अद्भूत कारनामा, कागजों में मदरसा बनाकर लाभ कमा रहे बोर्ड के अधिकारी

अद्भूत कारनामा, कागजों में मदरसा बनाकर लाभ कमा रहे बोर्ड के अधिकारी

दरभंगा। ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के अध्यक्ष नजरे आलम ने शिक्षा विभाग की कार्य प्रणाली पर गंभीर आरोप लगाया है। नजरे आलम की मानें तो मदरसा शिक्षा बोर्ड और शिक्षा विभाग की मिलीभगत से कई मदरसों का एक ही ट्रस्टी है। जिसमें दरभंगा से लेकर मधुबनी तक में 16 मदरसा संचालित हैं, जिसमें 7 दरभंगा और 9 मधुबनी में संचालित हैं। नजरे आलम का आरोप है कि रिपोर्ट में जहां मदरसा का भवन दर्शाया गया है वहां मदरसा का अस्तित्व ही नहीं है। इन मदरसों के ट्रस्टी (सचिव) रेयाज ए सादिक खुद एक मदरसा में बतौर शिक्षक पदस्थापित हैं। 

उनका आरोप है कि सरकार भी कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का काम कर रही है। उन्होंने  एक ऐसे व्यक्ति को अध्यक्ष को कुर्सी बैठा दिया  है जो भ्रष्टाचार का सरदार है। वह खुद अपने परिवार से 10-15 लोगों को अनलीगल तौर से मदरसा बोर्ड में रखे हुआ है मदरसा बोर्ड के करोड़ों रुपए को गलत तरीके से निकासी करके अपने निजी कार्यों में इस्तेमाल कर रहा है। इसमें सरकार का सीधा -सीधा रोल है।

नौकरी दिलाने के नाम हुआ फर्जीवाड़ा

 वहीं अध्यक्ष के जरिए मुसलमानों का सीधा-सीधा शोषण किया जा रहा है मुस्लिम में पहले से ही बहुत बेरोजगारी है नौकरी के नाम पर बिचौलियों के माध्यम से सौकड़ों गरीब मौलवी अपना जेवर बंधक रखकर और जमीन गिरवी रख के नौकरी के नाम पर ऐसे दलालों को पैसा दिया। जिसकी नौकरी अभी तक नहीं मिली। इन लोगों के साथ सरकार ने भी छल किया है। हम मांग करते हैं कि सरकार इसकी निष्पक्ष तरीके से जांच करें और इसमें शामिल दलाल और मदरसा बोर्ड के चेयरमैन को भी जेल भेजे।

विवादों में रहा है मदरसा बोर्ड

मदरसा बोर्ड पर भ्रष्टाचार का यह आरोप इकलौता नहीं है। इससे पहले भी पूर्णिया के एक मौलवी ने मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष पर मनमानी का आरोप लगाया था। उनका आरोप था कि बोर्ड के अध्यक्ष ने बोर्ड के पैसों का फर्जी निकासी कराया और साथ ही अपने रिश्तेदारों को बोर्ड में नौकरी पर बहाल कर दिया।

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