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नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने सीएम नीतीश से पूछा सवाल, कहा- लालू यादव अगर निर्दोष थे, तो याचिका दायर करने से क्यों नहीं रोका ?

नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने सीएम नीतीश से पूछा सवाल, कहा- लालू यादव अगर निर्दोष थे, तो याचिका दायर करने से क्यों नहीं रोका ?

PATNA: बिहार में इन दिनों सियासत गरमाई हुई है। सीबीआई ने लालू यादव के जमानत को रद्द करने के लिए कोर्ट में याचिका दायर कर दिया है। वहीं इस मामले को लेकर भाजपा और महागठबंधन नेता एक दूसरे पर हमलावर हैं। इसी कड़ी में बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने मुख्यमंत्री द्वारा लालू यादव को फंसाने संबंधी बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि संवैधानिक पद आसीन व्यक्ति द्वारा इस तरह का बयान अशोभनीय है।

सिन्हा ने कहा कि लालू यादव के विरुद्ध न्यायालय में याचिका दायर करने औऱ सीबीआई को साक्ष्य उपलब्ध कराने में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह औऱ राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका थी। नीतीश कुमार के इशारे औऱ हस्तक्षेप के कारण ही ये लोग सक्रिय भूमिका में थे। यदि लालू यादव निर्दोष थे तो उनलोगों को नीतीश कुमार ने याचिका दायर करने से क्यों नहीं रोका। सीबीआई एक संवैधानिक संस्था है। सबूत औऱ साक्ष्य के आधार पर ही यह कार्रवाई करती है। चारा घोटाले के मामले में राज्य सरकार ने भी सीबीआई को प्रशंसनीय सहयोग किया था। यहां तक की न्यायालय में कुछ मामलों में बिहार सरकार इन्टरभेनर भी बनी थी। लेकिन उन सब बातों को भूलकर सीबीआई पर आरोप लगाना न्याय संगत नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ट्रायल कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक चारा घोटाले पर बहस हुई लेकिन लालू यादव सहित किसी भी अभियुक्त को कहीं से राहत नहीं मिली। राज्य के खजाने से 900 करोड़ की लूट का यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना। सीबीआई के द्वारा पहली कार्रवाई के समय विपक्षी गठबंधन के ही प्रधानमंत्री थे। लालू यादव खुद नेतृत्व की बड़ी भूमिका में थे लेकिन पटना उच्च न्यायालय द्वारा केस की मॉनिटरिंग के कारण कुछ नहीं कर पाए।

सिन्हा ने कहा कि जंगलराजवाले दिनों में चारा घोटाला महत्वपूर्ण मुद्दा था। 1990-2005 वाली सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए भाजपा ने जो आंदोलन चलाया था उसमें चारा घोटाले के विरूद्ध राज्य की जनता भी  सहयोग के लिए सड़क पर उतर गई थी। उसके बाद ही भाजपा ने नीतीश कुमार को राज्य का नेतृत्व सौंपा था लेकिन जंगलराजवालों को हटाने बाले आंदोलन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। ये उस आंदोलन के बलिदानियों को भी भूल गए। इन्हें उन दिनों के संघर्ष का कोई अनुभव अथवा योगदान नहीं है। इसी कारण वे चारा घोटाले वालों के साथ पिछले दरवाजे से सरकार बना लिए हैं और सीबीआई की आलोचना कर रहे हैं। राज्य की जनता सब देख रही है औऱ आने वाले चुनाव में इन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा देगी।

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