जेडीयू-राजद के बीच जारी जंग को बस टुकुर-टुकुर देख रही BJP, लालू के धुर विरोधी होने का तमगा भी हाथ से गया!

जेडीयू-राजद के बीच जारी जंग को बस टुकुर-टुकुर देख रही BJP, लालू के धुर विरोधी होने का तमगा भी हाथ से गया!

पटनाः बिहार में विधान सभा चुनाव से ठीक पहले नेताओं के दल-बदलने का सिलसिला जारी है।सत्ता पक्ष और विपक्ष दूसरे दल के नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करा रहे हैं।2015 के विधान सभा चुनाव में साथ-साथ चुनाव लड़ने वाले दो दल इस बार के चुनाव में एक दूसरे के धुर विरोधी हो गए हैं।एक सत्ता पक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है तो दूसरा विपक्ष का सबसे मजबूत दल। दोनों दलों के बीच पॉलिटिकल वार की स्थिति है.सत्ताधारी जेडीयू और मुख्य विपक्षी राजद आमने-सामने है।दोनों दल एक दूसरे के विधायकों पर डोरे डाल रहे हैं। राजद ने नीतीश सरकार में मंत्री रहे श्याम रजक को पार्टी में शामिल करा बड़ी उपलब्धि मान रही ,वहीं जेडीयू के नेता  राजद  के 4 विधायकों अपने पाले में लाकर फूले नहीं समा रहे। इसके पहले भी जेडीयू ने राजद के 5 विधान पार्षदों को तोड़ कर अपनी पार्टी में शामिल करा लिया था।जवाब में राजद ने भी जेडीयू के कई नेताओं को अपनी पार्टी में मिला लिया।लेकिन इन सब के बीच ग्रास लेवल पर मजबूत और लालू प्रसाद का घोर विरोधी बीजेपी का इन दिनों कोई चर्चा नहीं है।ऐसा लग रहा कि लालू यादव के धुर विरोधी होने का तमगा भी हाथ से निकल कर सहयोगी जेडीयू के खाते में चला गया.

टुकुर-टुकुर देख रही बीजेपी

बिहार की राजनीति में सीधे-सीधे राजद-जेडीयू के बीच जंग जारी है और बीजेपी उस जंग को टुकुर-टुकुर देख रही है,मानो वो अब किंकर्तव्यविमूढ़ हो गई हो या फिर उसे लड़ाई देखने मात्र से हीं संतुष्टि मिल रही हो, तीसरा कारण यह भी हो सकता है कि पार्टी को इन मुद्दों से कोई मतलब नहीं रहा। कभी लालू राज को सीधी चुनौती देने वाली पार्टी बीजेपी आज की तारीख में कहीं लड़ाई में दिख ही नहीं रही।क्यों कि विधान सभा चुनाव से पहले चर्चा तो सिर्फ जेडीयू-राजद की हो रही है। बिहार में जब से राजद सत्ता में आई उसके बाद बीजेपी ने ही उसे हर मोर्चे पर सीधी चुनौती दी।लालू-राबड़ी को हर मोर्चों पर विरोध करने वाली बीजेपी आज बेबस नजर आ रही है।सहयोगी जेडीयू लगातार बैटिंग कर रही है और भाजपा मैदान से बाहर रहकर चुपचाप देख रही है ।ऐसा लग रहा मानो बीजेपी सहयोगी जेडीयू की बी टीम हो गई हो....।

राजद नेताओं के लिए पहली पसंद बनी नीतीश कुमार की पार्टी

जानकार बताते हैं कि राजद के अधिकांश नेता जो पार्टी छोड़ रहे उनकी पहली पसंद जेडीयू है।वे जेडीयू में जाना अधिक पसंद कर रहे हैं।इतना ही नहीं जेडीयू के नेता भी राजद को तोड़ने में दिलचस्पी दिखा रहे ।लेकिन बीजेपी के नेताओं को अब इसमें कोई दिलचस्पी नहीं रहा।यूं कहें कि न तो नेताओं को बीजेपी में शामिल होने में दिलचस्पी है और न भाजपा नेतृत्व को पार्टी में शामिल कराने में। लिहाजा बीजेपी चुप रहने में ही अपनी भलाई समझ रही।इसी वजह से जेडीयू द्वारा राजद खेमे में तोडफोड़ से बीजेपी नेताओं को कोई खुशी नहीं है।हालांकि उसे वे सार्वजनिक तौर पर इजहार भी नहीं कर रहे. पार्टी के नेता चिराग पासवान से लेकर अन्य मुद्दों पर बोलने से अच्छा चुप रहने में ही अपनी भलाई समझ रहे।

तेजस्वी ने श्याम रजक को राजद में कराया शामिल

ता दें कि नीतीश कैबिनेट में कल तक मंत्री रहे श्याम रजक आज राजद में शामिल हो गए हैं।राबड़ी आवास पर तेजस्वी यादव ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया।राजद में वापसी के बाद उन्होंने सीएम पर जमकर हमला बोला।बता दें कि जैसे ही यह खबर लगी कि श्याम रजक की तेजस्वी यादव से बात हो गई है और वे पार्टी छोड़ने वाले हैं।इसके बाद रविवार को ही नीतीश कुमार ने उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।वहीं प्रदेश अध्यक्ष ने उन्हें पार्टी से भी निकाल दिया था।

जेडीयू ने राजद के तीन विधायकों को पार्टी में कराया शामिल

तेजस्वी यादव ने जेडीयू के एक विधायक श्याम रजक को आज पार्टी में शामिल कराया। हालांकि श्याम रजक राजद में शामिल होने से पहले ही विधायकी से भी त्यागपत्र दे दिया था। इसके बदले में जेडीयू ने राजद के टिकट से चुनाव जीत कर विधायक बने तीन एमएलए को पार्टी में शामिल कराया है।राजद ने रविवार को ही तीन विधायकों महेश्वर यादव,फराज फातमी और प्रेमा चौधरी को पार्टी से निकाल दिया था।इनमें 2 विधायक आज जेडीयू ज्वाइन कर लिया वहीं फराज फातमी भी आने वाले दिनों में जेडीयू में शामिल होंगे।वहीं तीसरे विधायक के रूप में सासाराम के राजद विधायक अशोक कुमार भी जेडीयू के हो गए।प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में आज सोमवार को मंत्री विजेन्द्र चौधरी ने तीनों विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कराया.

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