अपराध की दुनिया छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए अपराधी, सरकार की वादाखिलाफी पर जताई नाराजगी

अपराध की दुनिया छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए अपराधी, सरकार की वादाखिलाफी पर जताई नाराजगी

SUPAUL : कई साल बीत जाने के बाद भी अपराध की दुनिया छोड़कर आत्मसमर्पण करनेवाले लोगों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के किये गये वादे की अनुसार लाभ नहीं मिला है। इससे नाराज होकर जिले के त्रिवेणीगंज क्षेत्र की आत्मसमर्पण करने लोगों ने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी गनपती ठाकुर को ज्ञापन देकर लाभ दिलाने की मांग की। आवेदन में उन्होंने कहा कि 2006 में त्रिवेणीगंज अनूप लाल यादव महाविद्यालय के प्रांगण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में 131 लोगों ने अपराध छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर हथियार के साथ आत्मसमर्पण किया था। इस दौरान सरकार की ओर से सभी आत्मसमर्पणकारियों को तीन हजार  पेंशन देने की घोषणा की गई थी। 

सभी लोगों को बैंक द्वारा लोन दिलाने की बात कही गयी। जिसमें जीवन की नई शुरुआत कर सकते हैं। लेकिन सरकार की वादाखिलाफी की वजह से आज तक पेंशन नहीं मिला। जबकि इसकी जानकारी सभी वरीय अधिकारी को दी गई है। उन्हें मुख्यधारा में लाने की वकालत करते हुए सरकार द्वारा लोन तो दिलाया गया। लेकिन ग़रीबी के कारण लोन नहीं चुकाने पर सभी मजबूर है। आत्मसमर्पण करनेवालों को लोन चुकाने हेतु सरकार के द्वारा कानूनी नोटिस भेज दिया जा रहा है। जिससे हम सभी लोग दु:खी है। इसके अलावे मुख्यमंत्री ने कहा था कि सभी समर्पण करने वाले लोगों के दो बच्चे को मैट्रिक तक की पढ़ाई सुनिश्चित की गई है। उनके पुनर्वास के लिए प्रोग्राम तय किया गया। 

एक एकड़ उपजाऊ जमीन, दो बैल ,एक पंप सेट, एक बोरिंग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन सरकार या उनके अधिकारी द्वारा अमलीजमा नहीं पहनाया गया, जो सरकार की नीयत को दर्शाता है। पुनर्वास होने तक तीन हजार पेंशन देने की बात आज तक पूरी नहीं हुई। गौरतलब है कि बिहार में बढते अपराध को रोकने के लिए बिहार के मुखिया नीतीश कुमार ने 2006 में एक अनखो पहल किया था। गरीब अपराधियों को जीवन वसर करने के लिए कई तरह का लाभ देकर बिहार को अपराध मुक्त बनाने फैसला किया था। बिहार के मुखिया नीतीश कुमार के बातों पर सभी अपराधियों ने अपराध का जीवन त्याग कर नया जीवन जीने लगे। लेकिन किये गये वादों से आज समर्पण करने वाले लोग वंचित हैं। 

सुपौल से पप्पू आलम की रिपोर्ट 

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