एक दशक बाद भी नदियों को जोड़ने की योजना पर शुरू नहीं हुआ काम, नाराज नेता प्रतिपक्ष ने सीएम को पत्र लिखकर लेटलतीफी पर जताई चिंता

एक दशक बाद भी नदियों को जोड़ने की योजना पर शुरू नहीं हुआ काम, नाराज नेता प्रतिपक्ष ने सीएम को पत्र लिखकर लेटलतीफी पर जताई चिंता

PATNA : पिछले कुछ दिनों से जातिगत जनगणना और विशेष राज्य के मुद्दे पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर लगातार हमलावर रहे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार में नदियों को जोड़ने की योजना का मुद्दा उठाया है। तेजस्वी यादव ने कहा है कि बिहार में 2011 में रिवर लिंकिग प्रोजेक्ट की घोषणा हुई थी, लेकिन एक दशक का समय गुजरने के बाद भी इस पर कोई काम नहीं हुआ है। जिसका नतीजा यह है कि बिहार की आधी आबादी हर साल बाढ़ की समस्या से जूझ रही है. इस संबंध में तेजस्वी ने सीएम को चिट्ठी लिखी है। जिसमें उन्होंने नदियों को जोड़ने की योजना को राष्ट्रीय योजना घोषित करने की मांग की है।


सीएम नीतीश कुमार को लिखे गए दो पन्नों के लेटर में रिवर लिंकिंग प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए तेजस्वी ने लिखा कि इसमें बागमती-बूढ़ी गंडक लिंक, बूढ़ी गंडक वाया गंगा लिंक, कोसी-बागमती-गंग लिंक आदि नदियों को जोड़ने की योजना थी। लेकिन एक दशक में केंद्र ने सिर्फ कोसी मेची नदी को अपनी मंजूरी प्रदान की है। दुर्भाग्य यह है कि 2019 में इसकी मंजूरी मिलने के बाद भी इस पर कोई कार्य शुरू नहीं हो सका है। बिहार की समस्या को लेकर केंद्र और राज्य सरकार सिर्फ घोषणाएं कर रही हैं। ठोस समाधान की पहल नहीं की जा रही है।

सूबे के 20 जिले बाढ़ से प्रभावित 

तेजस्वी ने लेटर में लिखा है कि बिहार में शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, खगड़िया, सारण, समस्तीपुर, सीवान, मधुबनी, मधेपुरा, सहरसा, कटिहार, भागलपुर, पटना व वैशाली जिले ऐसे हैं, जो हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं। तेजस्वी ने लिखा है कि   कोशी, बागमती, गंडक, बूढ़ी गंडक, कमला बलान, घाघरा, महानंदा आदि सभा बारहमासी नदियां हैं। बरसात के मौसम में इन नदियों के कैचमेंट एरिया में पानी के बहाव तेज हो जाती है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि बिहार एक ऐसा राज्य है, जहां हर साल बाढ़-सुखाड़ के कारण करोड़ों की जिंदगी प्रभावित होती है। 

योजना के गिनाए फायदे

तेजस्वी ने लिखा है कि इस प्रोजेक्ट से बाढ़ नियंत्रण, पेयजल की उपलब्धता, सिंचाई, पनबिजली उत्पादन सहित राज्य की आंतरिक हिस्सों में जलमार्ग के लिए विकसित करने में सहायता मिलेगी। 

39 सांसदों ने बिहार के लिए कुछ नहीं किया। 

इस दौरान तेजस्वी ने बिहार के 39 सांसदों पर भी सवाल उठा दिए। उन्होंने लिखा कि सरकार के इन सांसदों के होने के बाद भी न तो बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिला और न ही कोई विशेष पैकेज दिया गया है। यहां तक कि नदियों को जोड़ने की योजना में सिर्फ एक प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाई जा सकी।

राष्ट्रीय योजना किया जाए घोषित

तेजस्वी ने सीएम से मांग की है नदियों को जोड़ने, बांधों एवं नहरों को बनाने की उपर्युक्त सभी योजनाओं को केंद्र सरकार से राष्ट्रीय योजना घोषित कराने कराएं। इस संबंध में सीएम से सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल बनाकर पीएम से मिलने की मांग की है। 



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