लोजपा की लड़ाई : पिता रामविलास के जन्मदिन को लेकर चिराग ने शुरू की बड़ी तैयारी, बढ़ जाएगी चाचा की परेशानी

 लोजपा की लड़ाई : पिता रामविलास के जन्मदिन को लेकर चिराग ने शुरू की बड़ी तैयारी, बढ़ जाएगी चाचा की परेशानी

NEW DELHI / PATNA : पिता रामविलास पासवान की मेहनत से संजोए गए पार्टी से दरकिनार हुए चिराग पासवान बिल्कुल अकेले पड़ गए हैं। चाचा ने जिस तरह के उन्हें पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाया है, उसके बाद अब चिराग अपने पिता की विरासत को बचाने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं। जिसमें उन्होंने आज न सिर्फ पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है, बल्कि अपने दिवंगत पिता के जन्मदिन को लेकर भी उन्होंने बड़ी तैयारी शुरू कर दिया है। रामविलास पासवान का जन्मदिन पांच जुलाई को मनाया जाता है. जिसके लिए जल्द ही चिराग के पटना आने की बात कही जा रही है। यह पहली बार होगा कि चिराग अपने पिता का जन्मदिन उनके बगैर मनाएंगे।

बताया जा रहा है कि जिस तरह से चाचा पशुपति ने अपने सांसदों के साथ मिलकर चिराग को पार्टी से लगभग बाहर का रास्ता दिखा दिया है। उसके बाद अब चिराग पासवान अपने पिता स्व. रामविलास पासवान के जन्मदिन के अवसर पर बिहार में आशीर्वाद यात्रा शुरू करने की योजना शुरू करने की योजना करने की घोषणा की है। मीडिया से बातचीत के दौरान चिराग ने कहा पिता के जाने के बाद एक चाचा थे, जिनका आशीर्वाद मेरे सिर पर था, लेकिन अब वह भी उठ गया है। ऐसे में अब बिहार की जनता के बीच उनका आशीर्वाद लेने जाऊंगा। 

हाजीपुर से शुरू होगी यात्रा

चिराग पासवान ने कहा कि उनकी यह यात्रा पिता की कर्मभूमि हाजीपुर से शुरू होगी। जो लगभग दो माह तक चलेगी, जिसमें पूरे बिहार का दौरा किया जाएगा, जिसके बाद इसका समापन पटना में किया जाएगा, जिसमें देश भर के सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष सहित सभी प्रकोष्ठों के अध्यक्ष जुटेंगे। इस दौरान चिराग पासवान पिता को लेकर थोड़ी देर के लिए इमोशनल भी नजर आए।

 बताया जा रहा है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य पिता के द्वारा तैयार पार्टी के जनाधार को अपने साथ बरकरार रखना बताया जा रहा है। चाचा पशुपति पारस ने जिस तरह धोखे से उन्हें पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाया, उसके बाद चिराग को लगातार लोगों को समर्थन मिल रहा है। बिहार में लोजपा के ज्यादातर कार्यकर्ता अब भी उन्हें ही रामविलास के बाद पार्टी का असली वारिस मान रहे हैं। 

चाचा की बढ़ जाएगी टेंशन

यह जाहिर है कि चाचा पशुपति पारस भले ही लोजपा के अध्यक्ष पद की कुर्सी हथियाने में सफल हो गए हों, लेकिन बिहार में उनका अपना कोई जनाधार नहीं है, न उन्हें रामविलास या चिराग जैसी लोकप्रियता हासिल है। साथ ही चिराग के साथ जिस तरह का सलूक उन्होंने किया है, उसके बाद बिहार में उनके समर्थकों में भी कमी आने की बात कही जा रही है। ऐसे में अगर चिराग बिहार में संघर्ष यात्रा निकालते हैं तो इसका असर पशुपति पर पड़ना तय है। साथ ही उन पर पार्टी को बचाए रखने का भी दबाब बढ़ जाएगा।


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