महाराष्ट्र में सीएम शिंदे को समर्थन कर रहे 16 विधायकों को अयोग्य ठहराने की सुनवाई लटी, सुप्रीम कोर्ट में 1 अगस्त को सुनवाई

महाराष्ट्र में सीएम शिंदे को समर्थन कर रहे 16 विधायकों को अयोग्य ठहराने की सुनवाई लटी, सुप्रीम कोर्ट में 1 अगस्त को सुनवाई

DESK. महाराष्ट्र में सियासी दांवपेंच लगातार पेचीदा होता जा रहा है. महाराष्ट्र में सीएम एकनाथ शिंदे को समर्थन कर रहे 16 ‘शिवसेना’ विधायकों को अयोग्य ठहराने के मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. हालांकि कोर्ट ने मामले की सुनवाई 1 अगस्त तक टाल दी. साथ ही इसे बड़ी बेंच को सौपने की भी जरूरत पर बल दिया. 

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच द्वारा की जा रही है. वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मामले में बहस की शुरुआत करते हुए उद्धव ठाकरे का पक्ष रखा और कहा कि अगर इसकी इजाजत दी गई तो देश में किसी भी सरकार को गिराया जा सकता है. सिब्बल ने कहा कि अगर इस तरह चुनी हुई सरकार पलटी गई तो लोकतंत्र खतरे में आ जाएगा. इस तरह के परंपरा की शुरुआत किसी भी तरह से अच्छी नहीं हैं न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि देश में कही भी. उद्धव शिवसेना ग्रुप के विधायकों को कोई संरक्षण नहीं है.

सिब्बल ने कहा कि राज्यपाल ने शिंदे को शपथ दिलाई जबकि वो जानते थे कि उनकी अयोग्यता का मामला अभी स्पीकर के समक्ष लंबित है. पार्टी के व्हिप का उल्लंघन किया गया है. ये कानूनों का उल्लंघन है. उन्होंने स्वेच्छा से खुद को पार्टी से अलग कर लिया. व्हिप के खिलाफ मतदान किया. उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए. राज्यपाल को उन्हें शपथ लेने की अनुमति नहीं देनी चाहिए थी.

एकनाथ शिंदे की तरफ से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे पेश हुए और उन्होंने कहा कि अयोग्यता के नियम शिंदे मामले में लागू नहीं होता है. क्योंकि अगर किसी पार्टी में दो धड़े होते है और जिसके पास ज्यादा संख्या होती है वो कहता है कि मैं अब नेता हूं  और स्पीकर मानता है तो ये अयोग्यता में कैसे आएगा. आंतरिक पार्टी लोकतंत्र गला घोंटा जा रहा है. यदि पार्टी में असंतोष है और पार्टी में किसी अन्य व्यक्ति को नेता के रूप में चुना जाता है. ऐसा सभी लोकतंत्रों में होता है.  ऐसे देश हैं, जहां पीएम को भी हटना पड़ता है.  इन विधायकों ने सदन में बहुमत साबित कर दिया तो वह दलबदल नहीं है.


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