नीतीश की नीतियों के कारण उत्पन्न हुआ खाद संकट, भाजपा का आरोप- माफिया पर नकेल ना कसने से परेशान हैं किसान

नीतीश की नीतियों के कारण उत्पन्न हुआ खाद संकट, भाजपा का आरोप- माफिया पर नकेल ना कसने से परेशान हैं किसान

पटना. बिहार के किसानों को खाद की हुई किल्लत के लिए केंद्र सरकार पर आरोप मढ़ने को बिहार सरकार के बयानों पर पूर्व कृषि मंत्री बिहार अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने बुधवार को वर्तमान कृषि मंत्री के बयान की केंद्र से कम खाद मिल रहा है पर आपत्ति जताते हुए कहा कि केंद्र पर दोष देना आसान काम है. हमलोगों ने जीरो टॉलरेंस नीति का पालन किया है, जितनी कीमत तय है उसको डिस्प्ले करे और उतनी कीमत पर बेचने का आदेश दिया. 

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में कुछ परेशानी हुई थी. खाद की कमी का सामना करना पड़ा था। हमलोगों ने किसानों की परेशानी को ध्यान रखा और उसे दूर किया। खरीफ के समय हमलोगों ने केंद्र सरकार के साथ बैठक की और आपूर्ति को सुनिश्चित कराया. इसके बाद भी मौजूदा नीतीश सरकार के मंत्री केंद्र सरकार पर कम आपूर्ति का दोष दे रहे हैं. 

उन्होंने कहा कि राज्य को तय खपत का 87 प्रतिशत खाद उपलब्ध है. उसके बाद भी हाहाकार मचा है. ये स्थिति क्यों पैदा हुई है ये कृषि मंत्री बताये. उन्होंने कहा कि एक ओर धान की रोपनी 40 प्रतिशत की हुई है तो फिर खाद की किल्लत क्यों हुई? 


मौजूदा सरकार पर कथित आरोप लगाते हुए कहा कि हमलोगों ने माफिया पर नकेल कसा था,लेकिन आज माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं. इसी कारण आज खाद की समस्या हो गई है. किसान परेशान हैं. बिहार में अभी तक 7 लाख 70 हजार मीट्रिक टन आवश्यकता है. पूरी खेती हो तब 30 अगस्त तक 6 लाख 71525 हजार  मीट्रिक टन की आपूर्ति हुई है. उन्होंने सवाल किया कि जिला कृषि अधिकारी क्या कर रहे हैं. माफिया पर नकेल क्यों नही कसा गया है. केंद्र सरकार आवश्यकता से अधिक दे रही है लेकिन खाद कहां जा रहा है इस पर सरकार को जवाब देना चाहिए. 


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