SARAN NEWS : खनन कम्पनी ने खड़े किये हाथ, फिर भी बालू का हो रहा अवैध कारोबार, पढ़िए पूरी खबर

SARAN NEWS : खनन कम्पनी ने खड़े किये हाथ, फिर भी बालू का हो रहा अवैध कारोबार, पढ़िए पूरी खबर

CHAPRA : सारण में लाल बालू की काली कमाई का खेल बंद नहीं होने वाला है, जैसा कि कई कार्रवाई के बाद भी रोज सैकड़ों ट्रकों में लोडिंग व अनलोडिंग को देखने से लग रहा है। यहां सफेदपोशों के संरक्षण में अवैध धंधेबाज रोज अवैध रूप से लाखों की कमाई कर सरकार को करोड़ों का चूना लगा रहे हैं। ऐसे में बालू राजस्व चालान काटने वाली जो भी कंपनियां प्रतिनियुक्त की गई थी, सबने इनके आगे घुटने टेके हैं, और उनके लिए टेंडर घाटा का रहा है, तभी तो एक बार फिर सारण की  बालू राजस्व चालान काटने वाली कंपनी ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। एक मई से ही राजस्व चालान नहीं काटा जा रहा है।  ब्रॉडसन कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड के सरेंडर कर देने के बाद राज्य सरकार को हर रोज करोड़ों रुपए राजस्व का चूना लग रहा है। इसका मतलब ये नहीं कि बालू की खनन और ब्रिकी बंद है। ये तो सिर्फ सरकारी चिट्ठी में है। अब स्थानीय थाने की पुलिस 'बालू किंग' बन गई है। यदि ऐसा नहीं है तो फिर दिघवारा व नयागांव के हराजी मोड़, गोराईपुर घाट पर के बालू लोडिंग व अनलोडिंग समेत ट्रूकों के कतार वाली विडियों व फोटों को देख अनुमान लगाया जा सकता है, कि स्थिति अभी क्या हैं। 

अधिकारियों ने कसी नकेल को माफियाओं की गठजोड़ की कलई खुली

हाल ही में डीआईजी सारण ने बालू माफियाओं पर नकेल कसने के लिए ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की। इसमें लोकतंत्र ने चौथे स्तंभ ने साथ देना शुरू कर दिया और खबरों को प्रमुखता देते हुए बालू माफियाओं व स्थानीय थाने की गठजोड़ की पोल खोलनी शुरू की। ये स्थानीय थाने को पसंद नहीं आया। उसने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को ही इसमें घसीट दिया, ताकि कलम नरम पड़ जाए। सबसे बड़ी बात है कि डीएम व एसपी तक ने बालू माफियाओं पर नकेल कसने के लिए ताबड़तोड़ घाटों पर छापेमारी की, पर इन सभी पर स्थानीय थानेदार भारी पड़ रहे हैं। 

...तो कंपनी ने इसलिए हाथ किए खड़े

बालू चालान काटने वाली कंपनी ब्रॉडसन कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड ने एक मई को यह कहते हुए सरकार के यहां सरेंडर कर दिया कि सफेदपोशों व अवैधधंधेबाजों की नौटंकी से उसे प्रतिदिन लाखों का घाटा हो रहा है। इससे इंकार नहीं किया जात सकता है। आए दिन अखबारों व न्यूज चैनलों में अवैध धंधेबाजों की कारगुजारियां सामने आ रही हैं। स्थिति यह है कि 60-90 फीसदी बालू वाले वाहन बगैर चालान कटाए बालू लेकर निकल जाते हैं। बचने के लिए जाली चालान का सहारा लिया जाता था, जो महज दो-ढाई सौ रुपए में मिल जाया करता है। अब सवाल यह है कि बिना मिलीभगत के ऐसा संभव नही है। इसमें थाना व खनन विभाग को क्लीनचीट नहीं दिया जा सकता। इधर कंपनी के लिए कर्मचारियों का खर्च और सरकार को राजस्व चुकाना महंगा साबित हो रहा था। टेलीफोनिक व पत्र व्यवहार के द्वारा कंपनी ने कई बार राज्य सरकार व आलाअधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया। पर वहां से भी एक लेटर निकल जाता है, फिर मामला जस का तस हो जाता है। शायद यही कारण है कि कंपनी ने अपने हाथ खडे़ कर दिए हैं। खनन विभाग अपना पल्ला झाड़ते हुए तो यह कह रहा है कि सारण में बालू भोजपुर, बिहटा और मनेर से खनन होकर आता हैं। अवैध खनन वाले बालू वहां नहीं रोके जाते और यहां उन्हें रोकना और पकड़ना मुश्किल हो जाता है। उनके विभाग के पास संसाधन और कर्मचारी उतने नहीं हैं कि यहां प्रतिदिन आने वाले हजारों वाहनों की जांच की जा सके। बावजूद जांच होती है और वाहन पकड़े जाते हैं। पुलिस की अपेक्षाकृत सहयोग मिले तो इस अवैध कारोबार पर लगाम लग सकता है।

