भारत नेपाल बॉर्डर पर फिर से खोलने की चर्चा, सीमा पर जुटी सैंकड़ों की भीड़

भारत नेपाल बॉर्डर पर फिर से खोलने की चर्चा,  सीमा पर जुटी सैंकड़ों की भीड़

बगहा। इंडो नेपाल बॉर्डर खुलने की अफवाह से मची अफरा - तफरी। देश में कोरोना वायरस की दस्तक के बाद करीब दस माह से बंद है वाल्मीकिनगर स्थित इंडो नेपाल बॉर्डर। शुक्रवार की सुबह एक चिट्ठी तेजी से वायरल होने के साथ जंगल की आग के तरह चर्चा होने लगी कि नेपाल बॉर्डर खुल गया। बॉर्डर खोलने की अफवाह पर दर्जनों ग्रामीण गंडक बराज पर इकट्ठा हो गए। हालांकि भारतीय प्रशासन ने अभी इस सूचना की पुष्टि नहीं की है।

बता दें कि पिछले करीब दस माह से भारत-नेपाल के वाल्मीकिनगर सीमा से आवाजाही बंद होने के चलते दोनों देश के स्थानीय बाजारो में वीरानगी छाई हुई है। इससे व्यापारी भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। नेपाल प्रशासन के इस रवैया के विरोध में हाल ही नेपाली नागरिकों ने धरना प्रदर्शन किया था। बीते मार्च माह से सील भारत-नेपाल सीमा के अभी खुलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। सीमा खोलने के लिए दोनों देशों के लोग अधिकारियों से लगातार गुहार लगा रहे हैं लेकिन, अभी तक इस संबंध में कोई सार्थक निर्णय नहीं हो सका है। नेपाली सूत्रों के मुताबिक देश मे अभी भी कोविड19 के संक्रमण का खतरा बना हुआ है। भारत, नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को खोलने का विचार नहीं है। फिलहाल अगले आदेश तक सीमा सील रहेगी। नेपाल में पर्यटन उद्योग प्रमुख व्यवसाय माना जाता है। वहां की 90 फीसद आबादी पर्यटन व्यवसाय पर आश्रित है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए विगत वर्ष मार्च माह में भारत-नेपाल सीमा सील कर दी गई थी।  

विदित है कि वाल्मीकिनगर नेपाल सीमा से सटा हुआ है जिसका नो मैंस लैंड पर गंडक नदी बहती है और वही दोनों देशों की सीमा को निर्धारित करती है। दोनों देशों की सीमा बंद होने के कारण वाहनों की आवाजाही पर रोक है।कोरोना के कारण 24 मार्च को नेपाल ने अपने देश में लॉकडाउन की घोषणा की। जिसके एक दिन बाद भारत में भी लॉकडाउन की घोषणा की गई। विश्लेषकों की मानें तो अबतक इतनी लंबी अवधि तक नेपाल बॉर्डर इसके पहले कभी बंद नहीं हुआ था। बॉर्डर बंदी के कारण दोनों देशों के सीमावर्ती कस्बे और गांवों के लोगों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

भारत-नेपाल सीमा की स्थिति किसी भी दो देशों के बॉर्डर से एकदम जुदा है। दोनों देशों की सरहद पर न कोई कंटीले बाड़ हैं न सैनिकों की भारी तैनाती। खुली सीमा होने के कारण नेपाल के लोग भारतीय सीमा में और भारतीय लोग नेपाली सीमा में आते-जाते रहे हैं। नेपाली नागरिकों को भारतीय सीमा में नजदीकी रेलवे स्टेशन तक आने-जाने के लिए किसी औपचारिकता की जरूरत नहीं होती। इसी तरह भारतीय नागरिकों को नजदीकी बजारों तक जाने के लिए सिर्फ ‘सुविधा’ पर्ची कटवानी पड़ती है।

व्यापार का बड़ा जरिया

इन नाकों के अलावा सीमा पार कर आने-जाने के लिए लोग पगडंडिया और कच्चे रास्तों का भी इस्तेमाल करते हैं। सीमावर्ती भारतीय बाजार नेपाली नागरिकों पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। नेपाली नागरिक बड़ी संख्या में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नजदीकी भारतीय बजारों में आते हैं क्योंकि नेपाली बाजारों के मुकाबले खाद्यान्न, कपड़े आदि भारतीय बाजारों में सस्ते मिल जाते हैं। उसी प्रकार भारत के लोग मसालों, इलेक्ट्रानिक व इलेक्ट्रिक सामानों के लिए नेपाली बाजारों का रुख करते हैं, जो उन्हें भारत की अपेक्षा सस्ते मिलते हैं।

कोरोना ने बदल दी स्थिति

कोरोना के कारण बॉर्डर बंदी ने स्थिति एकदम बदल दी है। लॉकडाउन के कारण लोगों की आवाजाही एकदम बंद रही। यहां तक कि भारत और नेपाल में काम करने वाले श्रमिकों को अपने-अपने देश जाने के लिए बॉर्डर क्षेत्र में क्वारंटीन रहना पड़ा। लगातार बंदी से व्यापार में आई गिरावट के कारण कई दुकानदार अपनी दुकान का किराया नहीं दे पा रहे हैं। बॉर्डर बंदी से सबसे ज्यादा असर व्यापारियों पर पड़ा है लेकिन आम लोग भी कम परेशान नहीं हैं। सीमा इस पार भारतीय लोगों को रिश्तेदारियां नेपाल में है। उन्हें आने-जाने में बहुत परेशानी हो रही है। 

सीमावर्ती लोग अपनी जरूरतों के लिए सुरक्षाकर्मियों के रोक-टोक के बीच नदी के रास्ते आने-जाने को मजबूर हैं। वाल्मीकिनगर के खुदरा व्यापारी बॉर्डर बंद होने से आर्थिक रूप से टूट गए हैं क्योंकि उनका व्यवसाय नेपाली नागरिकों की आवाजाही से जुड़ा हुआ है। यही हालत नेपाल के सीमावर्ती बाजारों की भी है, जहां भारतीय खरीदारी करने जाते थे।

सीमावर्ती लोगों को उम्मीद थी कि नए साल में नेपाल बंद बॉर्डर को खोल देगा क्योंकि नेपाल में नए साल पर अधिक बिक्री होती है। व्यवसायियों की मानें तो लॉकडाउन से ही बॉर्डर बंद होने से हमारा व्यापार बुरी तरफ प्रभावित हुआ है। पूरा बाजार नेपाल के ग्राहकों पर आधारित है। बॉर्डर बंद होने से व्यापार बंद है और हमारा भविष्य अंधकार में डूब गया है। व्यापारी बदहाल हैं और अवसाद में डूब रहे हैं। यहां के व्यवसाई उम्मीद पर बने हुए हैं कि जल्द ही सब कुछ सामान्य होगा।

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