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दिसंबर में ही प्रधानमंत्री ने लिख दी थी कतर से पूर्व नौ सैनिकों की घर वापसी की पटकथा, डोभाल ने भी निभाई बड़ी भूमिका

दिसंबर में ही प्रधानमंत्री ने लिख दी थी कतर से पूर्व नौ सैनिकों की घर वापसी की पटकथा, डोभाल ने भी निभाई बड़ी भूमिका

DESK : सोमवार सुबह देशवासियों को यह बड़ी खुशखबरी मिली कि कतर में उम्र कैद की सजा काट रहे नौसेना के आठ पूर्व सैनिकों की घर वापसी हो गई है। कतर सरकार ने न सिर्फ उनकी सजा को खत्म कर दिया है, बल्कि उन्हें भारत वापस लौटने की अनुमति भी दे दी है। पूर्व नौसैनिकों की वापसी को लेकर मोदी सरकार की विदेश रणनीति की जमकर तारीफ की जा रही है। अब इस पूरे घटना के पीछे भारत सरकार ने कुटनीतिक प्रयास की सच्चाई भी सामने आन लगी है।  भारतीयों की रिहाई ऐसे वक्त हुई है, जब 14 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कतर की राजधानी दोहा जा रहे हैं. पीएम मोदी यूएई के दौरे के बाद कतर पहुंचेंगे।

इस तरह चला रिहाई का पूरा घटनाक्रम

26 अक्टूबर को आठों भारतीयों को फांसी की सजा सुनाई गई थी, और 12 फरवरी की सुबह सभी भारत लौट आए. यानी फांसी की सजा का ऐलान होने के बाद 108 दिनों में इनकी रिहाई हो गई.

इस फैसले के कुछ दिन बाद ही 9 नवंबर को भारत ने अपील की. 23 नवंबर को अदालत ने ये अपील मंजूर की. फांसी की सजा के फैसले के महीनेभर के भीतर ही इस अपील का मंजूर होना बड़ी जीत था.

लेकिन इन सबके बीच राहत की सबसे बड़ी खबर आई 28 दिसंबर को तब आई, जब कतर की कोर्ट ने फांसी की सजा को कम कर दिया. कोर्ट ने इन्हें तीन से 25 साल की जेल की सजा सुनाई. साथ ही इस सजा के खिलाफ अपील करने के लिए 60 दिन का वक्त दिया. इस फैसले के बाद ही इन भारतीयों की रिहाई का नया रास्ता खुला।

मोदी के साथ डोभाल ने निभाई बड़ी भूमिका

पूर्व नौ सैनिकों की रिहाई का रास्त तब खुला, जब पीएम मोदी दिसंबर में दुबई दौरे पर गए थे। जहां पीएम मोदी ने दुबई में सीओपी28 शिखर सम्मेलन में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से भेंट की थी. दोनों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी और कतर में रहने वाले भारतीयों की भलाई पर चर्चा भी की थी. माना जा रहा है कि कतर की जेल में बंद भारतीय नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों की रिहाई का मामला भी पीएम मोदी ने इस दौरान उठाया था। इसके अलावा विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल ने भी इस मुद्दे को कतर के सामने बार-बार उठाया था।

बता दें कि पिछले कुछ सालों में भारतीय विदेश नीति को बड़ी सफलता मिली है। कई मोर्चों पर भारत ने कामयाबी हासिल की है। एक बार फिर पूर्व नौ सैनिकों की न सिर्फ रिहाई, बल्कि उनकी सकुशल घर वापसी कराने में भारत सरकार को कामयाबी हासिल हुई है।