CM साहब...मुकदमा-छापा-जब्ती से देश-दुनिया में खुब हुई थी आपकी वाहवाही, उसी विशेष निगरानी इकाई को कर दिया गया खामोश

CM साहब...मुकदमा-छापा-जब्ती से देश-दुनिया में खुब हुई थी आपकी वाहवाही, उसी विशेष निगरानी इकाई को कर दिया गया खामोश

PATNA: बिहार में घूसखोरी से आम-अवाम त्रस्त है।सरकारी सिस्टम में नीचे से लेकर ऊपर तक करप्शन का बोलबाला है। सरकार दावे करती है कि भ्रष्टाचारियों पर प्रहार किया जा रहा। रिश्वतखोरों को गिरफ्तार करने के साथ-साथ उनकी संपत्ति जब्ती की कार्रवाई की जा रही। सुशासन की सरकार का यह दावा पूरी तरह से खोखला है। सरकार ने घूसखोर सरकारी सेवकों को पकड़ने,जांच करने या अकूत संपत्ति अर्जित करने वालों अधिकारियों-कर्मियों पर कार्रवाई के लिए दो खास यूनिट बनाया है। पहला निगरानी अन्वेषण ब्यूरो और दूसरा विशेष निगरानी इकाई। सुशासन की सरकार के दूसरे यूनिट के सुस्त होने से सवाल खड़े होने लगे हैं कि जब कोई कार्रवाई ही नहीं करनी है तो फिर मतलब क्या है? 

अफसरों के भ्रष्ट कारनामों की जांच के लिए हुआ था गठन 

नीतीश सरकार ने विशेष निगरानी इकाई की स्थापना बड़े घूसखोर अधिकारियों को पकड़ने, जो बड़े अधिकारी अवैध संपत्ति अर्जित कर रखे हैं उन पर एक्शन लेने के लिए बनाई थी। लेकिन विशेष निगरानी इकाई का अब कोई मतलब ही नहीं है। ऐसा इसलिए क्यों कि इस यूनिट ने काफी समय से कोई कार्रवाई ही नहीं की है। निगरानी विभाग की जो सूची है उसके अनुसार विशेष निगरानी यूनिट ने 2019 के बाद कोई केस दर्ज ही नहीं किया है। विशेष निगरानी इकाई ने वर्ष 2018 में दो बड़ी कार्रवाई की थी। एक आईएएस अधिकारी दीपक आनंद पर पर और एक आईपीएस अधिकारी विवेक कुमार पर।वहीं 2019 में एक केस दर्ज हुआ। 2019 में एसवीयू ने उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक संजय कुमार सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर छापेमारी की गई थी। 

2019 के बाद खामोश है यह यूनिट

2019 के बाद सुशासन की सरकार की यह यूनिट पूरी तरह से खामोश है। ऐसा नहीं कि बड़े अधिकारियों के खिलाफ शिकायत नहीं मिलती,या फिर बिहार में रामराज्य आ गया है...ऐसा बिल्कुल नहीं, फिर भी विशेष निगरानी इकाई ने 2 सालों में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की। निगरानी विभाग की तरफ से 31 दिसंबर 2020 तक के जो आंकड़े जारी किये गये हैं उसके अनुसार इस इकाई दो सालों से पूरी तरह से सोई हुई है। विशेष निगरानी इकाई ने 2018 में दो बड़ी कार्रवाई कर हलचल मचा दी थी। इसमें मुजफ्फरपुर के तत्कालीन एसएसपी विवेक कुमार के खिलाफ केस दर्ज कर छापेमारी शुरू की थी। विवेक कुमार वर्तमान में बीएमपी-1 के समादेष्टा हैं। इनके खिलाफ वर्तमान में भी अनुसंधान जारी है। वहीं दूसरी बड़ी कार्रवाई आईएएस अधिकारी और पंचायती राज विभाग के तत्कालीन निदेशक दीपक आनंद के खिलाफ केस दर्ज कर छापेमारी की थी। इनके खिलाफ भी जो केस दर्ज हुआ था उसका अनुसंधान जारी है। 

अब तक दर्ज किये 21 केस

अगर विशेष निगरानी इकाई द्वारा दिसंबर 2020 तक दर्ज केस की बात करें तो सबसे अधिक गृह विभाग के अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज की गई। गृह विभाग के  4 अधिकारियों के खिलाफ इस यूनिट ने कार्रवाई की है। वहीं लघु सिंचाई विभाग में 3,स्वास्थ्य विभाग- 1,पथ निर्माण विभाग- 2,राजभाषा विभाग- 1,पशुपालन विभाग- 1,निबंधन एवं उत्पाद विभाग-1,वाणिज्य कर विभाग- 2, सामान्य प्रशासन विभाग- 2, नगर विकास विभाग- 1,वन एवं पर्यावरण विभाग- 1, कृषि विभाग- 1,उद्योग विभाग के 1 पदाधिकारी शामिल हैं। 

तब सीएम नीतीश ने खूब वाहवाही लूटी थी

बता दें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पेशल विजिलेंस यूनिट की स्थापना की थी। इस यूनिट ने डीजीपी रैंक के अधिकारी और एक आईएएस अधिकारी पर एक्शन लेकर और उनका मकान जब्त करवाकर देश भर में वाहवाही लूटी थी। इस यूनिट की कार्रवाई के बाद पूर्व डीजीपी नारायण मिश्रा की एक करोड़ 44 लाख की अवैध संपत्ति जब्त कर ली गई और सरकार ने उस मकान में स्कूल खोल दिया था। तब सीएम नीतीश कहा करते थे कि चाहे कितने भी बड़े भ्रष्टाचारी हों उन पर कार्रवाई होगी और संपत्ति जब्त कर स्कूल खोले जायेंगे। लेकिन अब वही विशेष निगरानी इकाई सोई हुई है। बताया जाता है कि उसके पास काम करने वाले हाथों की बहुत कमी हो गई है। लगता है कि सरकार को अब स्पशेल विजिलेंस यूनिट से कोई मतलब नहीं रहा।  

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