इंसानियत शर्मसार: बक्सर में 24 घण्टे धधक रही चिताओं के बावजूद दर्जनों लाशें गंगा में किसने की प्रवाहित, इलाके में दहशत

इंसानियत शर्मसार: बक्सर में 24 घण्टे धधक रही चिताओं के बावजूद दर्जनों लाशें गंगा में किसने की प्रवाहित, इलाके में दहशत

DESK: कोरोना महामारी के बाद से ही कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना बेहद ही जरूरी हो गया है. कोरोना मरीजों के अंतिम संस्कार को लेकर भी कोविड प्रोटोकॉल्स बनाए गए हैं जिनका पालन करना बेहद जरूरी है. पिछले दिनों ही राजस्थान से खबर आई थी जहां बिना कोविड प्रोटोकॉल के अंतिम संस्कार करने के बाद उसमें शामिल हुए 21 लोगों की मौत हो गई थी. इससे हम समझ सकते हैं कि यदि संक्रमितों के शव को जलाया नहीं गया और इसी तरह छोड़ दिया गया तो उसे कितनी दिक्कतें आएंगी.

बताया जा रहा है कि आस-पास के गांव में पिछले एक डेढ़ महीने से मौतें अचानक बढ़ गई है. मरने वाले सभी खांसी-बुखार से पीड़ित थे. हैरानी की बात तो यह है कि चौसा श्मशान घाट पर आने वाले अधिकतर शव को गंगा नदी में यूं ही प्रवाहित कर दिया जाता है. इस कारण सैकड़ों शव यहां वहां सड़ रहे हैं. हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि बक्सर में 24 घंटे चिता धधक रही है. इसके बावजूद अंतिम संस्कार खत्म नहीं हो रहे. यही हाल कब्रिस्तान का भी है. वहां भी भीड़ लगी हुई है. आंकड़ों की बात करें तो बक्सर में इन दिनों रोज 90 चिता में जल रही है. इसके बावजूद कई लोग जगह ना मिलने और देरी से बचने के लिए इसी तरह से शव को गंगा नदी में बहा दे रहे हैं. यह पूरी तरह से अमानवीय और घातक रूप से संक्रामक है. 

सवाल तो यह है कि गंगा नदी के किनारे पड़े इन शवों में से कितने कोरोना संक्रमित लोगों के थे, इसकी पहचान मुश्किल है. अगर एक भी मामला ऐसा है, तो हम समझ सकते हैं कि यह परेशानी कितनी बढ़ने वाली है. इस मामले में अबतक प्रशासन ने कुछ कार्रवाई नहीं की है. शव यूं ही खुले में पड़े हुए हैं. बता दें, सोमवार को तेजप्रताप यादव ने इसी मुद्दे को उठाते हुए अपने फेसबुक पर इससे जुड़ा एक वीडियो पोस्ट किया और सरकार से सवाल किया है.

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