विपक्षी एकता के लिए दिल्ली में नेताओं के दर-दर जा रहे सीएम नीतीश, लेकिन बिहार में ही महागठबंधन होने लगा दो फाड़

विपक्षी एकता के लिए दिल्ली में नेताओं के दर-दर जा रहे सीएम नीतीश, लेकिन बिहार में ही महागठबंधन होने लगा दो फाड़

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले तीन दिनों से दिल्ली में विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए अधिकांश विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं. वे आधा दर्जन से ज्यादा विपक्षी दलों के नेताओं संग मैराथन बैठकें कर चुके हैं. नीतीश कुमार वर्ष 2024 लोकसभा की रणनीति बनाने के लिए के और दिल्ली में लगातार विपक्षी एकता के लिए प्रयासरत हैं तो दूसरी ओर उनका नया नवेला आशियाना ‘महागठबंधन’ अभी से कई मुद्दों पर दो फाड़ होता दिख रहा है. ऐसे में नीतीश कुमार दूसरे राज्यों के दलों को एकजुट करने के पहले बिहार में महागठबंधन को मजबूत करने और एकजुट बनाये रखने की चुनौती झेल सकते हैं. 

नीतीश के सामने बिहार में आई यह चुनौती मोकामा विधानसभा उपचुनाव को लेकर है. मोकामा से राजद विधायक अनंत सिंह को कोर्ट ने एक मामले में 10 साल की सजा सुनाई है जिस कारण उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई. मोकामा में अब उपचुनाव होना है. उपचुनाव की तैयारियों को लेकर जदयू और राजद दोनों की ओर से बैठकों का दौर शुरू हो गया है. दोनों दलों के नेताओं ने मोकामा सीट पर दावा करना शुरू किया है. यही दावा महागठबंधन के लिए फ़िलहाल सबसे बड़ी चौड़ी होती दरार को दर्शा रहा है. 

दरअसल, वर्ष 2005 में दो बार सहित 2010 में जदयू के टिकट पर अनंत सिंह ने जीत हासिल की थी. 2015 में अनंत ने निर्दलीय चुनाव लड़ा जबकि 2020 में वे राजद के टिकट पर चुनाव जीते. ऐसे में जदयू और राजद दोनों ही मोकामा को अपना परम्परागत सीट बताकर इस बार चुनाव लड़ने का दावा ठोंक रहे हैं. जहाँ अनंत सिंह समर्थकों का कहना है कि राजद ने अनंत सिंह की पत्नी को टिकट देने का वादा किया है वहीं जदयू ने भी अपना दावा ठोंका है. 

जदयू के बाढ़ जिला संगठन अध्यक्ष परशुराम पारस ने बुधवार को कहा कि मोकामा में चुनाव लड़ने के लिए जदयू तैयार है. मोकामा जदयू की परम्परागत सीट रही है. वहीं बुधवार को ही राजद ने भी एक बैठक कर मोकामा सीट पर राजद उम्मीदवार उतारने का दावा किया. ऐसे में बिहार में महागठबंधन सरकार बनते ही नीतीश कुमार के लिए मोकामा सीट एक नई चुनौती के रूप में है. दोनों दलों का एक ही सीट पर दावा करना दिखाता है कि मोकामा को लेकर फ़िलहाल उनके बीच कोई बात नहीं बनी है. दोनों ओर से विरोधाभाषी बयानबाजी से महागठबंधन कार्यकर्त्ताओं में भी फ़िलहाल सामंजस्य की कमी दिख रही है. यानी नीतीश कुमार भले विपक्षी एकता के लिए प्रयासरत हों लेकिन नीतीश को मोकामा में महागठबंधन को एकजुट रखने की चुनौती है. 



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