फेफड़े के कैंसर की चपेट में भारत की युवा पीढ़ी, वायु प्रदूषण कितना है खतरनाक, जानिये इससे कैस बचें व शुरुआती लक्ष्ण क्या है- डॉ. रिदू कुमार

फेफड़े के कैंसर की चपेट में भारत की युवा पीढ़ी, वायु प्रदूषण कितना है खतरनाक, जानिये इससे कैस बचें व शुरुआती लक्ष्ण क्या है- डॉ. रिदू कुमार

Desk. भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण ने लोगों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है. वायु प्रदूषण की वजह से लोग फेफड़े के कैंसर के शिकार हो रहे हैं. नैशनल कैंसर रजिस्‍ट्री प्रोग्राम रिपोर्ट 2020 के अनुसार इस वक्‍त देश में कैंसर के 13.9 लाख मामले हैं. यह आंकड़ा 2025 तक 15.7 लाख तक पहुंच सकता है. इसमें फेफड़ें के कैंसर से भी बड़ी संख्या में लोग पीड़ित है. इसकी चपेट में युवा पीढ़ी भी आ गई है. इस बात की जानकारी बिहार के प्रसिद्ध युवा कैंसर विशेषज्ञ डॉ. रिदू कुमार ने दी है.

बता दें कि कैंसर के प्रति जागरूकता के लिए 7 नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है. कोरोना वायरस  और बढ़ते प्रदूषण से लोगों के लंग्स कमजोर हो रहे हैं. फेफड़ों की सेहत का ध्यान न देने से लंग्स कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. इनका कहना है, 'जो लोग कोरोना वायरस से गंभीर रूप से बीमार हुए थे. उनके फेफड़े कमजोर हो गए हैं. ऐसे में खतरनाक तरीके से बढ़ता वायु प्रदूषण स्वास्थ के लिए और खतरनाक साबित हो सकता है. इसलिए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए.'

युवा भी चपेट में

डॉ. रिदू न्यूज फॉर नेशन से बात करते हुए कहा, 'प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ा दिया है और अब यह केवल धूम्रपान करने वालों की बीमारी नहीं रह गई है. यहां तक कि युवा भी इसकी चपेट में आने लगे हैं. दुर्भाग्य से ज्यादातर मरीजों का पता एडवांस स्टेज में चलता है. यही कारण है कि भारत में कैंसर के कारण होने वाली मौतों में फेफड़े के कैंसर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. इससे जान गंवाने वालों की संख्या स्तन, प्रोस्टेट और कोलन कैंसर से जान गंवाने वालों की कुल संख्या से भी ज्यादा है.'

यह है लक्षण

डॉ. रिदू फेफड़े के कैंसर के शुरूआती लक्ष्णों को बताते हुए कहते हैं, 'जब किसी व्यक्ति के फेफड़ों की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं. तब फेफड़े के कैंसर शुरूआत होती है तो उसमें कुछ लक्षण पाए जाते हैं. जिसे हम महसूस कर सकते है. इन लक्षणों में लगातार खांसी आना या खांसते वक्त खून आना,  कफ या थूक आना, सांस लेने में तकलीफ होना, सीने में दर्द होना, सांस फूलना, हड्डियों में दर्द होना और सिरदर्द जैसे लक्षण भी शामिल है. व्यक्ति को चाहिए कि अगर कुछ ऐसा लक्ष्ण दिखाई दे तो तत्काल चिकित्सक से मिलकर उचित मार्गदर्शन ले. साथ ही हर नागरिक कि दायित्व है कि वह लोगों को जागरूक करें.'

कोविड-19 से पीड़ितों को ज्यादा खतरा

डॉ. रिदु जोर देते हुए कहते है कि जब शरीर की कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगती है तो कैंसर का खतरा रहता है. लंग्स कैंसर फेफड़ों की ब्रेंकीओल्स में शुरू होता है. जो लोग रोजाना स्मोकिंग करते हैं या जिन्हें फेफड़ों से जुड़ी कोई भी बीमारी है, उन्हें कैंसर होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है. कई मामलों में बढ़ता प्रदूषण और कमजोर फेफड़े भी लंग्स कैंसर का कारण बनते हैं. पोस्ट कोविड में भी लंग्स की समस्याएं काफी देखी गई थी. ऐसे में प्रदूषित वातावरण फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए लोगों को अपना ध्यान रखने की जरूरत है. अगर लापरवाही बरती गई तो हालत बिगड़ सकती है.

                                                                                                                                                                                                                                                  डॉ. रिदु कुमार 

                                                                                                                                                                                                                                                       निदेशक

                                                                                                                                                                                                                                                 मगध कैंसर सेंटर

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