क्या पार्टी में अपना विश्वास खो रहे हैं बिहार भाजपा के बुजुर्ग नेता?

क्या पार्टी में अपना विश्वास खो रहे हैं बिहार भाजपा के बुजुर्ग नेता?

पटना। बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बयानों के बाद भाजपा में कैबिनेट विस्तार को लेकर कवायद तेज हो गई है। जिसके बाद यह संभावना जताई जा रही है कि जिस तरह शपथ ग्रहण में भाजपा ने पुराने नेताओं की जगह नए चेहरों पर अपना विश्वास दिखाया था, आनेवाले समय में भी उसी रणनीति को बढ़ाया जा सकता है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो पार्टी के बुजुर्ग नेताओं को धीरे धीरे मुख्य धारा की राजनीति से अलग किया जा रहा है। माना जा रहा है कि खरमास के बाद नीतीश कैबिनेट का विस्तार किया जा सकता है।

भाजपा में लगभग सारे वरिष्ठ नेताओं को बिहार की राजनीति की मुख्य धारा से अलग किया जा रहा है। सुशील मोदी को राज्यसभा भेजा जा चुका है। इससे पहले पार्टी के फायर ब्रांड गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे दिल्ली कूच कर चुके हैं।  इसके अलावा हाल ही में विधानसभा की विभिन्न कमेटियों में पार्टी ने अपने चार वरिष्ठ नेताओं को जगह दिलाई है. इनमें विजय कुमार सिन्हा जहां स्पीकर बने, वहीं नंदकिशोर यादव, प्रेम कुमार, विनोद नारायण झा, रामनारायण मंडल और कृष्ण कुमार ऋषि को विधानसभा की विभिन्न कमेटियों का अध्यक्ष बनाया गया. दशकों तक राजनीति करने के बाद भी इन नेताओं में शायद ही कोई चेहरा ऐसा रहा, जिन्हें प्रदेश स्तर पर लोगों का विश्वास जीतने में कामयाबी हासिल की हो। अब पार्टी इन चेहरों की जगह नए चेहरों को मौका देकर नई शुरुआत करना चाहती है। पार्टी के लिए यह बेहतर अवसर भी है, क्योंकि पहली बार भाजपा को बिहार में बड़ी जीत मिली है. साथ ही नीतीश कुमार की राजनीति अपने आखिरी सालों में है। ऐसे में भाजपा नए चेहरों को मौका देकर उन्हें प्रदेश स्तर के नेता के रूप में तैयार करना चाहती है।


इन चेहरों पर हो सकता है भाजपा का दांव

नीतीश कैबिनेट में तारकेश्वर प्रसाद और रेणु देवी जैसे अंजान चेहरों को राज्य के डिप्टी सीएम की कुर्सी पर बैठाकर भाजपा ने इसकी शुरुआत भी कर  दी है। अब आनेवाले दिनों में नीतीश मिश्रा, नितिन नवीन, संजीव चौरसिया, श्रेयसी सिंह और सम्राट चौधरी जैसे युवा विधायकों पर पार्टी अपने दांव आजमा सकती है


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