मशहूर अभिनेता और कामयाब नेता थे विवोद खन्ना

मशहूर अभिनेता और कामयाब नेता थे विवोद खन्ना


विनोद खन्ना का जीवन राग और विराग का संगम था। एक अभिनेता के रूप में उन्होंने दौलत और शोहरत बटोरी थी। लेकिन कुछ समय बाद उनका मोह-माया से मन उब गया और वे आचार्य रजनीश के अनुयायी बन गये। जब यहां भी मन नहीं रमा तो फिर वे अभिनय की दुनिया में दाखिल हो गये। उन्हें सिनेमा में बेहतरीन योगदान के लिए दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित गया था। सिनेमा का ये सर्वोच्च सम्मान उन्हें मरणोपरांत मिला।  

एक समय अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना की जोड़ी हिट की गारंटी थी। हेराफेरी, खून-पसीना, परवरिश और मुकद्दर का सिकंदर उनकी सुपरहिट फिल्में थीं।

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विनोद खन्ना ने बॉलीवुड की कई फिल्मों में बेहतरीन अभिनय किया। इनमें मेरे अपने, इंसाफ, परवरिश, मुकद्दर का सिकंदर, कुर्बानी, दयावान, मेरा गांव मेरा देश, चांदनी, द बर्निंग ट्रेन और अमर अकबर एंथोनी जैसी फिल्में शामिल हैं। विनोद खन्ना ने अपने करियर में कई तरह के रोल किए। उन्होंने नकारात्मक और चरित्र भूमिकाएं भी कीं। राजनीति में आने के बाद भी वो फिल्मों में अभिनय करते रहे थे।

पिछले साल 27 अप्रैल को बीमारी के बाद मुंबई में विनोद खन्ना का निधन हो गया था। उस वक्त वो पंजाब के गुरुदासपुर लोकसभा सीट से बीजेपी के सांसद थे। विनोद खन्ना पूर्व में अटल बिहारी वाजपेयी की राजग सरकार में बीजेपी के कोटे से केंद्रीय मंत्री भी बने थे। तब उनके काम को काफी सराहा गया था। निधन के वक्त उनकी उम्र 70 वर्ष थी।

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भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद विनोद खन्ना का परिवार मुंबई आ गया था। मुंबई और दिल्ली में स्कूली पढ़ाई के बाद कॉलेज के दिनों के दौरान विनोद इंजीनियर बनना चाहते थे। पिता ने उनका एडमिशन कॉमर्स कॉलेज में भी करा दिया था, लेकिन विनोद का पढ़ाई में मन नहीं लगा। विनोद के अनुसार, कॉलेज लाइफ में उनकी कई गर्लफ्रेंड्स थीं। यहीं उनकी मुलाकात गीतांजलि से हुई। गीतांजलि विनोद की पहली पत्नी थीं। कॉलेज से ही उनकी लव-स्टोरी शुरू हुई थी।

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