) चार विधानसभा क्षेत्रों ढ़ाका, त्रिवेणीगंज, जोकीहाट और बहादुरगंज में हैं।


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