जेडीयू का बड़ा सवाल...जब तरुण और तेजस्वी एक ही हैं तो फुलवरिया और सेलारकला की जमीनों का चुनावी हलफनामें में जिक्र क्यों नहीं

जेडीयू का बड़ा सवाल...जब तरुण और तेजस्वी एक ही हैं तो फुलवरिया और सेलारकला की जमीनों का चुनावी हलफनामें में जिक्र क्यों नहीं

पटना.. जदयू ने एक बार फिर तेजस्वी यादव पर एक जीमन मामले को लेकर बड़ा हमला किया है। बिहार सरकार के मंत्री नीरज कुमार ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि 1.2.1994 को जो जमीन का निंबधन हुआ था वो निबंधन तरुण यादव के नाम से हुआ था। अगर तेजस्वी और तरुण यादव एक ही हैं तो इस जमीन को चुनावी हलफनामें में क्यों नहीं दर्शाया गया है। जदयू के नेता ने दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि मैं ये प्रमाण इसलिए दे रहा हूं कि बिहार की जनता ये देखे कि आखिर ये मामला क्या है। इस चुनाव में लालू प्रसाद जी के दोनों बेटे चुनाव लड़ रहे हैं।

जदयू प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बिहार सरकार के सूचना एवं जन-संपर्क मंत्री नीरज कुमार ने बताया कि लालू परिवार द्वारा गरीब मजलुमों को नौकरी देने के नाम पर उनकी जमीनें अपने पारिवारिक संदस्यों  के नाम निबं‍धित करवा लिया। जिसका मय साक्ष्य उद्भेदन विगत में भी किया गया था और आज पुन: दुहराया गया कि कैसे नौकरी देने के नाम पर लालू परिवार ने समाज के किसी भी वर्ग के लोगों को नहीं बक्शा। इससे पूर्व लालू प्रसाद के जन्मदिन के मौके पर भी  नीरज कुमार ने यह आरोप लगाया था कि यह परिवार जमीन की जालसाजी में माहिर रहा है। हैरतअंगेज है कि जब हमने लालू प्रसाद के पुत्र के रूप में जमीन निबंधनकारी तरूण यादव का पर्दाफाश किया तो लालू यादव का पूरा कुनबा तेजस्वी यादव को तरूण साबित करने में जुट गया। स्वीकारोक्ति के बावजूद राघोपुर से विधानसभा चुनाव लड़ रहे तेजस्वी यादव और हसनपुर से चुनाव लड़ रहे उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव  ने इस बार भी अपने चुनावी हलफनामे में कई संपत्तियों का जिक्र न कर जन प्रतिनिधित्व कानून के धारा 123 का उल्लंघन किया है। इससे यह स्प्ष्ट होता है कि इनके डीएनए में जमीन की जालसाजी का जिन्स व्याप्त है। तेजप्रताप यादव एवं तेजस्वीे यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के अपने हलफनामे में अद्योलिखित जमीनों का उल्लेख नहीं किया है।

1.    बालेश्वर चौधर से नौकरी देने के एवज में उचका गांव, जिला गोपालगंज की 2 कट्ठा 16 धूर जमीन तेजप्रताप और तरूण यादव के नाम लिखवा लिया गया। जिसका खाता संख्या-173, खसरा संख्या- 825 है। इसका वर्तमान मूल्य 495560 रू है।

2.    विश्वनाथ चौधर से नौकरी देने के एवज में उचका गांव, जिला गोपालगंज की 6 कट्ठा जमीन तेजप्रताप और तरूण यादव के नाम पर लिखवाया गया जिसका खाता नं-74, खसरा संख्या- 891 है। इसका तात्कालिक मूल्य  7000 था जिसका वर्तमान मूल्य 4975000 रू है।

3.    बलम चौधर से नौकरी देने के एवज में उचका गांव, जिला गोपालगंज की 2 कट्ठा 16 धूर जमीन तेज प्रताप के नाम लिखवाया गया जिसका खाता नं-173, खसरा नं-825 हैा इसका तात्कालिक मूल्य  3000 था जिसका वर्तमान मूल्य  464280 रू है।

4.    लालू यादव के सगे भाई मंगरू यादव के पांच बेटों से नौकरी देने के नाम पर 8 कट्ठा 17 धूर जमीन फुलवरिया जिला गोपालगंज में तेज प्रताप के नाम पर लिखवा लिया गया था जिसका खाता संख्या-74, खसरा संख्या 982 है। इसका वर्तमान मूल्य  1452000 रू है।

उपर्युक्त वर्णित भू-विवरण जिसका कुल रकबा 1 बीघा 9 धूर होता है और वर्तमान मूल्य तकरीबन 33 लाख 86 हजार 840 रू है, जिसका उल्लेख तेजस्वी और तेजप्रताप ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के हलफनामें में जिक्र न कर जन प्रतिनिधित्वय कानून के धारा 123 का उल्लंघन किया है । 

तेजस्वी यादव अपने को रोजगार से जोड़ते हुए 10 लाख रोजगार देने की बात करते हैं। उपर्युक्त जमीन आपके और आपके भाई के नाम से है जिसका मूल्य तकरीबन 33 लाख 86 हजार 840 रू है। आपके माता-पिता द्वारा आपके पैतृक गॉंव फुलवरिया और ननिहाल में अवैध रूप से अर्जित कुल 71 लाख की सम्पत्ति जिन गरीब-गुरबों से ली है उन्हें  वापस क्यों नहीं लौटा देते? आपने समाज के अल्पसंख्यक और पिछडे़ वर्ग से आने वाले लोगों को भी नहीं बक्शा। आपने बीपीएल स्तर का भ्रष्टाचार कर धन अर्जन करने हेतु किसी भी स्तर तक जाने की अपनी मंशा जाहिर कर दी।

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