महिला को मिली क्षतिपूर्ति की राशि गबन करनेवाले अधिवक्ता पर हाईकोर्ट नाराज, रद्द की जमानत के लिए दायर की गई याचिका

महिला को मिली क्षतिपूर्ति की राशि गबन करनेवाले अधिवक्ता पर हाईकोर्ट नाराज, रद्द की जमानत के लिए दायर की गई याचिका

PATNA : पटना हाई कोर्ट ने पैसे के गबन करने के आरोप में अपीलार्थी अधिवक्ता संतोष कुमार मिश्रा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने सभी पक्षो को सुनने के बाद ये आदेश पारित किया। इसके साथ ही  पटना हाईकोर्ट ने   गबन के आरोपी अधिवक्ता की जमानत याचिका खारिज होने के बाद इसे आगे की कार्रवाई के लिए बिहार राज्य बार कॉउन्सिल को इस आदेश की प्रति भेजने का निर्देश दिया।

यह है पूरा मामला

गौरतलब है कि अपीलार्थी ने अधिवक्ता के तौर पर ललन पासी की ओर से क्षतिपूर्ति को लेकर पटना रेलवे ट्रिब्यूनल में रेलवे एक्ट की धारा 125 व 16 के तहत एक मामला दायर किया था। ट्रिब्यूनल ने 3 जनवरी, 2017 को ललन पासी के दावे को  स्वीकार करते हुए 8 लाख रुपये बैंक के खाते में ट्रांसफर करने का आदेश दिया। साथ ही साथ दावेदार को 9 फीसदी के दर से ब्याज देने का भी आदेश दिया था। 4 लाख रुपये मृत की माँ संझरिया देवी के खाते में जाना था। इस राशि में से 30 फीसदी तीन वर्षों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा किया जाना था। याचिकाकर्ता को एक अधिवक्ता के रूप में ललन पासी और श्रीमती संझरिया देवी के सेविंग एकाउंट का  ब्योरा देने को कहा गया था। इन दोनों के नाम से एक जॉइंट एकाउंट खोला गया जिसमें 11 सितंबर, 2017 को 10, 52, 000/- रुपये ट्रांसफर किये गए। अपीलार्थी ने दावेदार के अधिवक्ता होने का फायदा उठाते हुए चेक को भुनाते हुए 5, 50,000/ - रुपये निकाल लिए। अपीलार्थी की पत्नी ने भी दूसरे चेक को भुना कर ललन पासी के जॉइंट एकाउंट से 4, 50, 000 रुपये भुना ली। इसके अलावा भी अपीलार्थी द्वारा 52, 000 / - रुपये निकाले गए। ये राशि ललन पासी और संझरिया देवी को इकलौता पुत्र गोरख पासी की मृत्यु की वजह से क्षतिपूर्ति के रूप में  दी गई थी। अपीलार्थी की पत्नी गीता देवी को जमानत मिल चुका। 

इस अपील के जरिए अपीलार्थी ने बक्सर के  एडिशनल डिस्ट्रीक्ट एंड सेशन्स जज - 1 द्वारा 23 जुलाई , 2021 को पारित किए गए आदेश को रद्द करने का आग्रह किया था। मामला डुमरांव पी एस केस नंबर - 107/ 2019 से निकले एस सी / एस टी केस नंबर - 146 / 2020 से जुड़ा हुआ है। आई पी सी की धारा 406 व 420 में कांड दर्ज हुआ था।  बाद में आई पी सी की धारा 467, 468, 471 व 120 (बी) तथा एस सी - एस टी एक्ट की धारा 3(आर) (एस)  जोड़ा गया था। इसके साथ ही कोर्ट ने इस अपील को निष्पादित कर दिया।

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