'जेन्ने देखली खीर-ओन्ने बैठली फिर’! BJP ने बताया नीतीश कुमार ने कब-कब मारी पलटी....

'जेन्ने देखली खीर-ओन्ने बैठली फिर’! BJP ने बताया नीतीश कुमार ने कब-कब मारी पलटी....

पटना. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल का कहना है कि बिहार के सबसे बड़े दलबदलू मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं हैं। सोशल मीडिया पर एक लम्बा पोस्ट लिखते हुए उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण जी के संपूर्ण क्रांति से वह निकल के आए मगर आज जयप्रकाश नारायण जी क आत्मा रोती होगी कि जिस कांग्रेस और परिवारवाद के विरोध में उन्होंने संपूर्ण क्रांति शुरू किया था, आज उनके चेले उसी कांग्रेस और परिवारवाद के गोद में बैठे हुए हैं। बिहार की जनता अब नीतीश जी की रग-रग को पहचान गयी है। बिहारी जान चुके हैं कि नीतीश अगर किसी के वफादार हैं तो वह केवल और केवल कुर्सी है।

इसके लिए जनता, पुराने साथी, कार्यकर्ताओं, राजनीतिक गुरुओं, यहां तक कि अपनी ‘अंतरात्मा’ को भी धोखा दे सकते हैं। धोखा देना ही उनकी नीति है और फायदा देख पलटना उनका स्वभाव। बिहार की प्रसिद्ध कहावत ‘जेन्ने देखली खीर, ओन्ने बैठली फिर’ इसी तरह के व्यक्तियों के लिए कही गयी है.  नीतीश कुमार का राजनीतिक इतिहास उठा कर देखें तो शुरुआत से ही इनकी पलटी मारने की आदत साफ़ दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि अपनी शुरुआती राजनीति इन्होने जेपी और उसके बाद सत्येन्द्र नारायण सिन्हा जी को पकड़ कर चमकायी। लेकिन थोड़ी सफलता मिलते ही यह पलटी मार कर लोकदल में चले गये। इनकी महत्वकांक्षा ने उन्हें वहां भी टिकने नहीं दिया।  एकाध साल में यह फिर से पलटी मार कर जनता दल में शामिल हो गये। वहां से फिर पलटी मार कर देवीलाल जी के साथ भाग गये। कुछ साल यहां लालू जी के साथ गुजारने के बाद इनकी ‘अंतरात्मा’ फिर से जाग उठी और एक और पलटी के साथ यह समता पार्टी के नाम पर अपनी राजनीतिक दुकान चलाने लगे। बाद में भाजपा की बैसाखी पर इनकी राजनीति 2013 तक चली। लेकिन पलटी मारने की आदत ने इन्हें एक बार फिर उन्ही लालू और कांग्रेस के साथ खड़ा कर दिया, जिन्हें हटाने के नाम पर यह सत्ता में आये थे।

बहरहाल 2017 में इनकी सुविधाभोगी अंतरात्मा फिर जागी और राजद के साथ कभी न जाने की कसमें खाते हुए वापस भाजपा के दरवाजे पर आ गये। लोगों को लगा कि अब शायद यह सुधर गये हैं इसीलिए भाजपा ने इनका मान रखते हुए 2020 चुनाव में महज 43 सीटें मिलने पर भी इन्हें निसंकोच सीएम बना दिया। किन्तु दो सालों में ही इनकी महत्वकांक्षा फिर हिलोरें मारने लगी और यह पलटी मार कर फिर से उन्हीं लालू की गोद में बैठ गये, जिन्होंने नीतीश कुमार को ऐसा सांप बताया था, जो हर दो साल बाद अपना केंचुल छोड़कर नया चमड़ा (गठबंधन) धारण कर लेता है । इतने दिनों में साथी बदलते गये, कुछ नहीं बदला तो नीतीश जी की पलटी मारने की आदत और पॉवर में बने रहने की उनकी भूख।

उन्होंने कहा कि आज हाल यह है कि इनके सहयोगी भी इन पर विश्वास करना छोड़ चुके हैं। इनके बारे में प्रसिद्ध था कि नीतीश अपनी छवि से समझौता नहीं करते लेकिन बार-बार पलटी मार के इन्होंने उसे भी ध्वस्त कर दिया है। हर कोई जान चुका है कि ‘ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे नीतीश ने ठगा नहीं’ या जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह जी की भाषा में बोलें तो इनके पेट में भी दांत है। इसी का परिणाम था कि दिल्ली में विपक्षी नेताओं से मिलने के लिए इन्हें लालू जी का सहारा लेना पड़ा, जिनके साथ काम करने में इनका दम घुटने लगा था।

उन्होंने कहा कि आज नीतीश जी राजनीतिक मोक्ष को प्राप्त करने की राह पर चल रहे हैं। अब न तो उन्हें मान का भय है और न ही अपमान की चिंता। उन्हें न तो खुद को बेशर्म, चोर और न जाने क्या-क्या कहने वाले युवराजों को अपना उत्तराधिकारी मानने में हिचकिचाहट होती है और न ही बिहारियों का अपमान करने वाले केजरीवाल के सामने सरेंडर करने में शर्म आती है। वास्तव में इस बार की पलटी नीतीश कुमार जी पर कितनी भारी पड़ने वाली है उसका अंदाजा भी उन्हें नहीं है। वक्त जल्द ही उन्हें इसका एहसास करवा देगा.


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