शरीर से जुड़े भाइयों ने एक पोस्ट के लिए किया अलग-अलग आवेदन, लेकिन उलझन यह कि किसका करें चयन

शरीर से जुड़े भाइयों ने एक पोस्ट के लिए किया अलग-अलग आवेदन, लेकिन उलझन यह कि किसका करें चयन

AMRITSAR : जन्म से ही एक जिस्म दो जान के रूप में पंजाब में पहचान बन चुके दो भाई सोहणा-मोहणा अब बड़े हो गए हैं और उन्होंने नौकरी की तलाश शुरू कर दी है। जिसमें दोनों ने इलेक्ट्रिकल डिप्‍लोमा करने के बाद पंजाब पावरकाम में जेई पद के लिए आवेदन किया है, लेकिन उनको दिव्‍यांगता प्रमाणपत्र नहीं मिल रहा है। दोनों के लिए सरकारी प्रावधान बैरियर बन गया है। क्योंकि एक जिस्‍म दो जान जैसे मामले में दिव्‍यांगता प्रमाणपत्र जारी करने कोई नियम  नहीं है।

शरीर से फिट फिर कैसें दें दिव्यांग प्रमाण पत्र

दरअसल, दोनों का मेडिकल फिटनेस टेस्ट अमृतसर के सरकारी मेडिकल कालेज में किया गया है। ब्लड ग्रुप ओ पाजिटिव है। रक्त व यूरिन के सैंपल की रिपोर्ट ठीक है। इसी प्रकार दिव्‍यांगता की जांच करने के लिए डाक्टरों का बोर्ड बनाया गया। डाक्टरों ने उनका शारीरिक परीक्षण किया, मसलन उन्हें सीढ़ियों पर चढ़ने को कहा गया। हड्डियों की जांच की गई। जिसमें वह पूरी तरह से फिट पाए गए ऐसे में डाक्टरों के सम्मुख यह चुनौती है कि वे इनका दिव्यांगता प्रमाण पत्र कैसे जारी करें। अब मेडिकल कॉलेज कानूनी प्रावधान की जानकारी ले रहे हैं। साथ ही इस बात की भी जानकारी मंगाई जा रही है कि किसी राज्य में पहले ऐसा सर्टिफिकेट जारी किया गया है या नहीं। 

पंजाब पावर के अधिकारी भी उलझन में 

समस्या सिर्फ दिव्यांगता प्रमाण पत्र को लेकर नहीं है। दोनों भाइयों ने पंजाब पावर के जेई के एक पोस्ट के लिए अलग अलग आवेदन दिया है।  अब पावरकाम तय नहीं कर पा रहा कि इस आवेदन को कैसे लिया जाए। यदि एक को नौकरी मिलती है तो दूसरा भी साथ जाएगा। ऐसे में क्या दोनों एक ही नौकरी पर साथ काम करेंगे या दोनों के लिए अलग-अलग पोस्ट बनानी पड़ेगी। वेतन का क्या होगा। अलग-अलग होगा या दोनों को आधा-आधा दिया जाएगा। पावरकाम के चेयरमैन कम डायरेक्टर ए. वेणुप्रसाद का कहना है कि अभी सोहणा-मोहणा के आवेदन करने की सूचना है। साक्षात्कार के बाद ही कुछ तय कर सकेंगे कि ऐसे मामलों में एक को ही नौकरी मिलेगी या दोनों को।अमृतसर के पिंगलवाड़ा में पले-बढ़े सोहणा मोहणा 18 साल के हो चुके हैं।

2003 में जन्म के बाद मां बाप ने छोड़ दिया

सोहणा-मोहणा का जन्म 14 जून, 2003 को दिल्ली के सुचेता कृपलानी अस्पताल में हुआ था। शरीर से जुड़े होने के कारण उनके माता-पिता ने उन्हें अपनाने से इनकार कर दिया और अस्पताल में ही छोड़कर चले गए।  लगभग दो माह बाद पिंगलवाड़ा की मुख्य सेवादार बीबी इंद्रजीत कौर दोनों को पिंगलवाड़ा ले आई थीं। इनकी देखरेख के लिए नर्सिंग सिस्टर तैनात की गई। डाक्टरों ने कहा था कि दोनों ज्यादा समय जिंदा नहीं रहेंगे, ले‍किन विकट परिस्थितियों का अद्भूत हौसले के साथ सामना कर दोनों बालिग हो गए। अब दोनों भाई 18 साल के हो गए हैं। दोनों ने अलग अलग आधार कार्ड भी बनवा लिया है। लेकिन अब असली कठिनाई शुरू हो गई है। क्योकि बात अब करियर से जुड़ी हुई है।

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