कुर्सी प्रेम! गांधी मूर्ति के नीचे 'कुर्सी' पर बैठ BJP की पोल खोलने वाले थे 'नीतीश' के बड़े नेता, खुद की पोल खुलने के भय से कुर्सी हटा जमीन पर बैठे

कुर्सी प्रेम! गांधी मूर्ति के नीचे 'कुर्सी' पर बैठ BJP की पोल खोलने वाले थे 'नीतीश' के बड़े नेता, खुद की पोल खुलने के भय से कुर्सी हटा जमीन पर बैठे

PATNA : जेडीयू नेताओं का कुर्सी प्रेम एक बार फिर से दिखा। जेडीयू नेताओं द्वारा BJP की पोल खोल को लेकर गांधी मैदान में धरना कार्यक्रम आयोजित की गई। धरना स्थल पर कुर्सियां लगाई गई थी। कुर्सी पर बैठकर जदयू के नेता धरना देने वाले थे और आरक्षण को लेकर  BJP  की पोल खोल रहे थे। बड़े नेता के आने से पहले कुछ नेता उस कुर्सी पर बैठे भी, लेकिन जदयू नेतृत्व को भनक लग गयी। लिहाजा राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के आने से पहले ही आनन फानन में धरना स्थल पर लगाई गई कुर्सियां हटाई गई। इसके बाद जदयू के नेता और कार्यकर्ता जमीन पर बैठकर BJP की पोल खोलते हुए नजर आए।

धरने पर बैठे जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने इस दौरान BJP  को नया नाम भारतीय झूठा पार्टी बताया। उन्होंने कहा भाजपा कभी नहीं चाहती थी कि पिछड़ी जाति के लोगों को आरक्षण का लाभ मिले। वह धीरे धीरे आरक्षण व्यवस्था को खत्म करन चाहती है।

2015 में हमें पता चल गया था भाजपा की नियत

ललन सिंह ने कहा कि 2015 में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण व्यवस्था पर पुनर्विचार करने को कहा था। जाहिर था कि बीजेपी नहीं चाहती थी कि देश में आरक्षण व्यवस्था बनी रहे। जदयू उनकी मंशा को उसी समय समझ चुकी थी। हालांकि ललन सिंह ने यह नहीं बताया कि भाजपा की मंशा जानने के बाद भी जदयू ने उनके साथ क्यों गठबंधन बनाए रखा।

गांधी मैदान में भाजपा की साजिश की पोल-खोल के लिए बैठे जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा 2006 में ही पंचायत और 2007 में नगर निकायों में पिछड़े और अति पिछड़ा के लिए चुनाव में आरक्षण के लिए नीतीश कुमार ने व्यवस्था कर दी थी। जिस पर तीन-तीन चुनाव हो गए। अब कहा जा रहा है कि यह पूरी व्यवस्था गलत थी। जबकि उस समय हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के फैसले को सही ठहराया था। आज वह गलत हो गई। सच्चाई यह है कि भाजपा नहीं चाहती थी कि आरक्षण के आधार पर चुनाव कराया जाए।

हाईकोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल

ललन सिंह इस दौरान हाईकोर्ट के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए नजर आए। हालांकि उन्होंने सीधे-सीधे हाईकोर्ट को फैसले को गलत नहीं बताया, लेकिन जिस तरह से उन्होंने निकाय चुनाव में आरक्षण व्यवस्था खत्म करने की बात कही, उसकी बाद साफ जाहिर था कि वह हाईकोर्ट के फैसले ने संतुष्ट नहीं है।

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