चर्चित राकेश हत्याकांड में पत्नी राधा और उसका प्रेमी सुभाष चढ़े पुलिस के हत्थे, निर्मम हत्या कर शव को गलाने की बनाई थी योजना

चर्चित राकेश हत्याकांड में पत्नी राधा और उसका प्रेमी सुभाष चढ़े पुलिस के हत्थे, निर्मम हत्या कर शव को गलाने की बनाई थी योजना

MUZAFFARPUR : बीते दिनों मुजफ्फरपुर के नगर थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर ओपी इलाके के बालू घाट मोहल्ले में केमिकल ब्लास्ट कर हत्या मामले में ही फरार प्रेमी- प्रेमिका आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गए। SSP जयंतकांत द्वारा गठित विशेष टीम ने आरोपी पत्नी राधा और प्रेमी सुभाष शर्मा को कांटी और अहियापुर के सीमावर्ती इलाके से दबोचा है। घटना के बाद से दोनों अलग-अलग जगह अपने परिचितों के यहां शरण ले रखे थे। जिसके बाद अब शरण देने वालों से भी पूछताछ की जा रही है। 

दोनों की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए उन्होंने बताया- "कई बिंदुओं पर पूछताछ जारी है।  पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया- "घटना के बाद सभी एक साथ शहर से भागे थे। बस स्टैंड में जाकर छुप गए। वहीं रात गुजारी थी। फिर दूसरे दिन अलग-अलग जगह के लिए निकले थे। विकास और कृष्णा ने सीतामढ़ी जाने की बात कही थी। वहां से निकलने के बाद उससे सम्पर्क नहीं हुआ।'  फिलहाल हत्या में जिस धारदार हथियार का इस्तेमाल किया गया था, उसके सम्बन्ध में भी पूछताछ हो रही है।

 मृतक राकेश के भाई दिनेश के बयान पर पुलिस ने चार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी । जिसमें अभी दो लोग फरार हैं। घटना में शामिल मृतक राकेश की साली कृष्णा और साढ़ू विकास की तलाश में एक टीम समस्तीपुर और सीतामढ़ी में छापेमारी कर रही है। हालांकि, अब तक दोनों का सुराग नहीं मिला है। गिरफ्तार आरोपियों से उन दोनों के ठिकाने के बारे में पूछताछ की गई। सुभाष ने बताया- "विकास और कृष्णा के बारे में कोई जानकारी नहीं है। घटना के बाद से दोनों से उससे सम्पर्क नहीं हुआ है।

बता दें कि मुजफ्फरपुर जिले के चर्चित बालू घाट मोहल्ले के एक 3 मंजिला इमारत में हुई हत्या कांड ने पूरे जिले को दहला दिया था जिसमें हत्या कर शव को दफन किया जा रहा था। मृतक राकेश की पत्नी राधा और उसके प्रेमी सुभाष ने इस घटना को अंजाम दिया था। पुलिस की जांच में सामने आया है कि राधा ने अपने फ्लैट में प्रेमी सुभाष के साथ मिलकर पति राकेश सहनी की हत्या कर दी। शव को 8 टुकड़ों में काटा और एक ड्रम में रख दिया। शव को गलाने के लिए ड्रम में यूरिया, नमक और तेजाब भर दिया। कमरे से बदबू बाहर न जाए, इसलिए खिड़की और दरवाजे में कपड़े ठूंस दिए। हर रात कमरे के गेट पर अगरबत्ती जलाई जाती थी। 4 दिन तक यूरिया, सल्फ्यूरिक एसिड और नमक से शव गलने के कारण अमोनियम नाइट्रेट गैस बनी। इस गैस और जलती अगरबत्ती के संपर्क के कारण धमाका हो गया। 


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