भ्रष्टाचार के खुलासे से BJP प्रभारी का स्वागत ! बिहार आने से पहले JDU नेताओं ने 'तावड़े' से पूछे 10 सवाल

भ्रष्टाचार के खुलासे से BJP प्रभारी का स्वागत ! बिहार आने से पहले JDU नेताओं ने 'तावड़े' से पूछे 10 सवाल

PATNA : जदयू प्रवक्ता अरविन्द निषाद एवं अंजुम आरा ने पार्टी कार्यालय में बिहार भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े को भ्रष्टाचारी बताते हुए उनसे दस सवाल पूछे हैं। प्रवक्ताओं ने कहा कि भ्रष्टाचार में इनकी संलिप्तता के कारण ही वर्ष 2019 के महाराष्ट्र चुनाव में भाजपा ने इन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया और ऐसे भ्रष्ट लोगों के कारण ही भाजपा महाराष्ट्र चुनाव हार गई। प्रवक्ताओं ने कहा कि विनोद तावड़े के अनुसार उन्होंने बीटेक की पढ़ाई की है, लेकिन जिस काॅलेज से उन्होंने यह डिग्री लिया है उसे न तो यूजीसी की मान्यता है और न ही आल इंडिया काउन्सिल फोर टेक्निकल एजुकेशन से अर्थात् तावड़े जी की डिग्री ही फर्जी है। तावड़े ने जिस दयानेश्वर विद्यापीठ से यह डिग्री लिया है, उसके खिलाफ 2015 में त्वरित कार्यवाही करने का आदेश मुंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार को दिया था।


वहीँ उन्होंने कहा की महाराष्ट्र के अमरावती जिले के एक काॅलेज में जनवरी 2019 में विनोद तावड़े से एक समारोह के बाद पत्रकारिता के एक विद्यार्थी (प्रशांत राठौड़) द्वारा उनसे राज्य में मुफ्त शिक्षा के जरूरत पर सवाल किया गया। जिसके बाद उन्होंने उस विद्यार्थी से कहा कि अगर वो खुद से पढ़ाई नहीं कर सकता है तो नौकरी करे। इस पूरे मामले को एक अन्य विद्यार्थी युवराज डबडे ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। जब इस रिकाॅर्डिंग की बात तावड़े को पता चली तो उन्होंने काॅलेज से ही युवराज को गिरफ्तार करवा लिया। उसे थाने में रखा गया और उनके फोन से विडीओ डीलीट करवाया गया। प्रवक्ताओं ने कहा कि विनोद तावड़े का नाम पानी का बिल नहीं देने के मामले में भी जून 2019 में आया था। यानी चोर बिहार भाजपा के प्रभारी बनकर आ रहे हैं। परन्तु यह बिहार है यहाँ कोसी और गंगा है, तावड़े को यहाँ पानी की कोई कमी नहीं होने दी जायेगी। अब विनोद तावड़े बिहार में भाजपा नेताओं को टिकेट बाटेंगे।

प्रवक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2017 में दो करोड़ के एक भ्रष्टाचार में एक अधिकारी (शशिकांत सालुंखे) का नाम आया था, जिसने लिखित रूप से कहा था कि वो सिर्फ़ विनोद तावड़े के लिए विशेष सेवा पर कार्यरत चरूदत्त शिंदे के निर्देशों का पालन मात्र कर रहे थे। इस मामले का सच सामने नहीं आए इसे ध्यान में रखते हुए इस मामले में किसी के खिलाफ कोई केस ही नहीं किया गया। जबकि शशिकांत सालुंखे को सस्पेंड कर दिया गया। सवाल यह है कि आखिर इस मामले में केस क्यूँ नहीं किया गया? तावड़े साहब जाँच से क्यूँ डर गए? हांलाकि बाद में विपक्ष और मीडिया के दवाब में एक साल के बाद इस मामले में केस दर्ज किया गया और जाँच शुरू हुई। लेकिन आजतक इसकी रिपोर्ट क्यों नहीं आई?

प्रवक्ताओं ने कहा कि विनोद तावड़े को महाराष्ट्र की शिव सेना सरकार जेल भेजने को तैयार थी। जब भाजपा को पता लगा कि इनके सारे भ्रष्टाचारी नेता जेल जाने वाले हैं। तब ऐड़ी चोटी का जोर लगाकर महाराष्ट्र की लोकतांत्रिक सरकार को छल से गिरा दिया गया। विधायक खरीदकर भाजपा ने महाराष्ट्र में सरकार बदल दी और तावड़े के केस को दबा दिया गया। लेकिन तावड़े आज ना कल जेल जाएँगे ही। ऐसे भ्रष्ट व्यक्ति को बिहार का प्रभारी बनाकर भेजा गया है, भाजपा बिहार के लिए ये शर्म की बात है। यह बिहार भाजपा के नेताओं के मुहँ पर तमाचा है।

विवेकानंद की रिपोर्ट 

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