CM 'नीतीश' को नेता व दल से बहुत जल्द भरता है मन ! 2021 में कुशवाहा का हाथ पकड़कर क्या कहा था...दो साल में ही भूल गए मुख्यमंत्री ?

CM 'नीतीश' को नेता व दल से बहुत जल्द भरता है मन ! 2021 में  कुशवाहा का हाथ पकड़कर क्या कहा था...दो साल में ही भूल गए मुख्यमंत्री ?

PATNA: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मार्च 2021 में उपेन्द्र कुशवाहा को दल में शामिल कराया था. इसी के साथ रालोसपा का जेडीयू में विलय  हो गया था. कुशवाहा को अपनी पार्टी में शामिल कराने के लिए नीतीश कुमार ने काफी पसीना बहाया था. जेडीयू में शामिल कराने के बाद नीतीश कुमार फूले नहीं समा रहे थे. कुशवाहा का हाथ पकड़कर सीएम नीतीश ने ऐलान किया था कि अब एक साथ मिलकर प्रदेश और देश की सेवा करेंगे. लेकिन नीतीश कुमार कुमार तो नीतीश कुमार ठहरे. एक बार फिर से उन्होंने कुशवाहा को गच्चा दे दिया. ऐसा लग रहा कि नीतीश कुमार का कुशवाहा से मन भर गया. हालात ऐसे हो गए हैं कि नीतीश-ललन की बात छोड़िए जेडीयू के दूसरे-तीसरे दर्जे के नेता भी कुशवाहा को भाव देते नहीं दिख रहे. जेडीयू के कार्यक्रमों से कुशवाहा को अलग-थलग कर दिया गया है.

आरसीपी के बाद अब कुशवाहा से नीतीश का मोह भंग    

नीतीश कुमार ने पहले आरसीपी सिंह को बाहर किया. अब कुशवाहा से मोह भंग हुआ है. आरसीपी सिंह की तरह अब उपेन्द्र कुशवाहा को भी बाहर जाने पर मजबूर किया जा रहा. सीएम नीतीश ने पूरी स्क्रिप्ट लिख डाली है. याद करिए....14 मार्च 2021 का वो दिन. जब सीएम नीतीश कुमार ने उपेन्द्र कुशवाहा को दल में शामिल कराने के बाद क्या कहा था...। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुशवाहा से हाथ मिलाने के बाद कहा था,'‘हम पहले भी साथ थे. अब भी हम एक हैं और एकसाथ मिलकर प्रदेश और देश की सेवा करेंगे.’

...कहां गया वो वादा ?

बड़ा सवाल यही है कि क्या नीतीश कुमार ने कुशवाहा के सामने प्रदेश और देश की सेवा करने का वादा किया था, वो पूरा हो गया ? आखिर दो साल के अंदर ही नीतीश कुमार कुशवाहा को अलग करने पर क्यों तुले हैं ? आखिर किसी नेता व सहयोगी से नीतीश कुमार को इतनी जल्दी मन क्यों भर जाता है ? राजनीतिक जानकार बताते हैं कि दल के अन्य तीन-चार नेताओं की तरह उपेन्द्र कुशवाहा पिछलग्गू बनना नहीं चाहते थे. यह गुण उनमें नहीं है. लिहाजा वे जेडीयू में फिट नहीं बैठ पाते. यही वजह है कि वे दल के अंदर धीरे-धीरे किनारे होते चले गए या फिर किनारे कर दिए गए. 

कुशवाहा ने खोली पोल 

उपेन्द्र कुशवाहा ने आज खुलकर अपनी बात रखी और नीतीश-ललन की जोड़ी को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि दल के अंदर हमें किनारे करने की साजिश रची जा रही. वैसे लोग हमें किनारे नहीं कर रहे बल्कि नीतीश कुमार को कमजोर कर रहे हैं. कुशवाहा ने आगे कहा कि राजद-जेडीयू का विलय मेरे कारण रुका. मैने इसके लिए आवाज उठाई. इसके बाद सीएम नीतीश का बयान सामने आया. अब आरजेडी के लोग कह रहे हैं कि गठबंधन में डील हुई है. जिन लोगों ने डील किया वे बताएं कि क्य़ा डील हुई है...। अगर सार्वजनिक नहीं बता सकते तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुला कर बताएं कि राजद से क्या डील हुई . इधर, कुशवाहा के तीखे तेवर के बाद नीतीश कुमार बैकफुट पर हैं. कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंच नीतीश कुमार ने  साफ कर दिया कि वह उपेंद्र कुशवाहा से जुड़े किसी सवाल का जवाब नहीं देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा के किसी बात पर कुछ मत पूछिए। छोड़ दीजिए उनको, जो मन में आए बोलते रहें। उनको बोलने के लिए छोड़ दीजिए। उनकी बात पर हमारी पार्टी का कोई नेता कुछ नहीं बोलेगा।

बता दें, उपेन्द्र कुशवाहा 2004 में पहली बार विधायक बनकर आए तो कई वरिष्ठ विधायकों की नजरंअदाज करके नीतीश कुमार ने उन्हें बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष का नेता बनाया था। 2013 में जदयू के राज्यसभा सदस्य रहे कुशवाहा ने विद्रोही तेवर अपनाते हुए जदयू ने नाता तोड़कर रालोसपा नामक नई पार्टी का गठन कर लिया तथा 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा नीत राजग का हिस्सा बन गये। इस चुनाव बाद कुशवाहा नरेंद्र मोदी सरकार में शिक्षा राज्य मंत्री बनाए गए थे। जुलाई 2017 में जदयू की राजग में वापसी ने समीकरणों को एक बार फिर बदल दिया और रालोसपा ने इस गठबंधन ने नाता तोड़कर राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन का हिस्सा बन गए थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में कुशवाहा ने काराकाट और उजियारपुर लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें हार मिली। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कुशवाहा ने महागठबंधन से नाता तोड़कर मायावती की बसपा और एआईएमआईएम के साथ नया गठबंधन बनाकर यह चुनाव लड़ा था।


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