देश का दूसरी बड़ी कोसी-मेची नदी जोड़ योजना बिहार में, चार जिलों में सिंचाई की व्यवस्था

देश का दूसरी बड़ी कोसी-मेची नदी जोड़ योजना बिहार में, चार जिलों में सिंचाई की व्यवस्था

PATNA. बिहार की पहली और देश की दूसरी सबसे बड़ी कोसी-मेची नदी जोड़ योजना पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने मोहर लगा दी है। इस बात की जानकारी जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने कल विधान परिषद में दी। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने इसकी निवेश के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। साथ ही योजना के सभी अवयवों को उपयुक्त माना है। अब राज्य सरकार की कोशिश है कि केंद्र इसे राष्ट्रीय योजना घोषित करे। ऐसा होने से ₹4900 करोड़ की इस योजना का 90% खर्च केंद्र सरकार उठाएगी बाकी 10%  राज्य सरकार को वहन करना होगा।

देश की दूसरी योजना

योजना को लेकर जल संसाधन मंत्री ने बताया कि कोसी मेची नदी जोड़ योजना देश की दूसरी सबसे बड़ी योजना है पहली मध्य प्रदेश की केनबेतवा नदी जोड़ योजना है उन्होंने कहा कि केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से कोसी-मेची जोड़ योजना को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। जल संसाधन मंत्री ने बताया कि कोसी मोची योजना से राज्य में 214882 हेक्टेयर में सिंचाई की व्यवस्था हो सकेगी।

महानंदा नदी में जाएगा कोसी का पानी

 योजना में 76.20 किलोमीटर लंबी नहर बनाकर कोसी के अतिरिक्त पानी को महानंदा बेसिन में लाया जाएगा ।मौजूदा आकलन के अनुसार इस पर ₹4900 खर्च होने का अनुमान है, जिससे 4 जिलों को लाभ होगा। सबसे अधिक लाभ अररिया और पूर्णिया जिले को होगा। इन दोनों जिलों में क्रमशः 59642 और 59970 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी। इसके अलावा किशनगंज जिले में 39548 और कटिहार जिले में 35635 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी इससे बाढ़ से होने वाली परेशानी से भी मुक्ति मिलेगी

सीएम का विजन

जल संसाधन मंत्री ने बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विजन है। उन्होंने कहा कि 200000 हेक्टेयर तक के सिंचाई की योजना राष्ट्रीय योजना होती है। इसी आधार पर केंद्र ने केन बेतवा को राष्ट्रीय योजना घोषित किया है।

49 साल बाद मिली मंजूरी

डेढ़ साल में पूरी होगी 49 साल से लंबित परियोजना जल संसाधन मंत्री ने बताया कि पश्चिमी को सीमा की डीपीआर 1962 में ही बनी थी। वर्ष 1972 में इस पर काम शुरू हुआ लेकिन वह जमीन पर नहीं उतर सकी। अब 49 साल का समय गुजर चुका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कोशिश है कि अगले साल में इस काम को पूरा कर लिया जाए। इस दौरान उन्होंने विधान पार्षद प्रेमचंद्र द्वारा गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के मुख्यालय को पटना से लखनऊ से शिफ्ट किया जाने पर भी जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इसका कोई प्रस्ताव केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पास नहीं है।

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