जदयू में मचे घमासान पर लोजपा(रा) ने कसा तंज, कहा ललन सिंह के हाथों ही तय है पार्टी का विसर्जन

जदयू में मचे घमासान पर लोजपा(रा) ने कसा तंज, कहा ललन सिंह के हाथों ही तय है पार्टी का विसर्जन

PATNA : जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के बयान को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी ( रामविलास) ने तंज कसा है। पार्टी प्रवक्ता धीरेन्द्र कुमार मुन्ना ने कहा की जद यू के भीतर लगी आग से उठ रही हर चिंगारी में उनको चिराग नजर आ रहा है। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष की बगावत में भी वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष को ललन को चिराग़ मॉडल दो नजर आ रहा है। पूरे बिहार में नकारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ ग़ुस्सा तो है ही अब पार्टी के भीतर भी आग सुलग रही है। 


उन्होंने कहा की यह सर्वविदित है की पलटुराम की पार्टी और उसके नेतागण कुर्सी के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं। किसी से भी हाथ मिलाने में कुर्सी कुमार को परहेज़ नहीं है। जबकि अपरोक्ष रूप से षड्यन्त्र का आरोप लगाने वाले ललन सिंह से बेहतर षड्यंत्रकारी बिहार में कोई दूसरा नहीं है। मुन्ना ने कहा की बिहार के लोगों को पिछले सत्रह वर्षों से मजबूरी के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ठगने का काम कर रहे हैं। ना हीं नीतीश जी को कोई मॉडल है ना ही कोई काम का मोड। बस हर हाल में कुर्सी पर बने रहना ही मुख्यमंत्री का मुख्य मक़सद है। 

मुन्ना ने कहा की दरअसल ललन सिंह के हाथ से ही पार्टी का विसर्जन होना तय है। क्योंकि पार्टी के बाहर उनको भी एक बार बाहर का रास्ता दिखाया गया है। अब नीतीश कुमार से बदला लेने का अच्छा समय है। उसमे बेचारे लगे हुए हैं। चिंगारी अब चिराग़ बन रहा है, कितनों को रोक पायेंगे नीतीश कुमार जी। कृपा पर कुर्सी पकड़ने में कोई बुराई नहीं मानता हूँ लेकिन नीतीश कुमार को बिहार का काम करना चाहिए था। अपनी परछाई को धूप में देख कर बड़ा समझनेवाले मुख्यमंत्री को आईने के सामने भी खड़ा होना चाहिए। बिहार तो रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, सिंचाई, दवाई , पढ़ाई की ज़रूरत है न कि नित्य नऐ प्रयोग की। अपने वफ़ादार को दूर कर मक्कारों को सलाहकार परिषद में रख कर अपनी राजनीतिक पारी का नीतीश कुमार अंत करना चाहते हैं। 

उन्होंने कहा की बिहार में मध्यावधि चुनाव होना संभावित है। चिराग़ पासवान  ने बहुत पहले कहा है की ख़ुद की चिंगारी से हीं अपने घर में आग लगाएँगे और नाम चिराग़ पासवान का लेंगे। बिहार में जनाधार नहीं बचा नीतीश कुमार का तो अब षड्यन्त्र का ढोंग कर रहे हैं। अगर सम्मान बचा है तो नैतिकता से पद का परित्याग कर दें। लोग याद करेंगे नहीं तो याद भी नहीं रखेंगे।

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