पानी का भार नही सह सका सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट नल जल की टंकी, 12 लाख के लागत से बना टंकी भरभरा कर धरती पर गिरा

पानी का भार नही सह सका सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट नल जल की टंकी, 12 लाख के लागत से बना टंकी भरभरा कर धरती पर गिरा

MOTIHARI : सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट नलजल योजना अधिकारियों के मिलीभगत से जनप्रतिनिधियों व संवेदकों के लिए लूट का योजना बनकर रह गया है। कमीशन के खेल में नलजल योजना का  बिना गुणवत्तापूर्ण काम होने से लगातार धड़ाम धड़ाम कर टंकी धरातल पर गिर रहा है। जिले में भिन्न भिन्न प्रखंडो में अबतक दो दर्जन से अधिक टंकी पानी का भार नही सहते हुए भरभरा कर गिर गया।अधिकारियों के मिलीभगत होने से कार्रवाई के नाम पर फाइल धूल चाट रहा है। अगर सूक्ष्म तरीके से नलजल योजना का जांच कर हो तो कई पदाधिकारी से जनप्रतिनिधियों तक कि पोल खुल जाएगी। ताजा मामला सुगौली प्रखंड का है। जहा नलजल का टंकी पानी का भार नही सहते हुए धराशायी हो गया। जिसके बाद पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि व संवेदक के मिलीभगत का आरोप लगाते हुए ग्रामीण नलजल के कार्य के गुणवत्ता पर सवाल उठाते रहे लेकिन पदाधिकारी चुप्पी साध ली है ।टंकी गिरने के बाद ग्रामीणों में चर्चा का विषय बना हुआ है कि कमीशन के खेल में कार्य का गुणवत्ता नही होने से टंकी भरभरा कर गिर गया।

सुगौली प्रखंड में मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी हर घर नल जल योजना के क्रियान्वयन में अनियमितता का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. मंगलवार को प्रखंड क्षेत्र के उत्तरी सुगांव पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या 6 में 12 लाख रुपये से कराए गए नल जल योजना का कार्य भी अनियमितता की भेंट चढ़ गया और देखते ही देखते पानी से भरा टंकी धराशायी हो गया. वार्ड क्रियान्वयन समिति द्वारा वार्ड में इस कार्य को कराया गया था, जिसमें शुरू से ही घोर अनियमितता का आरोप लगाया जा रहा था। ग्रामीणों के अनुसार वहां न तो मानक के अनुसार पाइप लगाया गया है और न ही नल की टोंटी. जैसे-तैसे स्ट्रक्चर खड़ा कर उस पर रखा गया कम गुणवत्ता का टंकी भी पानी भरने से फट कर गिर गया। ग्रामीणों द्वारा इसकी सूचना पूर्व के बीडीओ को दी गई है।

पानी का भार नहीं सह सका लोहे का टावर

बताया जाता है कि लोगों को सप्लाई के लिए लोहे के टावर पर रखी टंकी में पानी भरी जा रही थी. कमजोर टावर पानी का वजन सह नहीं सका और भरभरा कर गिर गया. ग्रामीणों ने बताया कि नल-जल का काम कहीं भी गुणवत्ता के अनुसार नहीं हुआ. इसकी शिकायत जब कार्य के समय बीडीओ से की गई तो उनके द्वारा भी कोई ठोस पहल नहीं की गई। पंचायत प्रतिनिधियों की मानें तो पूरे प्रखंड क्षेत्र में नल-जल का काम गुणवत्तापूर्ण नहीं हुआ है. वार्ड सदस्य को मोहरा बनाया जा रहा है, जबकि प्राथमिकी अधिकारियों व संवेदकों पर होनी चाहिए. प्लास्टिक का पाइप व टोंटी का कहीं प्रावधान नहीं है. सर्विस पाइप से ले टंकी तक आईएसआई ब्रांड की होनी चाहिए, लेकिन इन सब नहीं रहते हुए भी अधिकारी गुणवततापूर्ण कार्य का प्रमाण दे उन्हें भुगतान करते रहे।


पहले भी गिर चुकी है पानी टंकी

इससे पहले भी उत्तरी छपरा बहास पंचायत के वार्ड 13 मेहवा और नगर पंचायत के वार्ड 18 के भोजमहरा टोला में पानी भरते ही टंकी गिरकर ध्वस्त हो गई थी. इसकी जांच अभी चल रही है. हकीकत है कि कई पंचायतों में कई वार्ड ऐसे हैं, जहां आज भी टंकी की जगह सीधे नल से पानी घरों में पहुंचाए जा रहे है. जितनी देर मोटर स्टार्ट रहता है। उतनी देर वाटर सप्लाई होती है, फिर ठप हो जाता है. ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण ही घटिया कराई गई है। पंचायत या वार्ड में जो निर्माण कार्य कराए जा रहे है, सबमें लूट मची है. पैसे बचाने के लिए संवेदक घटिया सामान खरीद कर लगा देते हैं, जो तीन से चार महीने में ध्वस्त हो जाता है. ऐसी घटनाएं पूर्व में भी कई वार्डो में हो चुकी है, लेकिन न कोई देखने वाला है और ना ही सुनने वाला. बस जांच का हवाला देकर मामले को दबा दिया जाता है. जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक मिले रहते है. ग्रामीणों की कोई कहां सुनने वाला। 

बीडीओ सरोज कुमार रजक ने बताया कि कार्य में गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा गया है तथा बिना मानक वाले सामग्री प्रयोग करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी. साथ ही योजना में आने वाले खर्च को भी उनसे वसूला जाएगा.

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