निजीकरण के विरोध में देश में शुरू हुई सबसे बड़ी बैंक हड़ताल

निजीकरण के विरोध में देश में शुरू हुई सबसे बड़ी बैंक हड़ताल

पटना. बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध गुरुवार को सार्वजनिक क्षेत्र के करीब 9 लाख बैंककर्मी देशव्यापी हड़ताल पर चले गए. दो दिनों की यह हड़ताल शुक्रवार तक चलेगी. वहीं रविवार को साप्ताहिक छुट्टी होने के कारण अगले चार में से तीन दिन बैंकों में कोई कामकाज नहीं होगा. 

सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण के सरकार के कदम के विरोध में बैंकों के संगठनों की ओर से हड़ताल किया गया है. बैंक संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार जिस तरह से बैंकों को निजी हाथों में सौंपने जा रही है वह देश के भविष्य के लिए ठीक नहीं है. यह पूरी तरह से देश की वित्तीय व्यवस्था को निजी हाथों में देने जैसा होगा. इससे देश की बनी बनाई बैंकिंग प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी और भविष्य में निजी बैंक अपनी मनमानी करेंगे. अंततः यह ग्राहकों और देश के लिए दीर्घकालिक नुकसान साबित होगा. 

इसके पूर्व अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (एआईबीओसी) की महासचिव सौम्या दत्ता ने कहा कि बुधवार को अतिरिक्त मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष सुलह बैठक हुई लेकिन बैठक बेनतीजा रही. इसी कारण अब बैंक कर्मी पूर्व घोषणा के अनुसार 16 और 17 दिसम्बर को हड़ताल पर हैं. इस बीच पटना सहित कई अन्य जगहों पर हड़ताली बैंककर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया. 

वहीं बैंक हड़ताल का असर आम लोगों के लेनदेन को प्रभावित कर रहा है. गुरुवार को बड़ी संख्या में ऐसे लोग दिखे जो बैंक बंद होने के कारण बैंकों के बाहर परेशान दिखे. वहीं बैंक हड़ताल के कारण दूर दराज के इलाकों में एटीएम में पैसे की कमी भी देखी जा रही है. संभव है कि अगले 24 घंटे के बाद शहरी क्षेत्रों में एटीएम में पैसे की कमी दिखे. 

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