दो बच्चों वाले कैंडीडेट ही लड़ पाएंगे पंचायत चुनाव, सरकार ले सकती है बड़ा फैसला, ऐसा हुआ तो कई दावेदार होंगे बाहर

दो बच्चों वाले कैंडीडेट ही लड़ पाएंगे पंचायत चुनाव, सरकार ले सकती है बड़ा फैसला, ऐसा हुआ तो कई दावेदार होंगे बाहर

DESK: भले हीं अभी तक पंचायत चुनाव की घोषणा न हुई और न ही दो बच्चों से अधिक पर चुनाव लड़ने से वंचित कानून आया हो लेकिन जनप्रतिनिधियों की धुक-धुकी बढ़ गई है. कारण, कई वर्तमान प्रधान, बीडीसी व डीडीसी और संभावित प्रत्याशी निर्वाचन की रेस से पहले ही बाहर हो जाएंगे.

दरअसल कोरोना संक्रमण की वजह से पंचायत चुनाव में देरी हो गई है और अभी भी इसका औपचारिक एलान नहीं हुआ है. हालांकि निर्वाचन विभाग का दावा है कि तैयारी में देर नहीं लगेगी. सिर्फ वोटर सूची का पुनरीक्षण अभियान ही चलेगा. 

वहीं दूसरी ओर इन दिनों दो बच्चों से अधिक पर प्रत्याशियों के पंचायत चुनाव न लड़ने की बात कही जा रही है. इसको लेकर संभावित प्रत्याशी, मौजूद प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्यों की धड़कने तेज हो गई हैं. अभी मसौदा तैयार होने की बात कही जा रही, विधेयक या कानून नहीं बना है.


चुनाव से पहले टू-चाइल्ड पॉलिसी पर भी बहस छिड़ गई. विशेषज्ञों की मानें तो ये आसान नहीं होगा. इसमें बड़े पेंच हैं. कैबिनेट प्रस्ताव लाना होगा.फिर संसद से प्रस्ताव पास करना होगा. पंचायतीराज एक्ट में संशोधन कराना होगा. यह एक लंबी प्रक्रिया है. ऐसे में इस बार पंचायत चुनाव में समय कम बचा है इसलिए ये सब हो पाना थोड़ा मुश्किल नजर आ रहा है.

गौरतलब है कि केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री संजीव बालियान ने 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा था. उन्होंने  मांग की थी कि यूपी के आगामी पंचायत चुनाव में उन्हीं को चुनाव लड़ने का अधिकार मिलना चाहिए, जिनको दो से ज्यादा बच्चे नहीं है. मंत्री ने उत्तराखंड सरकार द्वारा लिए गए फैसले का हवाला दिया था.


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