हाल-ए-कैमूर : महामारी से दूसरे फेज में चार हजार से अधिक मरीज, 70 से अधिक मौतें, बावजूद तीसरे लहर से निपटने की कोई तैयारी नहीं

हाल-ए-कैमूर : महामारी से दूसरे फेज में चार हजार से अधिक मरीज, 70 से अधिक मौतें, बावजूद तीसरे लहर से निपटने की कोई तैयारी नहीं

KAIMUR : वैश्विक महामारी कोरोना ने चारों तरफ कहर बरपा रखा है । कैमूर जिले में भी कोरोना के पहली लहर के बाद आई दूसरी लहर में सतर से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। दूसरी लहर में बेड की किल्लत और ऑक्सीजन की कमी को लेकर लगातार लोग जूझते दिखे। जिले में अब तक 4280 लोग कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं उसके बावजूद स्वास्थ्य महकमा तीसरी लहर को लेकर चुप्पी साधे हुए है। जिला स्वास्थ्य महकमा महामारी को लेकर अब भी लापरवाह रवैया अपनाए हुए है। अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि अस्पतालों में न तो बेड की संख्या बढ़ाने की कोई तैयारी है और न ही ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर किसी प्रकार की गंभीरता नजर आ रही है। 

बात अगर यहां होनेवाली मौतों की करें तो  पहली लहर में आंकड़ा दहाई भी नहीं छू पाया था लेकिन दूसरी लहर 70 से अधिक लोगों को मौत के चपेट में ढकेल चुका है । इससे बचाने के लिए जिला प्रशासन लगातार टीकाकरण पर जोर दे रहा है लेकिन तीसरी लहर में बच्चों की आशंका जताया जा रहा है। अगर यही सुस्ती स्वास्थ्य विभाग का रहा तो तीसरी लहर भयावह हो सकती है। बच्चों के ऊपर आने वाले तीसरी लहर से लड़ने के लिए जिले में ना तो वेंटिलेटर युक्त बेड है , और ना ही वेंटिलेटर एंबुलेंस की व्यवस्था है कि विशेष परिस्थिति में उसको हायर सेंटर में पहुंचाया जा सके। जिले में एक एसएनसीयू बनकर तो तैयार है लेकिन इसमें सिर्फ 28 दिन तक के बच्चों का ही इलाज की व्यवस्था है।

टीकाकरण केंद्रों में भी मनमानी

 बच्चों के टीका तो दूर कैमूर जिले में वयस्कों को लगने वाले टीके में भी स्वास्थ्य विभाग के कर्मी लापरवाही बारत रहे हैं। टीका केन्द्रों पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक टीकाकरण होना है, लेकिन टीम कोरम पूरा कर टिका केंद्र पर दोपहर 2 बजे ही भाग जाता है। तो इस हाल में कैमूर के लोगों को स्वास्थ्य विभाग कैसे रख पाएगा सुरक्षित। इनके स्वास्थ्य की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रहा है ।

वहीं जिले की प्रभारी सिविल सर्जन डॉ मीना कुमारी ने बताया तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के सभी लोगों का बैठक बुलाया जाएगा। उस पर चर्चा कर रणनीति तैयार होगी। जैसा कि बच्चों पर यह अटैक करेगा उसको देखते हुए बच्चों का अलग वार्ड बनाया जाएगा जो ऑक्सीजन युक्त रहेगा। अभी हमारे यहां गंभीर परिस्थिति में बीमार पड़ने पर बच्चों के इलाज के कुछ संसाधन मौजूद नहीं है, ना ही आईसीयू बेड है और ना आईसीयू वेंटीलेटर है फिर भी सीमित साधनों में इलाज किया जाएगा ।


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