बिहार बीजेपी का तेजस्वी यादव पर बड़ा पॉलिटिकल हमला,कहा- नेता प्रतिपक्ष ने महागठबंधन नेताओं को बना दिया है डगरा का बैगन

बिहार बीजेपी का तेजस्वी यादव पर बड़ा पॉलिटिकल हमला,कहा- नेता प्रतिपक्ष ने महागठबंधन नेताओं को बना दिया है डगरा का बैगन

Patna: बिहार बीजेपी ने तेजस्वी यादव पर बड़ा पॉलिटिकल हमला बोला है। महागठबंधन नेताओं के बहाने बीजेपी ने तेजस्वी यादव पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बीजेपी ने कहा है कि 9 वी पास तेजस्वी यादव ने कांग्रेस समेत अन्य सहयोगी दल के कद्दावर नेताओं को डगरा का बैगन बना दिया है।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अरविन्द कुमार सिंह ने कहा है की महागठबंधन में राजद ने अपने प्रभाव से घटक दल के नेताओं को बना दिया है डगरा का बैंगन।महागठबंधन में राजद,कांग्रेस, आरएलएसपी वीआईपी और हम। कांग्रेस पार्टी बिना पेंदी के लोटा की तरह राजद के इशारे पर काम कर रही  है ।उनके कद्दावर नेता इधर से उधर लोंघड़ा रहे है,और राजद के छुटभैये नेता उनके बड़े-बड़े नेताओं सदानंद सिंह और अनिल शर्मा जैसे नेताओं को अपमानित करने का काम कर रहै हैं।वही आरएलएसपी के नेता एवं पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा,अब हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी न करने वाले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की बटरिंग में लगे हुए हैं और गा रहे हैं, "मिले सुर मेरा तुम्हारा सुर बने हमारा" जिससे कुछ दूध का छाली उनको भी मिल जाए।


भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि वहीं हम प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी महागठबंधन के सबसे सीनियर और अनुभवी नेता हैं।वे कोआर्डिनेशन कमेटी बनाने के लिए तरस गए लेकिन तेजस्वी यादव उनको भाव ही नहीं दिए।हद तो तब हो गयी जब राजद के छूट भैया नेताओं ने उनको इतनी भद्दी भद्दी कमेंट किया जिससे उनकी प्रतिष्ठा चली गयी।लिहाजा वे रास्ता तलाशते तलाशते डगरा का बैगन हो गए हैं। वहीं राष्ट्रीय जनता दल वीआईपी पार्टी के नेता मुकेश साहनी  को नेता कम एवं बंबइया कलाकार ज्यादा समझती है। वे बिहार के हैं लेकिन सारा एक्टिविटी बॉम्बे सिनेमा वाला होने की वजह से तेजस्वी यादव उनको भी पहचानते है। ये जिस समाज से आते हैं उस समाज के उत्थान से उनको कोई  मतलब नहीं है बल्कि इनको खुद विधायक बनने के लिए बेचैन हैं।

अरविन्द सिंह ने कहा की यह महागठबंधन के जितने भी नेता हैं, सब के सब मुंगेरीलाल का हसीन सपने देखने वाले लोगों की एक जमात है।महागठबंधन से ज्यादा से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए कोई बटरिंग तो कोई ब्लैकमेलिंग कर रहा है।ये जितने भी बिहार में दल बने हैं,  इनके नेताओं को सभी दलों का अनुभव इनको प्राप्त है,  ये मजबूरी और भय का गठबंधन है, अभी चुनाव का समय है, इनका तोल मॉल के बोल चल रहा है। बिहार की जनता द्वारा रिजेक्टेड नेताओं को पब्लिक देख रही है और चुनाव में सबक सिखाएगी।

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