पूर्व पीएम चंद्रशेखर के इस हनुमान ने बना दिया लालू यादव को बिहार का मुख्यमंत्री, पढ़िए राजद सुप्रीमो के सीएम बनने की इनसाइड स्टोरी

पूर्व पीएम चंद्रशेखर के इस हनुमान ने  बना दिया लालू यादव को बिहार का मुख्यमंत्री, पढ़िए राजद सुप्रीमो के सीएम बनने की इनसाइड स्टोरी

DESK : बिहार में सियासी पारा पूरी तरह गर्म है. एक तरफ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव महागठबंधन का नेतृत्व कर रहे है तो दूसरी और एनडीए नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ रहा है. इस बीच बिहार के कद्दावर नेता रघुनाथ झा की चर्चा करना लाजिमी हो जाता है. जिनकी बदौलत लालू प्रसाद 1990 में बिहार के मुख्यमंत्री बने थे. आज तेजस्वी यादव उन्हीं की विरासत संभाल रहे हैं. लालू प्रसाद को मुख्यमंत्री बनाने वाले वे कद्दावर नेता थे रघुनाथ झा. जिनका कुछ दिन पूर्व ही किडनी की बीमारी के कारण निधन हो गया. रघुनाथ झा लगातार छह वार शिवहर से विधायक और दो बार गोपालगंज और बेतिया से सांसद रहे. बिहार सरकार के डेढ़ दर्जन से अधिक विभागों का जिम्मा भी संभाला. इसके अलावा रघुनाथ झा पूर्व की मनमोहन सरकार में भारी उद्योग राज्य मंत्री भी रहे.


उनके राजनीतिक जीवन की बात करें तो रघुनाथ झा जनता दल के गठन के बाद उसके प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ समता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे थे. साथ ही जनता विधानमंडल दल के नेता और जनता दल और समता पार्टी दल के मुख्य सचेतक भी रहे. उन्होंने साल 1990 में मुख्यमंत्री पद का चुनाव लड़ा और लालू प्रसाद को मुख्यमंत्री बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. बता दें की अगर रघुनाथ झा नहीं रहते तो लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री नहीं बनते. 

बात 1990 की है जब बिहार में तख्ता पलट हुआ था. कांग्रेस को हराकर जनता दल सत्ता में आई थी. उस समय लालू प्रसाद यादव के दूर-दूर तक मुख्यमंत्री बनने की चर्चा नहीं थी. लालू 1989 में छपरा से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद थे. इधर बिहार में विधायक दल के नेता की खोज हो रही थी. अंत में इसके लिए वोटिंग करानी पड़ी. प्रधानमंत्री वीपी सिंह चाहते थे कि रामसुन्दर दास बिहार के मुख्यमंत्री बने, उनके पास अनुभव भी था और वो पहले भी मुख्यमंत्री रह चुके थे. लेकिन तत्कालीन उपप्रधानमंत्री देवीलाल नहीं चाहते थे कि रामसुन्दर दास मुख्यमंत्री बने. रामसुन्दर दास को काटने के लिए देवीलाल ने लालू प्रसाद यादव को आगे किया. विधायक दल के नेता के लिए रामसुन्दर दास और लालू प्रसाद यादव आमने-सामने थे. लेकिन दरअसल लड़ाई वीपी सिंह और देवीलाल के बीच थी. लालू यादव को यह पता था कि वो विधायक दल के नेता के इस चुनाव में हार सकते हैं. क्योंकि रामसुन्दर दास को पिछड़ों-दलितों के साथ-साथ सवर्ण विधायकों का भी समर्थन प्राप्त था.


देवीलाल और चन्द्रशेखर के बीच अच्छा तालमेल था और रघुनाथ झा चंद्रशेखर के खास थे. ऐसे में लालू प्रसाद यादव को विधायक दल का नेता चुनवाने के लिए तय हुआ कि रघुनाथ झा को इस दंगल में खड़ा किया जाये. रघुनाथ झा खड़े हुए उन्हें 27 विधायकों का समर्थन मिला. लेकिन जीत लालू प्रसाद यादव की हुई क्योंकि रघुनाथ झा रामसुन्दर दास का वोट काटने में सफल रहे. बाद में राज्यपाल ने उन्हें शपथ ग्रहण के लिए बुलाया और उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गयी. 


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