CM नीतीश के फेवरेट 'राजगीर' में कॉलेज घोटाला : एक ही जमीन, एक ही भवन, लेकिन दो अलग-अलग नाम से चल रहा है महाविद्यालय

CM नीतीश के फेवरेट 'राजगीर' में कॉलेज घोटाला : एक ही जमीन, एक ही भवन, लेकिन दो अलग-अलग नाम से चल रहा है महाविद्यालय

PATNA/NALANDA : बिहार में उच्च शिक्षा को लेकर किस तरह की धांधली चल रही है, इसका एक और खुलासा हुआ है। वह भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा के राजगीर में। वही राजगीर, जहां सीएम नीतीश कुमार सबसे ज्यादा योजनाएं चला रहे हैं। यहां शिक्षा माफियाओं ने पूरा कॉलेज का ही घोटाला कर दिया है। काबिलियत ऐसी कि यहां 42 साल से चल रहे कॉलेज को महज दो घंटे में बदलकर नए कॉलेज का नाम दे दिया गया। जबकि जगह भी वही थी, भवन भी वही था, लेकिन यहां दो अलग-अलग कॉलेज का संचालन किया जा रहा था।

इस तरह आई गड़बड़ी सामने

दरअसल, 1979 में स्थापित पूज्य तपस्वी श्री जगजीवन जी महाराज कॉलेज (पीटीजेएम कॉलेज) राजगीर में गुरुवार को पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी की तीन सदस्यीय टीम निरीक्षण के लिए पहुंची थी। लेकिन, टीम के आने से पहले ही आनन-फानन में कॉलेज के मुख्य द्वार सहित सभी वैसी जगहों को राजगीर कॉलेज नाम के बैनर से ढंक दिया गया जहां पीटीजेएम कॉलेज का नाम लिखा था। 

जांच के बाद फिर से लगा दिया बोर्ड

यहां तक कि कॉलेज के संस्थापक सचिव पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री स्व. सुरेन्द्र प्रसाद की प्रतिमा के नीचे लगे शिलापट्‌ट पर भी राजगीर कॉलेज का बैनर लगा दिया गया। यानी, कुछ घंटे पहले तक जिस भवन में पीटीजेएम कॉलेज का संचालन हो रहा था, उसे अब पूरी तरह राजगीर कॉलेज के रूप में तब्दील दिखा। हद तो तब हो गई, जब टीम निरीक्षण कर लौटी। टीम के लौटने के  तुरंत बाद ही राजगीर कॉलेज का बैनर सभी जगहों से हटा दिया गया। ऐसे जैसे राजगीर कॉलेज का कोई नामोनिशान ही नहीं हो।

यह सब काम इतनी सफाई से किया गया था कि जांच के लिए पहुंची टीम को आभास तक नहीं हुआ कि उन्हें राजगीर कॉलेज के नाम पर कुछ और दिखाया गया। पीटीजेएम कॉलेज के अध्यक्ष जनार्दन उपाध्याय हैं। उन्होंने ही टीम के सदस्यों का स्वागत राजगीर कॉलेज के सचिव के रूप में किया। कॉलेजकर्मियों ने बताया कि यहां 24 टीचिंग और 36 नन टीचिंग स्टाफ हैं। कर्मियों का परिचय भी राजगीर कॉलेज के नाम पर ही दिया गया। सचिव जनार्दन उपाध्याय से पीटीजेएम कॉलेज के भवन में राजगीर कॉलेज के बैनर लगाने और टीम  के जाने के बाद बैनर क्यों हटा लिया गया, इसका उनके पास कोई जवाब नहीं था।


दी सफाई - कुछ भी गलत नहीं है

 पीटीजेएम कॉलेज के अध्यक्ष एवं राजगीर कॉलेज के सचिव जनार्दन उपाध्याय ने कहा कि अब इसे राजगीर कॉलेज ही कहिये। जब पूछा गया कि यहां तो वर्षों से पीटीजेएम कॉलेज चल रहा है? इस पर उनका जवाब था-एक ही कैंपस में 2 कॉलेज चलते हैं।

राजगीर कॉलेज की मान्यता से पहले जांच के लिए पहुंची थी टीम

पाटलिपुत्र विवि की टीम में प्रो. अनिल कुमार, प्रो. ललन कुमार और डाॅ. संजीत दुबे शामिल थे। उन्होंने कहा कि वे लोग विवि की ओर से निरीक्षण करने के आये हैं। ताकि सत्र 2022-23 के लिए राजगीर कॉलेज को मान्यता मिल सके। विश्वविद्यालय की जांच टीम कॉलेज प्रबंधन के इस खेल से अनभिज्ञ दिखी। जब टीम के सदस्यों से पूछा गया कि यह 1979 में स्थापित पीटीजेएम कॉलेज है, क्या उन्हें मालूम नहीं हैं तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे राजगीर कॉलेज का निरीक्षण करने आए हैं।

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