कंपनी के हटते ही स्थानीय थाने की खिली बांछे, बनी बालू किंग

राजस्व चालान काटने वाली कंपनी के पीछे हटने के साथ ही स्थानीय थाने की बांछे खिल गयी है। इसस कतई इंकार नहीं किया जा सकता कि अवैध खनन के इस खेल में बालू माफियाओं को पुलिस का साथ मिला हुआ है। बालू के धंधे से जब ब्रॉडसन कंपनी ने पांव खिचे तो कई छुटभैया टाइप के माफिया पैदा हो गए। जो पटना से लेकर औरंगाबाद और भोजपुर से लेकर छपरा तक पुलिस की मिलीभगत से बालू की कमाई पर महल खड़ा कर रहे हैं। सोन नदी में बालू की लूट मची है। लाखों-करोड़ों का वारा-न्यारा हो रहा है। इसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल है। सरकार की नजर बालू की लूट पर नहीं बल्कि सोन नदी से ब्रॉडसन कंपनी के पांव पूरी तरह उखड़ने पर है। एक बार ब्रॉडसन कंपनी सोन से निकल गई तो बालू के नए माफिया पर भी सरकार नकेल कस देगी। तब तक बालू की लूट है। जितना लूट सकते हैं, लूट लें। इसमें पटना में सत्ता के दरबारी से लेकर लोकल स्तर के सफेदपोश तक शामिल हैं। अवैध बालू की 'धार' में हर कोई डुबकी लगाना चाहता है, जिसका भी थोड़ा-बहुत सत्ता से कनेक्शन है। इसे लेकर बिहार के खान और भूतत्व विभाग की प्रधान सचिव हरजोत कौर बम्हारा ने राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। पत्र में प्रधान सचिव ने कहा है कि बिहार में पुलिस के संरक्षण में बड़े पैमाने पर बालू का अवैध खनन हो रहा है। ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कड़े कदम उठाए जाएं। प्रधान सचिव हरजौत कौर ने अपने पत्र में सीधे-सीधे पुलिसवालों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। ऐसे में जब राज्य के आलाअधिकारी ही इस बात की पुष्टि करते हैं कि पुलिस मिली हुई है तो जिले के बड़े अधिकारियों को स्थानीय थाने के थानेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। इतना ही नहीं यदि कोई सफेदपोश अपरोक्ष रूप से इस खेल में शामिल है तो उसका भंडाफोड़ करना चाहिए। साथ ही बालू के कमी की वजह से रिएल एस्टेट बिजनेस प्रभावित होने लगा है। लोगों को घर बनाने के लिए बालू की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार से सपोर्ट नहीं मिलने की वजह बालू कारोबारियों को परेशानी हो रही है। 

अंबिका भवानी मुख्य रास्ते पर भी कब्जा

स्थिति इतनी भयावह है कि ये धंधेबाज मुख्य सड़कों को तो कब्जा किए ही हैं, मां अंबिका भवानी को जाने वाली रास्ते में भी वाहनों की घुड़दौड़ शुरू कर दी है। यानी की मंदिर तक पहुंचने के लिए लोगों को कई रिस्क उठानी पड़ रही है। दिघवारा प्रखंड गड़खा प्रखण्ड के कुछ पँचायत एवं सदर प्रखंड के दर्जनों बालू घाट पर लगभग 500 से 1 हजार ट्रक बालू की हो रही ढुलाई हो रही है। ट्रकों के निर्माणाधीन फोर लेन लगे रहने के कारण फिर बन गई छपरा से पटना भाया डोरीगंज  दीघवारा सड़क में जाम की स्थिति बनी रहती है। सभी ट्रक में लगभग ओवरलोड रहता है। साथ ही उन पर लदे बालू का कोई वैध कागजात नहीं रहता है। बावजूद इन अवैद्घ करोबरियो ट्रक एवं ट्रैक्टर लोडर नाव पर खनन विभाग के द्वारा बड़ती जा रही नरमी एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। इलाके में इन बालू की घाटों पर लूट को देखकर ऐसा महसूस हो रहा है, कि यहां सुशासन राज न होकर पूरा माफिया का राज है, तभी तो दिन के उजाले में बिना किसी वैध कागजात के 15 किलोमीटर लंबी नदी तट पर यह कारोबार चल रहा है। आस पास के इलाके के ग्रामीणों की बात माने तो इन घाटों के इलाके में कोई ऐसा सबल एवं सफेदपोश व्यक्ति नही है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस लाल बालू के काले खेल में शामिल नही हो ।

सीओ को मिला अधिकार, पर सब बेकार

जिलाधिकारी ने अंचलाधिकारियों को दिए गए आदेश जिसमे अंचलाधिकारियों को अवैद्घ बालू  खनन रोकने के लिये खनन  अधिकारी का अधिकार दिया गया है ताकि कार्रवाई हो सके, पर यह अधिकार बेकार साबित हो रहा है।  अधिकार मिलने के लगभग अभी 1 माह बीत गए लेकिन कहीं भी एक भी करवाई या अवैद्घ कारोबार पर प्राथमिकी अंचलाधिकारी ने नही करवाया है। जबकि अब तो यह अवैद्घ कार्य दिन दहाड़े एन एच 19 के किनारे संचालित हो रहा है।

छपरा से संजय भारद्वाज/अनुज की रिपोर्ट

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