बिहार में बाढ़ः मां गंगा के रौद्र रूप से सहमे ग्रामीण, पूजापाठ के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश, जलस्तर कम करने की लगाई गुहार

बिहार में बाढ़ः मां गंगा के रौद्र रूप से सहमे ग्रामीण, पूजापाठ के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश, जलस्तर कम करने की लगाई गुहार

KATIHAR: तीन जिलों से घिरे कटिहार में हर साल ग्रामीणों और निचले इलाकों में बसे लोगों को बाढ़ का दंश झेलना पड़ता है। इस बार यह स्थिति ज्यादा गंभीर है, क्योंकि गंगा सहित अन्य नदियां खतरे के निशान को पार कर कई पंचायतों और प्रखंडों को अपनी जद में ले चुकी हैं। इस साल तो कई क्षेत्रों में जून के महीने में ही बाढ़ आ गई थी। अब अगस्त का महीना खत्म होने को है, मगर लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

इसी बीच तस्वीरें आई हैं कटिहार जिले के ग्रामीण इलाकों से, जहां महिलाएं गंगा किनारे खड़ी होकर पूजा-अर्चना करती नजर आ रही हैं। यह कोई सामान्य पूजा नहीं है, बल्कि मां गंगा के रौद्र रूप को शांत करने की गुहार है, जिसे महिलाएं लगा रही हैं और मां गंगा को मनाने की कोशिशें कर रही हैं। बता दें, कटिहार में कई साल बाद गंगा ने अपना रौद्र रूप दिखाया है। इस कारण बरारी, कुर्सेला और मनिहारी का एक बड़ा हिस्सा अब भी जलमग्न है। हालांकि राहत की बात यह है कि अब पानी का स्तर घटने लगा है। जिससे जिंदगी कुछ हद तक आसान होने लगी है।

गंगा एक बार फिर अपना रौद्र रूप न दिखाए, इसलिए सरकारी व्यवस्था से दूर लोग, खासकर ग्रामीण महिलाए मां गंगा को मनाने में जुटी हुई है। बावजूद महिलाएं गीत गाकर औऱ पूजा कर मां गंगा को मनाने में जुटी हुई है। बड़ी बात यह है कि मनिहारी दियारा क्षेत्र में रहने वाली इन महिलाओं को इतने परेशानी के बावजूद मां गंगा से कोई शिकायत नहीं है। वह लोग कहते हैं कि जब मां ने कष्ट दिया है तो वहीं कष्ट हरण करेंगी। बस इसी भरोसे के साथ मां गंगा को मनाने में ग्रामीण महिलाएं जुटी हुई हैं।

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