राम मंदिर भूमि पूजन के दिन इस शिव मंदिर में मनाई जायेगी दीपावली, शाम में जलाये जायेंगे 11 सौ दिए, जानिए क्यों.....

राम मंदिर भूमि पूजन के दिन इस शिव मंदिर में मनाई जायेगी दीपावली, शाम में जलाये जायेंगे 11 सौ दिए, जानिए क्यों.....

News4nation desk : पांच अगस्त बुधवार को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन करेंगे. वहीं इस दिन यूपी के एक मंदिर में शाम में दीवाली मानयी जायेगी। इस मंदिर में शाम को 11 सौ दिये जलाए जायेंगे। इसे लेकर अभी से तैयारी शुरु कर दी गई है। 

दरअसल, यूपी के सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज ब्लॉक में एक शिव मंदिर है. जिसेभारतभारी शिव मंदिर के नाम से जाना जाताहै. भारतभारी शिव मंदिर की जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर की दूरीहै. इसका एक ऐतिहासिक व पौराणिकमहत्व भी है. यही वजह है कि यहां की मिट्टी अयोध्या में राम जन्मभूमि के भूमि पूजन के लिए पहले ही जा चुकी है. कहा जाता है कि भगवान राम के भाई भरत ने इस प्रसिद्ध प्राचीन शिव मंदिर की स्थापनाकराई थी.

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर पांच अगस्त को होने जा रही भूमि पूजन के अवसर पर ग्रामीणों ने इस मंदिर में दीपावली मनाने का निर्णय लिया है. इसके लिए गांव वालों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है. पूरे मंदिर को सजाया जा रहा है. गांव वालों के बीच काफी उत्साह और उमंग देखने को मिल रहा है.

एक मान्यता है कि राम- रावण युद्ध में रावण की जब मृत्यु हो गई तब भगवान राम पर ब्रह्महत्या का आरोप लगा था. ऐसे मे वापस लौटने पर अयोध्या वासियों ने उनके हाथ से अन्य ग्रहण करने से इंकार कर दिया था. इसका निराकरण न होने से कोई भी पुरोहित यज्ञ कराने को तैयार नहीं हो रहा था. तब गुरु वशिष्ठ ने कन्नौज से दो नाबालिग बालकों को अयोध्या लेकर आए उनका जन्म कराकर यज्ञ कार्य पूर्ण कराया. और तब उनका ब्रह्महत्या का दोष दूर हुआ था.  

दोनों ब्रह्मणों के घर वापस लौटने पर उनके परिजनों ने उन्हें त्याग दिया और वे पुन गुरु वशिष्ठ से मिले. तब मुनि वशिष्ठ जी से आज्ञा लेकर राम ने एक‌‌ बाण चलाया और कहा कि जहां यह बाण गिरेगा उसी जगह को आप लोग अपना निवास स्थान बना लीजिए. उनके द्वारा छोड़ा गया तीर भारतभारी में आकर गिरा जिसकी वजह से विशाल जलाशय का निर्माण हुआ जो आज भी मौजूद है.

वहीं भारतभारी तीनों युगों की साक्षी नगरी के रूप में विख्यात है. माना जाता है कि त्रेता युग में राम के भाई भरत ने यहां तपस्या की थी. उन्होंने ने ही यहां पर पवित्र सरोवरऔर  शिव मंदिर का निर्माण कराया था. भरत को त्याग की प्रतिमूर्ति और भारतभारी को त्याग की भूमि की संज्ञा दी गई है. 

दोनों स्थलों की पवित्र मिट्टी रामलला के भव्य मंदिरके  निर्माण में प्रयुक्त होगी. कहानियों में कहा जाता है किलंका में युद्ध के दौरान जब लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे तो हनुमान जी संजीवनी बूटी भारतभारी सेही हो कर ले जा रहे थे. ऐसे में भरत ने श्रीराम का शत्रु समझकर उन्हें तीर मार दिया था. इससे हनुमान जी वहीं ‌पर पर्वत लेकर गिर पड़े थे. ऐसे में वहां पर आज विशाल गड्ढा हो गयाजो आज भी पवित्र सरोवर के रूप में मौजूद है.


 
 
 
 

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