बक्सर में भितरघात से डरे चौबे, नीतीश के दरबार में लगाई हाजिरी

बक्सर में भितरघात से डरे चौबे, नीतीश के दरबार में लगाई हाजिरी

PATNA: सत्ता और सियासत, गिरिराज और अश्वनि चौबे... दो शब्द, दो नाम और इसके केंद्र में सीएम नीतीश. क्योंकि बक्सर और बेगूसराय में जीत की बागडोर सीएम नीतीश के हाथ हैं. अब गिरिराज और अश्विनी चौबे को सत्ता हर हाल में चाहिए...सियासत ऐसी की जो कभी मुंह में पान भर भरके सीएम नीतीश को जमकर सुनाते थे आज बिहार बीजेपी के एकमात्र यही दो नेता हैं जो सीएम नीतीश से मिलते भी है और खुल कर एलान भी करते हैं कि बिहार में नीतीश से बड़ा कोई नेता नहीं. आखिर सत्ता पाने के लिए कौन से सियासी खेल खेल रहे हैं गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे.

पहले बाबा के चौखट पर जाकर की पूजा

केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी चौबे को कार्यकर्ता बाबा कहकर पुकारते हैं. गुरुवार को बीजेपी वाले बाबा सुबह-सुबह बाबानगरी देवघर पहुंचे और जीत की कामना की. यही नहीं बाबानगरी में बीजेपी के बाबा जमीन पर ही लोट गए. इतने से भी अश्विनी चौबे जीत को लेकर आश्वस्त नहीं हुए तो नीतीश के दरबार में भी हाजिरी लगाई. दरअसल अश्विनी चौबे को बीजेपी ने बक्सर से लोकसभा उम्मीदवार बनाया है. वहीं बक्सर से उनके सामने महागठबंधन ने जगदानंद सिंह को उम्मीदवार बनाया है. यदि बक्सर की बात करें तो पिछले लोकसभा चुनाव में अश्विनी चौबे को 3,19, 012 वोट, जगदानंद सिंह को 1,86,674 वोट और ददन यादव को 1,84,788 वोट मिले थे. लेकिन पिछले बार की बात कुछ और थी. लेकिन इस बार जो समीकरण बन रहा है उससे अश्विनी चौबे काफी सहमे हुए हैं क्योकि इस बार वहां जनता का मिजाज काफी बदला हुआ है या यूं कहें लोगों के बीच अश्विनी चौबे की छवि अच्छी नहीं है. अब यदि हर हाल में अश्विनी चौबे को वहां से चुनाव जीतना है तो जेडीयू के ददन यादव ही उनका बेड़ा पार लगा सकते हैं. लोग कहते हैं कि जेडीयू के ददन यादव ने अश्विनी चौबे का सपोर्ट कर दिया तो इनका बेड़ा पार लग सकता है. अश्विनी चौबे खूब अच्छे से समझ रहे है कि यदि नीतीश कुमार ने उनका साथ दे दिया और बक्सर में ददन यादव मैनेज हो गए तो यादवों के वोट बैंक के सहारे चौबेजी की बल्ले बल्ले हो जाएगी.

कहानी इतनी सीधी नहीं हैजितनी नजर आ रही है

कुछ चौबेजी वाला ही हाल गिरिराज सिंह का है. गिरिराज सिंह ने भी नीतीश दरबार से आशीर्वाद ले लिया है. एक वक्त में गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे दोनों नीतीश कुमार के धुर विरोधी बन गए थे. कई बार तो इन दोनों के हमले नीतीश पर लालू के मुकाबले कहीं ज्यादा तीखे रहे हैं. लेकिन कहानी तब बदल गई जब नवादा लोकसभा सीट गिरिराज सिंह को नहीं मिला. गिरिराज सिंह को बीजेपी ने बेगूसराय भेज दिया. पिछले चुनाव की बात करें तो भोला सिंह ने इस सीट से आरजेडी के तनवीर हसन को 58,000 वोटों के मामूली अंतर से हराया था, वह भी मोदी लहर के दौरान, ऐसे में गिरिराज सिंह इस सीट पर आना नहीं चाहते थे. गिरिराज सिंह के लिए तनवीर हसन मुश्किल तो थे ही बड़े मुश्किल कन्हैया बन गए हैं. ऐसे में गिरिराज सिंह के लिए एकमात्र सहारा सीएम नीतीश ही हैं क्योकि भीतरधात का डर उन्हें सता रहा है. लेकिन गिरिराज सिंह को यदि जेडीयू के मोनाजिर हसन का साथ मिल जाए तो गिरिराज के सिर से संकट के बादल छंट जाएंगे. 

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