हेड कांस्टेबल से हार गई दिल्ली पुलिस, सारी तरकीबें हो गई नाकाम, 23 साल तक चली लड़ाई, जानिए क्या हुआ था

हेड कांस्टेबल से हार गई दिल्ली पुलिस, सारी तरकीबें हो गई नाकाम, 23 साल तक चली लड़ाई, जानिए क्या हुआ था

नई दिल्ली। देश भर में अपने बेहतर काम के लिए दिल्ली पुलिस की तारीफ होती है। यही दिल्ली पुलिस अपने ही विभाग के एक हेड कांस्टेबल से हार गई है। इस दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों की एक न चली और अब वह हेड कांस्टेबल के सामने अपनी पराजय मानने को मजबूर हो गए हैं।

मामला 1995 को दिल्ली में हुई नैना साहनी तंदूर हत्याकांड से जुड़ा है। इस हत्या के दौरान सबसे पहले मौके पर पहुंचनेवाले हेड कांस्टेबल अब्दूल नजीर कुंजू से जुड़ा है। इस मामले में हेड कांस्टेबल को प्रमुख गवाह माना गया था। इस हेड कांस्टेबल की तारीफ तो दिल्ली पुलिस ने की, उसे प्रमोशन भी दिया गया, लेकिन वेतन में इंक्रीमेंट के तौर पर मात्र पांच रुपए की बढ़ोतरी की, जिसके बाद से मामला कोर्ट में चक्कर खा रहा था। जिसमें अब सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि हेड कांस्टेबल के साथ दिल्ली पुलिस ने जो किया वह सही नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने भी कुंजू के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है और दिल्ली पुलिस को कुंजू की वरिष्ठता के तौर पर एरियर और सभी लाभ देने के निर्देश दिए हैं।

नैना साहनी मामले में सबसे अहम गवाह थे कुंजू

इस मामले में कुंजू की गवाही सबसे ज्यादा अहम थी क्योंकि वो कुंजू ही सबसे पहले मौका-ए-वारदात पर पहुंचे थे। इस मामले में दिल्ली युवा कांग्रेस के अध्यक्ष सुशील शर्मा अपनी पत्नी नैना साहनी की हत्या करने और फिर लाश को एक रेस्त्रां के तंदूर में जलाने के आरोप में दोषी पाया गया था। लेकिन पुलिस की तरफ से इस काम के इनाम के तौर पर मात्र पांच रुपए की वेतन बढ़ोतरी की गई। कुंजू इस बात से निराश थे कि उनका वेतन जूनियर कर्मी से भी कम था।

अधिकारियों ने नहीं सुनी बात

कुंजू ने बताया कि इस मामले में उन्होंने अपने एक वरिष्ठ अधिकारी से बात की लेकिन वहां भी कोई बात नहीं बनी, इसलिए आखिर में मैंने 2006 में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) का रुख किया। कुंजू ने बताया कि साल 2011 में कैट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया लेकिन उनके विभाग ने फैसले को मानने की जगह दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।कुंजू ने बताया कि साल 2013 में दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला भी मेरे पक्ष में आया था लेकिन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। कुंजू के वकील अनिल सिंघल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कुंजू के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है और दिल्ली पुलिस को कुंजू की वरिष्ठता के तौर पर एरियर और सभी लाभ देने के निर्देश दिए हैं।

बयान बदलने के लिए मिला था दस लाख का ऑफर

कुंजू ने बताया कि मैं ही एक चश्मदीद गवाह था और मुझे अपना बयान बदलने के लिए दस लाख रुपये का ऑफर भी मिला था लेकिन मैंने मना कर दिया, इसके बाद मुझे कई तरह की धमकियां मिलने लगीं। लेकिन मेरे विभाग ने मेरी बहादुरी और मेरे काम की स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद मैंने दिल्ली पुलिस छोड़ दी।


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