बालू ढुलाई में मलाईः परिवहन विभाग के कई अधिकारी बच निकले पर लपेटे में आने का 'खौफ' कायम, इधर EOU की जांच हुई तेज

बालू ढुलाई में मलाईः परिवहन विभाग के कई अधिकारी बच निकले पर लपेटे में आने का 'खौफ' कायम, इधर EOU की जांच हुई तेज

PATNA: बालू के अवैध खनन में बड़े-बड़े अधिकारियों के शामिल होने की पोल खुल गई है। सीएम नीतीश के सख्त फऱमान के बाद इस आरोप में अब तक दो जिलों के एसपी, चार एसडीपीओ, एक एसडीओ,2 डीटीओ,3 एमवीआई समेत 41 अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। अब बालू से मलाई निकालने वाले अधिकारियों पर सरकार के आदेश पर ईओयू संपत्ति की जांच में जुटा है। सभी अधिकारियों के लिए अलग-अलग टीम गठित की गई है। ईओयू के पत्र पर पुलिस मुख्यालय ने अधिकारियों को आर्थिक अपराध इकाई में भेजा है ताकी जांच की गाड़ी तेजी से आगे बढ़ सके। 

SP-SDPO-DTO पर कार्रवाई,एमवीआई का 30 जून को हुआ ट्रांसफऱ

बालू माफियाओं से संलिप्तता के आरोप में ये कार्रवाई पटना,भोजपुर,औरंगाबाद,रोहतास व सारण के अधिकारियों पर की गई.औरंगाबाद के एसपी,एसडीपीओ,डीटीओ को एक साथ हटा दिया गया है। सभी पर बालू के अवैध खनन में संलिप्तता का आरोप है। हालांकि आर्थिक अपराध इकाई की जांच में कई ऐसे अधिकारी हैं जो बच निकलने में कामयाब हो गये। औरंगाबाद में एसपी-एसडीपीओ-डीटीओ पर कार्रवाई हुई लेकिन एमवीआई बच निकले। परिवहन विभाग ने उन्हें वहां से स्थानांतरित कर पूर्णिया में पदस्थापित किया है। पटना में एसडीपीओ-डीटीओ-एमवीआई पर कार्रवाई हुई एडीटीओ निकल लिये। हालांकि बच निकले अधिकारियों में अब भी खौफ कायम है। क्यों कि जांच सुक्ष्म तरीके से हुआ तो फंसने की संभावना है।    

पटना-औरंगाबाद के अफसर बच निकले  

औरंगाबाद की बात करें तो औरंगाबाद के एसपी सुधीर कुमार पोरिका को हटाया गया. वहीं औरंगाबाद सदर के एसडीपीओ अनुप कुमार को भी पुलिस मुख्यालय बुला लिया गया. जिले के डीटीओ अनिल कुमार सिन्हा जो रोहतास के भी प्रभार में थे उन्हें भी हटा दिया गया .वहीं रोहतास के अनुमंडल पदाधिकारी सुनील कुमार सिंह भी बालू के अवैध खनन के आरोप में नप गये. औरंगाबाद की बात करें तो जिले के एसपी,एसडीपीओ व डीटीओ नप गये। हालांकि बालू के अवैध परिवहन रोकने,जब्त या फाइन करने वाले अफसर यानी एमवीआई जांच की जद में आने से बच गये। 30 जून तक औरंगाबाद  के एमवीआई रहे उपेन्द्र राव को स्थानांतरित कर पूर्णिया भेजा गया है। उन्हें पूर्णिया के साथ -साथ मधेपुरा का भी चार्ज दिया गया। अगर भोजपुर की बात करें तो यहां एसपी-एसडीपीओ को हटा दिया गया। वहीं एमवीआई को बालू खनन में सस्पेंड कर दिया गया है। पटना जिले की बात करें तो पालीगंज अनुमंडल में बालू खनन में संलिप्तता के आरोप में वहां के एसडीपीओ को हटाया गया । वहीं जिला परिवहन पदाधिकारी और 2 एमवीआई को भी चलता कर दिया गया।

  डीटीओ-एमवीआई के बीच वाले अधिकारी (ADTO) बच निकले 

पटना जिले की बात करें तो बालू खनन में संलिप्तता के आरोप में डीटीओ और दो एमवीआई पर कार्रवाई की गई है। हालांकि इस कार्रवाई में एडीटीओ बच गये। पटना में डीटीओ,एडीटीओ,तीन एमवीआई और चलंत दस्ता के रूप में 5 परिवहन दारोगा तैनात हैं। आर्थिक अपराध इकाई की जांच के आधार पर डीटीओ पुरूषोत्तम, एमवीआई विवेक कुमार और पटना से गया में पदस्थापित किये गये मृत्युंजय कुमार सिंह को हटाया गया। हालांकि कम ही लोग जानते थे कि पटना जिले में एडीटीओ की भी तैनाती थी। विभागीय सूत्रों ने बताया कि पटना के एडीटीओ लाल ज्योतिनाथ शाहदेव भी महत्वपूर्ण जिम्मा संभाल रहे थे। उन पर भी बालू की अवैध ढुलाई करने वाले वाहनों पर नजर रखने की जिम्मेदारी थी। बालू के अवैध खनन में संलिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई की गुंज सुनाई देने से पहले ही पटना के एडीटीओ लाल ज्योतिनाथ शाहदेव को मुजफ्फरपुर का डीटीओ बना दिया गया। गृह विभाग ने 9 जुलाई को बालू खनन में संलिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर पत्र भेजा। इधर  परिवहन विभाग ने 12 जुलाई को पटना एडीटीओ को मुजफ्फरपुर डीटीओ के पद पर पदस्थापन के संबंध में आदेश जारी कर दिया। जैसे ही कार्रवाई की भनक लगी पटना के एडीटीओ ने आनन-फानन में 14 जुलाई को मुजफ्फरपुर डीटीओ का कार्यभार संभाल लिया.

एमवीआई का काम जानिए

जानकार बताते हैं कि मोटरयान निरीक्षकों का अवैध परिवहन रोकने की बड़ी जिम्मेदारी होती है। एमवीआई अवैध बालू खनन में लगी गाडियां या फिर ओवरलोडिंग गाड़ियों की जांच जिम्मा होता है। अगर किसी जिले में बालू का अवैध परिवहन हो रहा हो तो इसे रोकने की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में परिवहन के कुछ अधिकारियों के साफ बच निकलने को लेकर तरह-तरह की चर्चा शुरू है।  

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