पहल की ओर से डेंगू को लेकर जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन, डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने बीमारी से बचाव की दी जानकारी

पहल की ओर से डेंगू को लेकर जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन, डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने बीमारी से बचाव की दी जानकारी

PATNA : पटना के डॉ0 दिवाकर तेजस्वी क्लिनिक में डेंगू जागरूकता कार्यक्रम आयोजन किया गया। इस अवसर ‘‘पहल’’ के चिकित्सा निदेशक एवं वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने लोगों को डेंगू के प्रति जागरूक करते हुए बताया की सजगता बरत कर इस रोग से बचाव संभव है। डॉ0 तेजस्वी ने बताया कि एडीज मच्छर प्रायः दिन में ही काटते है। ये कंटेनरो में पड़े साफ पानी यथा कूलर, इनडोर एवं आउटडोर गमला, टूटे एवं पड़े हुए बाल्टी , टंकी , हौज इत्यादी में तेजी से पनपते है। 


रोग के लक्षणों की चर्चा करते हुए डॉ0 तेजस्वी ने बताया कि इस बीमारी में ठण्ड के साथ तेज बुखार आता है, हड्डियों, जोडों एवं मांशपेसियों में तेज दर्द होना (ब्रेक बोन फीवर) शरीर पर लाल चकते पड़ना, आखों के पीछे वाले भाग में दर्द होना, भूख का कम लगना , पेट में दर्द होना ,मिचली होना एवं गंभीर बीमारी में काला पैखाना होना, नाक या मसूड़ो से रक्त का बहना, लाल पेषाब होना इत्यादी शामिल है। इसके उपचार के लिए रोगी के शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए तथा इलेक्ट्रोलाईट बैलेंस बनाकर रखना चाहिए। सामान्य डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स की कमी होती है। लेकिन यह एक हफ्ते से दस दिन में पुनः सामान्य संख्या में हो जाता है। सामान्यतः एक स्वस्थ्य व्यक्ति में प्लेटलेट्स की सख्ंया डेढ़ लाख प्रति क्यूबीक मिली से उपर रहती हैं। लेकिन गंभीर डेंगू हिमेरैजिक फीवर में इसकी संख्या में लगातार गिरावट होती है , एवं सामान्यतः 30 हजार से कम की संख्या होने पर प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता पड़ सकती है। 

डॉ. तेजस्वी ने बताया कि प्लेटलेट को ब्लड बैंकों में  मात्र 4 दिनों तक ही रखा जा सकता है। जबकि प्लाजमा को 1 साल एवं ब्लड को 35 दिनों तक ब्लड बैंक में रखा जा सकता है। ब्लड बैंकों में प्लेटलेट की कमी को दूर करने के लिए उन्होंने युवाओं से रक्तदान की अपील की। जिससे की डेंगु के रोगियों को प्लेटलेट्स उपलब्ध हो पाए। 

इसके रोक-थाम के बारे में डॉ. तेजस्वी ने बताया कि ड्रम, कंटेनर , गमले, कुलर आदि का पानी सप्ताह में कम से कम एक बार बदले , एवं ऐसे वस्त्र पहने जिससे की पूरा शरीर ढका रहे। मच्छरों को खत्म करने एवं इन्हें दूर भगाने के लिए डी.डी.टी स्प्रे , क्वाईल , मच्छर भगाने वाली टिकिया, मच्छर भगाने वाले मलहम, मच्छरदानी इत्यादि का प्रयोग आवश्यक है। डेंगू फीवर होने से घबराने की आवश्यकता नहीं है। डेंगू फीवर से संक्रमित मात्र 5 प्रतिशत के लगभग रोगीयों को डेंगू हिमोरैजिक फीवर होने की संभावना होती है, जो गंभीर हो सकता हैं। लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में हुई प्रगति के कारण इस रोग पर काबू पाया जा सकता है।

पटना से वंदना शर्मा की रिपोर्ट 

Find Us on Facebook

Trending News