दीनदयाल उपाध्याय का राजनैतिक दर्शन "सर्वे भवन्तु सुखिनः" की अवधारणा पर आधारित है : अरविन्द सिंह

दीनदयाल उपाध्याय का राजनैतिक दर्शन "सर्वे भवन्तु सुखिनः" की अवधारणा पर आधारित है : अरविन्द सिंह

PATNA : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अरविन्द कुमार सिंह ने कहा है कि अंत्योदय के प्रणेता, महान विचारक, त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति एवं हमारे प्रेरणा स्त्रोत पं.दीनदयाल उपाध्याय की आज 105 वी जयंती मनाई जा रही है। उन्होंने कहा था ' हमारी राष्ट्रीयता का आधार भारत माता हैं, केवल भारत नहीं। माता शब्द हटा दीजिये तो भारत केवल जमीन का टुकड़ा मात्र बनकर रह जायेगा। उन्होंने कहा की पंडित दीनदयाल उपाध्याय का राजनैतिक दर्शन, भारतीय जीवन पद्धति “सर्वभूत हित" की अवधारणा का लोकतांत्रिक जीवन में विस्तार का ही दर्शन है। आधुनिक पश्चिमी दर्शन विचारक बैंथम और मिल की विचारधारा, जो उपयोगितावाद (Utility Theory) की अवधारणा को बल देती है, इस अवधारणा ने दुनिया भर में इन मूल्यों का विस्तार किया कि शासन व्यवस्था को अधिकतम लोगों के अधिकतम हित के लिए उपयोग में लाना चाहिए। दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन का विस्तार इससे भी आगे है।  

उन्होंने कहा की पंडित दीनदयाल ने एकात्म मानव दर्शन में कहा है कि "हमें मनुष्य के साथ प्रकृति और उसके अस्तित्व के आधार को भी समाहित करते हुए कल्याणकारी कल्पना के साथ आगे बढ़कर मनुष्य का भला करना चाहिए"। इसलिए एकात्म मानव दर्शन की व्यापकता पार्यावरण द्वारा उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का उत्तर देने मे सक्षम है। दीनदयाल की राजनीति में नैतिक आचरण की कल्पना व्यक्तिगत हित के बजाय सामाजिक हित को प्राथमिकता देती है।

अरविन्द सिंह ने कहा है कि दीनदयाल उपाध्याय  का राष्ट्र धर्म हमारे सामूहिक मन की अवधारणा को विस्तार देता है, जो कि नागरिक धर्म के प्रति भी सचेत करता है।दुनियां की विभिन्न विचारधाराओं में धर्म आधारित नैतिकता सिर्फ हमारे बाहरी जीवन को ही संयमित करती है, परन्तु दीनदयाल की विचारधारा उस परम्परा में और भी आगे बढती है जहां हम बाहरी जीवन के आवरण से ऊपर उठ कर विश्व की व्यापकता के भाव के साथ जुड़ते हैं।


सिंह ने कहा है कि दीनदयाल उपाध्याय का राजनैतिक दर्शन "सर्वे भवन्तु सुखिनः" की अवधारणा पर आधारित गरीबों को- न्याय / समतामूलक समाज / सत्ता का विकेंद्रीकरण / सामूहिक कल्याण / नैतिक मूल्यों पर आधारित शासन पद्धति / पर्यावरण संतुलन एवं संपूर्ण जगत से एकात्म अनुभूति का दर्शन है। आज जब देश की जनता ने भाजपा को देश सेवा का एक अवसर दिया है तो हम सब प्रण करें कि दीनदयाल के विचारों से प्रेरणा लेकर हम सबके कल्याण के कार्यक्रमों को आगे बढाएंगे।

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