नियोजित शिक्षकों के ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर शिक्षक संघ ने सरकार पर लगाए आरोप, कहा जानबूझकर प्रक्रिया को पेचीदा बनाया गया

नियोजित शिक्षकों के ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर शिक्षक संघ ने सरकार पर लगाए आरोप, कहा जानबूझकर प्रक्रिया को पेचीदा बनाया गया

CHHAPRA : नियोजित शिक्षकों के ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर सरकार व विभाग द्वारा अधिसूचना तो जारी कर दी गई, लेकिन यह केवल अधिसूचना भर ही रह गई। ट्रांसफर प्रक्रिया इससे एक कदम आगे भी नहीं बढ़ी है। नतीजतन इससे सबसे अधिक लाभान्वित होने वाले महिला और दिव्यांग शिक्षकों में मायूसी देखी जा रही है। सारण जिला परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार ने ट्रांसफर पोस्टिंग की प्रक्रिया को इतना ना जटिल बना दिया है कि इस प्रक्रिया को पूरा ही नहीं कराया जा सकता है। सरकार की मंशा इस मामले में भी ठीक नहीं दिख रही है। इधर विभागीय अधिकारियों की माने तो जारी की गई ट्रांसफर अधिसूचना पर आचार संहिता की मार पड़ गई है और अब यह मामला लटकता नजर आ रहा है। सबसे अधिक महिला व दिव्यांग शिक्षकों में नाराजगी है। उनके चेहरे पर अपने गृह जिला व प्रखंड में आने की प्रक्रिया से संबंधित मुस्कान मायूसी में बदल गई है। महिला शिक्षकों का कहना है कि उनकी कई सालों की मांगों पर सरकार ने पानी फेर दी है। सरकार को चाहिए था कि जितना जल्दी हो सके हमें गृह प्रखंड व गृह जिला में भेज दे। पर जो स्थिति अभी देखी जा रही है वह काफी निराशाजनक है।

यहां फस गई पेंच

दरअसल जैसे ही अधिसूचना जारी हुई विभिन्न शिक्षक संगठनों ने सरकार के ट्रांसफर पोस्टिंग नियमावली को लेकर सवाल खड़े कर दिए। शिक्षकों का कहना था कि नियमावली को इतना पेचीदा बना दिया गया है की प्रक्रिया पूरी ही नहीं हो सकती। सरकार को चाहिए था कि जहां-जहां महिला या दिव्यांग शिक्षकों की रिक्ति है वहां वहां उनके इच्छा अनुसार पोस्टिंग कर दी जाए। लेकिन नियमावली में जो बातें रखी गई है उसके अनुसार महिला व दिव्यांग शिक्षकों को सुविधा की जगह असुविधा अधिक हो जाती। इसी को लेकर सभी शिक्षक संघों ने सरकार के सामने अपनी मांगे रखी और नियमावली को सरल बनाने की मांग की। सरकार को भी इस मामले में पेंच फंसाने का मौका मिल गया और अब यह मामला पेंडिंग में पड़ गया है। इधर पंचायत चुनाव भी शुरू हो चुका है और इसे आचार संहिता के दायरे में ला दिया गया है। कुल मिलाकर ट्रांसफर पोस्टिंग का यह मामला फिलहाल कुछ महीनों के लिए फंसता दिख रहा है।

इन्हें मिलना था लाभ

अधिसूचना के अनुसार, ट्रांसफर का लाभ पहली कक्षा से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालय में काम कर रहे नियोजित शिक्षक, शिक्षिकाओं और पुस्तकालय अध्यक्ष को मिलना था। इसके अलावा जिन शिक्षकों ने तीन साल या उससे अधिक की नौकरी कर ली है, उन्हें भी ट्रांसफर का लाभ मिलना था। निलंबित शिक्षकों और अनुशासनात्मक कार्रवाई का दंश झेल रहे शिक्षकों को इसका लाभ नहीं मिलता। यानी उनके लिए यह निराशाजनक खबर थी।

यह भी थे निर्देश

यह भी स्पष्ट कर दिया गया था कि नियोजित शिक्षकों में जिनके प्रमाणपत्र सही था या किसी तरह की जांच में कोई खामी नहीं पाई गई थी।  उन्हें ही ट्रांसफर का लाभ मिलेगा। दरअसल, जिले में सैकड़ों की संख्या में ऐसे नियोजित शिक्षक हैं, जिनका फोल्डर गायब पाया गया है। ऐसे में उन्हें ट्रांसफर का लाभ नहीं मिलता। अभी निगरानी लगातार जांच कर रही है। हाईकोर्ट की भी इसपर निगाह टिकी है।

पूरी नौकरी में एक बार ट्रांसफर 

दिव्यांग महिला, पुरुष और पुस्तकालय अध्यक्ष को ट्रांसफर का लाभ मिलना तय था। शिक्षक और शिक्षिका को पूरी नौकरी में एक बार ही ट्रांसफर का लाभ मिलना था। पुरुष शिक्षकों के मामले में एक बार ही ट्रांसफर का लाभ मिलना था। लेकिन ये पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर था। ट्रांसफर के लिए शिक्षा विभाग को एक वेब पोर्टल तैयार करना था और इसके जरिए ट्रांसफर का रास्ता स्पष्ट होना था।

आधी आबादी के साथ मजाक

इस पूरे मामले में अपनी बेबाक राय रखते हुए परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष समरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा की सरकार ने नियोजित शिक्षकों के साथ मजाक किया है। सबसे अधिक मजाक उनका उड़ाया है जो हर तरह से असहाय हैं। इनमें दिव्यांग भी शामिल है। आधी आबादी यानी महिला शिक्षिकाओं का जमकर मजाक बनाया गया है। आखिर में ट्रांसफर पोस्टिंग की इतनी जटिल प्रक्रिया क्यों अपनाई गई। जब ट्रांसफर पोस्टिंग करना ही नहीं था तो फिर अधिसूचना क्यों जारी की गई। सरकार को यदि ट्रांसफर पोस्टिंग करना है तो अविलंब करें और महिलाओं और दिव्यांगों को उनके मन के अनुसार उनका स्थानांतरण करें।

छपरा से संजय भारद्वाज की रिपोर्ट

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